क्वाड ने स्वतंत्र-स्थिर हिंद-प्रशांत के लिए कार्य करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • क्वाड राष्ट्रों ने क्वाड सहयोग के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक संयुक्त वक्तव्य में स्वतंत्र, खुले और स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

संयुक्त वक्तव्य की प्रमुख विशेषताएँ

  • क्वाड ने दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) की केन्द्रीयता और एकता के प्रति अपना अटूट समर्थन दोहराया।
    • सदस्यों ने क्षेत्रीय सहयोग की रूपरेखा के रूप में हिंद-प्रशांत पर ASEAN आउटलुक (AOIP) के कार्यान्वयन का समर्थन किया।
  • मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR): सदस्यों ने 2024 में आपदा तैयारियों का समर्थन करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संकट के दौरान त्वरित, जीवन रक्षक राहत प्रदान करने के लिए अपने चल रहे प्रयासों पर बल दिया।

क्वाडिलेटरल सुरक्षा वार्ता (QUAD)

  • यह भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का एक अनौपचारिक बहुपक्षीय समूह है जिसका उद्देश्य स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए सहयोग करना है।
  • उत्पत्ति: क्वाड की शुरुआत 2004 के हिंद महासागर सुनामी के बाद एक ढीली साझेदारी के रूप में हुई थी, जब चार देश प्रभावित क्षेत्र में मानवीय और आपदा सहायता प्रदान करने के लिए एक साथ आए थे।
    • इसे 2007 में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने औपचारिक रूप दिया था, लेकिन उसके पश्चात् यह निष्क्रिय हो गया।
  • एक दशक के पश्चात् 2017 में इसे पुनर्जीवित किया गया, जो चीन के बढ़ते प्रभाव के प्रति क्षेत्र में बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है।

क्वाड का सामरिक महत्त्व

  • एक्ट ईस्ट नीति: क्वाड में भारत की भागीदारी पूर्वी एशियाई देशों के साथ गहन जुड़ाव और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर बल देती है।
  • सैन्य सहयोग: यह समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और कानून का शासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सैन्य सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने एवं संयुक्त अभ्यास के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • चीन के प्रभाव को संतुलित करना: भारत के समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय जल में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए क्वाड महत्त्वपूर्ण है।
  • भारत ने नियम-आधारित बहुध्रुवीय विश्व का समर्थन किया है और क्वाड उसे क्षेत्रीय महाशक्ति बनने की महत्त्वाकांक्षा को प्राप्त करने में सहायता कर सकता है।

क्वाड के समक्ष चुनौतियाँ

  • भिन्न प्राथमिकताएँ: प्रत्येक क्वाड राष्ट्र के पास अद्वितीय भू-राजनीतिक और आर्थिक हित हैं, जिसके कारण व्यापार, सैन्य सहयोग या जलवायु परिवर्तन जैसे विशिष्ट मुद्दों को प्राथमिकता देने में मतभेद होते हैं।
  • चीन विरोधी गठबंधन की क्वाड धारणा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों के साथ संबंधों को जटिल बनाती है, जिनके चीन के साथ महत्त्वपूर्ण आर्थिक संबंध हैं।
  • क्वाड के पास औपचारिक संरचना या सचिवालय का अभाव है, जिससे दीर्घकालिक योजना बनाना और पहलों का कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
  • क्षेत्रीय गतिशीलता को नियंत्रित करना: आसियान देशों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि क्वाड, हिंद-प्रशांत सुरक्षा संरचना में उनकी केन्द्रीयता को प्रभावित कर रहा है।

आगे की राह

  • भारत द्वारा 2025 में क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के साथ, समूह की नवीनीकृत प्रतिबद्धता और पहल एक समावेशी, समृद्ध एवं स्थिर हिंद-प्रशांत के अपने दृष्टिकोण को दर्शाती है।
  • क्वाड के उद्देश्यों के बारे में अत्यधिक स्पष्ट संचार आवश्यक है ताकि इसकी चीन विरोधी धारणा से संबंधित चिंताओं को दूर किया जा सके और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक स्वीकृति सुनिश्चित की जा सके।
  • उभरती प्रौद्योगिकियों, बुनियादी ढाँचे और जलवायु प्रतिरोधकता में सहयोग को मजबूत करने से क्वाड के एजेंडे में विविधता लाने में सहायता मिल सकती है।

Source: TH

 

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