पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने अपनी प्रकाशन श्रृंखला का 27वाँ संस्करण जारी किया है, जिसका शीर्षक है “भारत में महिलाएँ और पुरुष 2025: चयनित संकेतक और आँकड़े”।
‘भारत में महिलाएँ और पुरुष 2025’ रिपोर्ट
सार:
- यह रिपोर्ट भारत में लैंगिक परिस्थितियों का व्यापक सांख्यिकीय अवलोकन प्रस्तुत करती है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों से प्राप्त आधिकारिक आँकड़ों का उपयोग किया गया है।
- इसमें जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी, निर्णय-निर्माण और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लैंगिक-विभाजित आँकड़े सम्मिलित किए गए हैं।
- इसमें 50 प्रमुख संकेतक शामिल हैं, जिनके साथ विस्तृत मेटाडाटा दिया गया है, जो परिभाषाओं, स्रोतों और विधियों को स्पष्ट करता है।
- रिपोर्ट ग्रामीण–शहरी क्षेत्रों, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों एवं समय के साथ आँकड़े प्रस्तुत करती है, जिससे लैंगिक अंतराल की तुलना और प्रवृत्तियों का आकलन संभव होता है।
प्रकाशन की प्रमुख विशेषताएँ
- लिंगानुपात: जन्म के समय लिंगानुपात अखिल भारतीय स्तर पर बढ़ा है, जो महिलाओं की बेहतर जीवित रहने की स्थिति को दर्शाता है। यह 2017–19 में 904 से बढ़कर 2021–23 में 917 हुआ।
- शिशु मृत्यु दर: 2008 से 2023 के बीच बालिका और बालक दोनों के लिए शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय एवं सतत कमी दर्ज की गई है।

- शिक्षा में लैंगिक समानता: प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षा में लैंगिक समानता प्राप्त हो चुकी है।

- उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात: 2021–22 से 2022–23 के बीच महिलाओं के लिए यह 28.5 से बढ़कर 30.2 हुआ, जबकि पुरुषों के लिए 28.3 से बढ़कर 28.9 हुआ।

- श्रम बल भागीदारी दर (LFPR): 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए LFPR में वृद्धि हुई है।
- ग्रामीण महिलाओं में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो 2022 से 2025 के बीच 37.5% से बढ़कर 45.9% हुई।
- नेतृत्व भूमिकाएँ:
- 2017 से 2025 के बीच प्रबंधकीय पदों पर कार्यरत पुरुषों में 73.80% की वृद्धि हुई।
- इसी अवधि में प्रबंधकीय पदों पर कार्यरत महिलाओं में 102.54% की वृद्धि हुई।
महिला सशक्तिकरण हेतु प्रमुख कदम
- संवैधानिक और कानूनी ढाँचा:
- भारतीय संविधान प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निदेशक तत्वों के माध्यम से लैंगिक समानता की गारंटी देता है।
- अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करता है, जबकि अनुच्छेद 15 लिंग आधारित भेदभाव को निषिद्ध करता है।
- अनुच्छेद 51(क)(ई) नागरिकों को महिलाओं की गरिमा के प्रतिकूल प्रथाओं को त्यागने हेतु प्रेरित करता है।
- अनुच्छेद 39 और 42 समान आजीविका अवसर, समान वेतन एवं मातृत्व राहत पर बल देते हैं।
- पोषण अभियान (2018): बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण में सुधार हेतु प्रमुख कार्यक्रम।
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (2015): कन्या भ्रूण हत्या रोकने, बालिका के जीवन और शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु योजना।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): गर्भावस्था और प्रसव के कारण मजदूरी हानि की भरपाई हेतु वित्तीय सहायता।
- अब यह योजना दूसरे बच्चे (यदि बच्ची हो) तक विस्तारित की गई है।
- मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0: बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण, स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा सुधार हेतु।
- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBVs): सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों की बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय।
- विज्ञान ज्योति: ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी बालिकाओं को STEM करियर हेतु प्रोत्साहित करने वाला कार्यक्रम।
- NAVYA (2025): किशोरियों (16–18 वर्ष, कक्षा 10 उत्तीर्ण) के लिए कौशल विकास कार्यक्रम।
- मिशन शक्ति: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू की गई योजना, जिसमें दो घटक हैं—
- संबल: सुरक्षा और संरक्षा।
- समर्थ्य: सशक्तिकरण।
स्रोत :DD News
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