पाठ्यक्रम: GS2/ भारतीय राजव्यवस्था
संदर्भ
- भारत के संविधान के अनुच्छेद 94(ग) के अंतर्गत लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध एक अविश्वास प्रस्ताव (पद से हटाने का संकल्प) प्रस्तुत किया गया है।
लोकसभा अध्यक्ष
- लोकसभा अध्यक्ष भारत की संसद के निम्न सदन के अध्यक्षीय अधिकारी होते हैं और सदन के संवैधानिक एवं औपचारिक प्रमुख माने जाते हैं।
- अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष उनके कार्यों का निर्वहन करते हैं।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 93 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों के निर्वाचन का प्रावधान करता है।
- सामान्यतः सत्तारूढ़ दल का कोई सदस्य अध्यक्ष चुना जाता है।
- लोकसभा अध्यक्ष का वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर आरोपित होते हैं और इस प्रकार संसद के वार्षिक मत से अप्रभावित रहते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष की नियुक्ति
- लोकसभा अध्यक्ष की नियुक्ति के दो प्रकार से हो सकती हैं:
- प्रथम और सर्वाधिक प्रचलित तरीका यह है कि सत्तारूढ़ दल एक उम्मीदवार का नामांकन करता है। विपक्षी दल से औपचारिक परामर्श के बाद उस उम्मीदवार को संबंधित सभा के लिए लोकसभा अध्यक्ष नामित किया जाता है।
- दूसरा, कम प्रचलित तरीका यह है कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दल, दोनों ही अपने-अपने पक्ष से एक-एक उम्मीदवार का नामांकन करते हैं। अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के उपस्थित सांसदों द्वारा मतदान के आधार पर किया जाता है।
- लोकसभा की 72 वर्षों की अवधि में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव केवल तीन बार हुए हैं—1952, 1976 और 2024 में।
अध्यक्ष का पद से हटाया जाना
- अनुच्छेद 94(ग): अध्यक्ष को लोकसभा के संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है, जिसे सदन के उस समय के सभी सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है।
- इसे प्रभावी बहुमत कहा जाता है (सदन की कुल प्रभावी शक्ति का बहुमत, रिक्तियों को छोड़कर)।
- यदि प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो अध्यक्ष तत्काल पद से हटा दिए जाते हैं, किंतु वे सांसद बने रहते हैं।
- सूचना की आवश्यकता: संकल्प प्रस्तुत करने से कम से कम 14 दिन पूर्व लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
- न्यूनतम समर्थन: प्रस्ताव को चर्चा हेतु स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
- प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान:
- अध्यक्ष सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
- उपाध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य अध्यक्षता करता है।
- अध्यक्ष को चर्चा में भाग लेने और अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है।
अब तक पदच्युत किए गए लोकसभा अध्यक्ष
- लोकसभा के किसी भी अध्यक्ष को अब तक अविश्वास या पद से हटाने के संकल्प द्वारा सफलतापूर्वक पद से नहीं हटाया गया है। प्रयास किए गए, किंतु वे पद पर बने रहे।
- 1954 में अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर के विरुद्ध प्रस्ताव लाया गया।
- 1966 में अध्यक्ष हुक्म सिंह के विरुद्ध भी ऐसा ही प्रस्ताव आया।
- 1987 में अध्यक्ष बलराम जाखड़ के विरुद्ध प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
- 1969 में अध्यक्ष नीलम संजीव रेड्डी ने त्यागपत्र दिया। बाद में वे देश के राष्ट्रपति बने।
- प्रथम लोकसभा अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर का निधन पद पर रहते हुए हुआ।
- 2002 में अध्यक्ष जी.एम.सी. बालायोगी का हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हुआ, जब वे पद पर कार्यरत थे।
स्रोत: TH