प्राकृतिक गैस आवंटन हेतु आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का प्रवर्तन

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन; GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • हाल ही में, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होरमुज़ जलडमरूमध्य से एलएनजी आपूर्ति में व्यवधान के बीच प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 अधिसूचित करते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का प्रवर्तन किया।

प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 के मुख्य बिंदु

  • चार-स्तरीय प्राथमिकता प्रणाली की स्थापना: गैस आवंटन हेतु विगत छह माह की औसत खपत के आधार पर।
  • गैस का पुनर्वितरण: निम्न-प्राथमिकता वाले उपभोक्ता जैसे पेट्रोकेमिकल्स एवं विद्युत संयंत्रों की आपूर्ति में कटौती कर उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को समर्थन।
  • पूल्ड तंत्र: पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) गैर-प्राथमिकता क्षेत्रों से प्राथमिकता क्षेत्रों में स्थानांतरित गैस के लिए पूल्ड मूल्य अधिसूचित करेगा, जिससे कमी के समय मानकीकृत मूल्य सुनिश्चित हों।
    • प्राथमिकता क्षेत्र की इकाइयों को इन पूल्ड मूल्यों को स्वीकार करना होगा तथा फोर्स मेज्योर अथवा आपूर्ति समायोजन पर मुकदमेबाज़ी के अधिकार त्यागने होंगे।

प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 के मुख्य बिंदु

गैस राशनिंग के कारण

  • एलएनजी आयात में व्यवधान: होरमुज़ जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा पारगमन मार्ग है जो फारस की खाड़ी को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ता है। क्षेत्रीय संघर्ष के कारण एलएनजी आपूर्ति बाधित हुई है।
    • भारत के एलएनजी आयात का लगभग एक-तिहाई प्रभावित हुआ है।
  • आयातित प्राकृतिक गैस पर भारत की निर्भरता: घरेलू उत्पादन सीमित होने के बावजूद भारत की प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है।
  • प्रमुख आँकड़े:
    • कुल गैस खपत (2024–25): 71.3 अरब घन मीटर (BCM)
    • आयात निर्भरता: लगभग 50%
    • प्रमुख एलएनजी आपूर्तिकर्ता: क़तर, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया
  • उच्च आयात निर्भरता अर्थव्यवस्था को भू-राजनीतिक आघातों और मूल्य अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाती है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA), 1955 के बारे में

  • इसका उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और मूल्य निर्धारण को विनियमित करना है ताकि उनकी उपलब्धता उचित मूल्य पर सुनिश्चित हो सके तथा कमी या आपातकालीन स्थिति में जमाखोरी, काला बाज़ारी एवं मुनाफाखोरी रोकी जा सके।
  • यह अधिनियम केंद्र सरकार (और कुछ मामलों में राज्य सरकारों) को उपभोक्ता हितों की रक्षा तथा खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने हेतु बाज़ार में हस्तक्षेप करने का अधिकार देता है।

अधिनियम के अंतर्गत वस्तुएँ

  • केंद्र सरकार कुछ वस्तुओं को ‘आवश्यक वस्तु’ घोषित कर सकती है।
  • सामान्य उदाहरण: खाद्यान्न (चावल, गेहूँ, दालें); खाद्य तेल, चीनी, पेट्रोलियम एवं पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, औषधियाँ, एलपीजी और प्राकृतिक गैस।
  • राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुसार सरकार वस्तुओं को सूची में जोड़ या हटा सकती है।

2020 में प्रमुख परिवर्तन (कोविड-19 के दौरान)

  • आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020
    • कृषि बाज़ारों के उदारीकरण हेतु प्रमुख सुधारों का परिचय: इस अधिनियम का उद्देश्य भंडारण, कोल्ड चेन और आपूर्ति अवसंरचना में निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।
  • कई कृषि वस्तुओं को सूची से हटाना: कुछ वस्तुओं को असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर विनियमन से मुक्त किया गया।
    • इसमें अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज़ और आलू शामिल हैं।
  • स्टॉक सीमा केवल असाधारण परिस्थितियों में: सरकार केवल युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में ही स्टॉक सीमा लागू कर सकती है।
  • मूल्य वृद्धि पर आधारित स्टॉक सीमा:
    • बागवानी उत्पादों की कीमत में 100% वृद्धि होने पर
    • गैर-नाशवान खाद्य वस्तुओं की कीमत में 50% वृद्धि होने पर
  • मूल्य श्रृंखला प्रतिभागियों हेतु छूट: यदि भंडार उनके उत्पादन या निर्यात आवश्यकताओं के अनुरूप है तो प्रोसेसर या निर्यातकों पर स्टॉक सीमा लागू नहीं होगी।

स्रोत: News On AIR

 

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