पाठ्यक्रम: GS2/शासन
चर्चा में
- कैबिनेट सचिवालय ने एक आईएएस अधिकारी के विरुद्ध दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा की गई शिकायतों पर कार्रवाई करने से मना कर दिया। इसके लिए निर्वाचन आयोग (ECI) की संवैधानिक स्वतंत्रता का उदाहरण दिया गया।
कैबिनेट सचिवालय क्या है?
- कैबिनेट सचिवालय वह कार्यालय है, जो केंद्रीय मंत्रिमंडल के कार्यों के सुचारु संचालन में सहायता करता है। यह आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करता है, कार्यसूची निर्धारित करता है, निर्णयों का अभिलेख रखता है तथा उनके क्रियान्वयन की अनुवर्ती निगरानी करता है।
- यह सीधे प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है। इसका प्रशासनिक प्रमुख कैबिनेट सचिव होता है।
- कैबिनेट सचिवालय का उल्लेख संविधान में नहीं किया गया है। यह भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम, 1961 के अंतर्गत कार्य करता है, जिसमें प्रथम अनुसूची में इसे सरकार के एक विभाग के रूप में शामिल किया गया है।
उत्पत्ति एवं विकास
- पोर्टफोलियो प्रणाली लागू होने से पहले, सरकार का कार्य संचालन गवर्नर-जनरल-इन-काउंसिल द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता था।
- स्वतंत्रता-पूर्व काल में इसका आधार भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 के पश्चात गवर्नर-जनरल की कार्यकारी परिषद से जुड़ी थीं। लॉर्ड विलिंगडन ने बैठकों में सचिवीय उपस्थिति को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया।
- सितंबर 1946 में अंतरिम सरकार के गठन के पश्चात सचिवालय का नाम बदलकर कैबिनेट सचिवालय कर दिया गया।
- स्वतंत्रता के पश्चात यह अंतर-मंत्रालयी सहयोग तथा सामूहिक निर्णय-निर्माण का एक महत्त्वपूर्ण मंच बन गया।
- स्वतंत्र भारत में वर्ष 1950 में इसे औपचारिक रूप से स्थापित किया गया। एन. आर. पिल्लै इसके प्रथम कैबिनेट सचिव बने।
- वर्ष 1965 में एक पृथक खुफिया शाखा जोड़ी गई। वर्ष 1968 में कैबिनेट सचिवालय के अंतर्गत अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग (R&AW) की स्थापना की गई।
संरचना
- कैबिनेट सचिवालय की तीन शाखाएँ हैं:
- नागरिक शाखा : यह मुख्य शाखा है। यह मंत्रिमंडल एवं उसकी समितियों को सहायता प्रदान करती है तथा कार्य-संचालन संबंधी नियमों का प्रबंधन करती है।
- सैन्य शाखा: यह रक्षा संबंधी मामलों में समन्वय स्थापित करने तथा रक्षा-संबंधी निकायों को सचिवीय सहायता प्रदान करने का कार्य करती है।
- खुफिया शाखा : यह संयुक्त खुफिया समिति (JIC) से संबंधित कार्य करती है। बाद में JIC की भूमिका को वर्ष 1999 में स्थापित राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ समाहित कर दिया गया।
कैबिनेट सचिवालय के कार्य
- मंत्रिमंडल को सचिवीय सहायता: प्रधानमंत्री के निर्देश पर बैठकों का आयोजन करना, कार्यसूची एवं संबंधित दस्तावेज़ तैयार करके वितरित करना, चर्चाओं का अभिलेख तैयार करना तथा प्रधानमंत्री की स्वीकृति के पश्चात कार्यवाही का विवरण प्रसारित करना। यह मंत्रिमंडल के दस्तावेज़ों का संरक्षक भी होता है।
- निगरानी: यह सुनिश्चित करना कि मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णयों का वास्तव में क्रियान्वयन हो रहा है या नहीं।
- कार्य-संचालन संबंधी नियमों का प्रशासन: यह सुनिश्चित करना कि मंत्रालय भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम तथा भारत सरकार (कार्य-संचालन) नियम का पालन करें।
- अंतर-मंत्रालयी समन्वय: विभिन्न मंत्रालयों के बीच मतभेदों का समाधान सचिवों की समितियों (CoS) के माध्यम से किया जाता है। इन समितियों की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करता है। इनके निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
- संकट प्रबंधन: बड़े संकटों के दौरान विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करना। कैबिनेट सचिव राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की अध्यक्षता करता है।
कैबिनेट सचिव
- कैबिनेट सचिव, कैबिनेट सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख होता है।
- वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का सबसे वरिष्ठ अधिकारी भी होता है तथा सेवा में रहते हुए किसी आईएएस अधिकारी द्वारा प्राप्त किया जा सकने वाला सर्वोच्च पद धारण करता है।
- उसे वरीयता क्रम में 11वाँ स्थान प्राप्त है और वह प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है।
- उसका कार्यकाल निर्धारित रूप से दो वर्ष का होता है। अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के अंतर्गत कार्यकाल में विस्तार की अनुमति है, जिससे कुल कार्यकाल चार वर्ष तक हो सकता है। वर्ष 2019 के संशोधन द्वारा जनहित में अतिरिक्त तीन महीने के विस्तार की संभावना भी जोड़ी गई।
- कैबिनेट सचिव राज्यों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन की अध्यक्षता भी करता है।
- वह सिविल सेवा बोर्ड का पदेन अध्यक्ष भी होता है।
- वह मंत्रिमंडल के महत्त्वपूर्ण निर्णयों की निगरानी करता है तथा प्रधानमंत्री के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रमुख विभागों, जिनमें प्रशासनिक सुधार एवं संसदीय कार्य शामिल हैं, के साथ प्रशासनिक समन्वय स्थापित करता है।
मुद्दे एवं आलोचनाएँ
- तटस्थता एवं कार्यकाल: नियमों में छूट देकर कैबिनेट सचिव के कार्यकाल में बार-बार विस्तार किए जाने से इस पद की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता को लेकर संदेह उत्पन्न हो सकते हैं।
- कार्यों का अतिव्यापन: कैबिनेट सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) प्रायः समान प्रकार के विषयों पर कार्य करते हैं, जिससे उत्तरदायित्वों का स्पष्ट निर्धारण कठिन हो सकता है।
- शक्ति का केंद्रीकरण: प्रधानमंत्री के निकट स्थित एक शक्तिशाली समन्वयकारी कार्यालय निर्णय लेने की प्रक्रिया को संबंधित मंत्रालयों से दूर अपने नियंत्रण में केंद्रित कर सकता है।
स्रोत: IE
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