पाठ्यक्रम: GS3/कृषि
संदर्भ
- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों से छोटे किसानों के लिए एकीकृत कृषि मॉडल विकसित करने का आह्वान किया।
परिचय
- उन्होंने उल्लेख किया कि पोल्ट्री, मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी तथा अन्य कृषि-आधारित खेती को एकीकृत करने वाले मॉडल छोटे किसानों को बेहतर आय प्राप्त करने में सहायक होंगे।
- उन्होंने यह भी आग्रह किया कि प्रयोगशालाओं में विकसित किस्मों और संकरों को किसानों तक पहुँचने में लगने वाले समय को चार-पाँच वर्षों से घटाकर केवल दो वर्ष किया जाए।
एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS)
- एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) दो या अधिक घटकों — जैसे बागवानी फसलें, पशुधन, मत्स्य पालन, पोल्ट्री/बतख पालन, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन — के बीच सकारात्मक अंतःक्रिया है।
- यह न्यूनतम प्रतिस्पर्धा और अधिकतम परस्पर पूरकता के सिद्धांतों का उपयोग उन्नत कृषि प्रबंधन उपकरणों के साथ करती है।
- इसका उद्देश्य पर्यावरण-अनुकूल कृषि आय, पारिवारिक पोषण और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बनाए रखना है।
IFS के उद्देश्य
- खेत की विभिन्न उप-प्रणालियों से उत्पन्न अपशिष्ट को सहजीवी प्रणालियों का विस्तार करके न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादकता हेतु ऊर्जा, उर्वरक और चारे के रूप में उपयोग करना।
- उपयुक्त फसल पद्धति, अंतरफसलन, मिश्रित फसल चक्रण आदि का चयन कर प्रतिस्पर्धा को कम करना और जल, पोषण तथा स्थान का सर्वोत्तम उपयोग करना।
- उपलब्ध संपूर्ण क्षेत्र का प्रभावी उपयोग करना तथा जैविक और अजैविक घटकों के बीच अंतःक्रिया सुनिश्चित करना।
- ग्रामीण कृषि को विविधीकृत कर जोखिमों को न्यूनतम करते हुए खेत परिवार के आहार विविधीकरण में सुधार करना और सतत आजीविका प्राप्त करना।
IFS का प्रभाव
- उच्चतर समग्र उत्पादकता: IFS एकल फसल प्रणाली की तुलना में कुल उत्पादन बढ़ाता है।
- कृषि आय में वृद्धि: विविधीकृत उद्यम (डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, बागवानी) कुछ क्षेत्रों में शुद्ध आय को तीन गुना तक बढ़ा सकते हैं।
- सालभर आय स्थिरता: बहु-उद्यम एकल फसल पर निर्भरता कम करते हैं और निरंतर नकदी प्रवाह सुनिश्चित करते हैं।
- पोषण सुरक्षा में सुधार: फसल और गृह उद्यान की विविधता आहार विविधता एवं खाद्य आत्मनिर्भरता को बढ़ाती है।
- महिलाओं की आर्थिक भागीदारी: डेयरी, पशुधन और पोल्ट्री क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आजीविका अवसरों का विस्तार होता है।
- मृदा स्वास्थ्य सुधार: पोषक तत्व पुनर्चक्रण को बढ़ावा देता है, मृदा कार्बनिक कार्बन बढ़ाता है, सूक्ष्मजीव गतिविधि को प्रोत्साहित करता है और अपरदन को कम करता है।
- जैव विविधता एवं पारिस्थितिक लाभ: फसल और प्रजाति विविधता बढ़ाता है, पोषक तत्व चक्रण में सुधार करता है तथा अवशेष पुनर्चक्रण तथा कृषि-वनीकरण एकीकरण के माध्यम से उत्सर्जन को संभावित रूप से कम करता है।
सरकारी पहलें
- राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA): जलवायु-संवेदनशील और सतत कृषि को बढ़ावा देता है।
- एकीकृत फसल, पशुधन, बागवानी और मत्स्य प्रणालियों को प्रोत्साहित करता है।
- मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और संसाधन-उपयोग दक्षता पर केंद्रित है।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY): सिंचाई कवरेज बढ़ाता है और “प्रति बूंद अधिक फसल” को बढ़ावा देकर जल-उपयोग दक्षता सुनिश्चित करता है।
- बागवानी और मत्स्य-आधारित जल-कुशल एकीकृत मॉडल का समर्थन करता है।
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM): पशुधन विकास (डेयरी, पोल्ट्री, छोटे जंतुओं) को समर्थन देता है और फसल कृषि के साथ पशुधन एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।
- बागवानी के एकीकृत विकास हेतु मिशन (MIDH): फल, सब्जियाँ, मसाले, बागान फसलें को बढ़ावा देता है, जो विविधीकरण को सुदृढ़ करता है और IFS का प्रमुख स्तंभ है।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) एवं कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs): क्षेत्र-विशिष्ट IFS मॉडल विकसित करते हैं और प्रदर्शन व किसान प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
- यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करता है।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 11-02-2026