पाठ्यक्रम: GS2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) हेतु संदर्भ शर्तों (Terms of Reference) पर हस्ताक्षर किए हैं।
परिचय
- संदर्भ शर्तें (ToR) प्रस्तावित व्यापार समझौते के दायरे और प्रक्रियाओं को रेखांकित करती हैं।
- यह समझौते के दायरे को परिभाषित करती है, जिसमें वस्तुओं का व्यापार, सेवाओं का व्यापार, निवेश और अन्य व्यापार-संबंधी मुद्दे शामिल हैं।
- वार्ताओं की संरचना और समयसीमा निर्धारित करती है।
- शुल्क कटौती की प्रक्रियाएँ और विवाद निपटान तंत्र निर्दिष्ट करती है।
- तकनीकी मानकों, मूल नियमों (Rules of Origin), सीमा शुल्क सहयोग और व्यापार सुविधा उपायों पर स्पष्टता प्रदान करती है।
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बारे में
- GCC एक क्षेत्रीय राजनीतिक और आर्थिक संघ है, जिसकी स्थापना 1981 में हुई थी।
- इसमें छह सदस्य देश शामिल हैं: सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, बहरीन एवं ओमान।
- इसका मुख्यालय रियाद, सऊदी अरब में स्थित है।
- इसका उद्देश्य समान लक्ष्यों और राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान के आधार पर अपने सदस्यों के बीच एकता स्थापित करना है, जो अरब एवं इस्लामी संस्कृति में निहित है।

भारत के लिए GCC का महत्व
- GCC देश सामूहिक रूप से 61.5 मिलियन लोगों (2024) का बाज़ार और वर्तमान मूल्यों पर US$ 2.3 ट्रिलियन का GDP दर्शाते हैं, जो इस श्रेणी में वैश्विक स्तर पर 9वें स्थान पर है।
- यहाँ पर लगभग एक करोड़ भारतीय समुदाय के सदस्य निवास करते हैं।
- भारत और GCC के बीच मुक्त व्यापार समझौता भारत के खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना, पेट्रोकेमिकल और ICT क्षेत्रों को लाभ पहुँचाएगा, जिससे दोनों पक्षों के संबंध नई ऊँचाइयों पर पहुँचेंगे।
भारत–GCC व्यापार सहयोग
- FY 2024-25 में भारत का GCC के साथ व्यापार USD 178.56 बिलियन रहा (निर्यात: USD 56.87 बिलियन; आयात: USD 121.68 बिलियन), जो भारत के वैश्विक व्यापार का 15.42% है।
- विगत पाँच वर्षों में भारत का GCC के साथ व्यापार औसतन 15.3% वार्षिक वृद्धि दर से विस्तारित हुआ है।
- भारत से GCC को प्रमुख निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुएँ, चावल, वस्त्र, मशीनरी, रत्न और आभूषण शामिल हैं।
- GCC से भारत में प्रमुख आयात क्षेत्रों में कच्चा तेल, LNG, पेट्रोकेमिकल और सोना जैसे बहुमूल्य धातु शामिल हैं।
- GCC क्षेत्र भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है, जिसकी संचयी निवेश राशि सितंबर 2025 तक USD 31.14 बिलियन से अधिक रही है।

भारत–GCC मुक्त व्यापार समझौते की चुनौतियाँ
- स्थायी व्यापार घाटा: भारत GCC के साथ बड़े और संरचनात्मक व्यापार घाटे का सामना करता है, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल, LNG एवं सोने का भारी आयात है। शुल्क कटौती के बावजूद ऊर्जा आयात व्यापार प्रवाह पर प्रभुत्वशाली रहेंगे।
- सीमित निर्यात विविधीकरण: भारत का GCC को निर्यात अभी भी कुछ क्षेत्रों में केंद्रित है।
- बढ़ती प्रतिस्पर्धा: कई GCC देश सऊदी विज़न 2030 जैसे कार्यक्रमों के अंतर्गत विनिर्माण और सेवाओं में विविधीकरण कर रहे हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
- भारतीय MSMEs के लिए प्रतिस्पर्धा: व्यापार उदारीकरण भारत के MSMEs और छोटे निर्माताओं को दुबई जैसे खाड़ी-आधारित पुनः-निर्यात केंद्रों से प्रतिस्पर्धा के लिए उजागर करेगा।
आगे की राह
- भारत को संतुलित शुल्क रियायतों पर चरणबद्ध कटौती के साथ वार्ता करनी चाहिए।
- व्यापार परिहार को रोकने हेतु सुदृढ़ मूल नियम (Rules of Origin) शामिल किए जाने चाहिए।
- निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को निम्न उपायों से बढ़ाना चाहिए:
- लॉजिस्टिक्स सुधार
- गुणवत्ता मानकीकरण
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन
- रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी में केवल कच्चे तेल आयात ही नहीं, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और पेट्रोकेमिकल मूल्य श्रृंखलाओं में सहयोग भी शामिल होना चाहिए।
Source: TH