ई.वी. रामासामी
पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास
संदर्भ
- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई में समाज सुधारक ई.वी. रामासामी की 147वीं जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
ई.वी. रामासामी (1879-1973) के बारे में
- ई.वी. रामासामी, जिन्हें लोकप्रिय रूप से “पेरियार” (महान व्यक्ति) के नाम से जाना जाता है, का जन्म 17 सितंबर, 1879 को तमिलनाडु के इरोड में हुआ था।
- वे एक भारतीय समाज सुधारक एवं राजनीतिज्ञ थे, जिन्होंने 1925 में आत्मसम्मान आंदोलन प्रारंभ किया। इसका उद्देश्य जातिगत पदानुक्रम को चुनौती देना तथा सामाजिक समानता, तर्कवाद एवं आत्मसम्मान को बढ़ावा देना था।
- पेरियार ने अपने गृह नगर इरोड में कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। हालाँकि, कांग्रेस द्वारा संचालित गुरुकुलम नामक विद्यालय में ब्राह्मण एवं गैर-ब्राह्मण छात्रों के लिए अलग-अलग भोजन व्यवस्था के प्रश्न पर उन्होंने 1925 में कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया।
- वैकॉम सत्याग्रह (1924–25) के दौरान पेरियार की ख्याति तमिल क्षेत्र से बाहर भी फैल गई। यह एक जन आंदोलन था, जिसका उद्देश्य निम्न जातियों के लोगों को प्रसिद्ध वैकॉम मंदिर के आसपास की सार्वजनिक सड़कों का उपयोग करने की अनुमति दिलाना था।
- 1940 के दशक में उन्होंने द्रविड़ नाडु नामक स्वतंत्र द्रविड़ मातृभूमि की परिकल्पना की और एक राजनीतिक दल द्रविड़र कड़गम (DK) की स्थापना की।
- पत्रिका: कुडी अरसु
क्या आप जानते हैं?
- 2021 में तत्कालीन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने घोषणा की कि पेरियार की जयंती, 17 सितंबर को प्रत्येक वर्ष “सामाजिक न्याय दिवस” के रूप में मनाया जाएगा।
स्रोत: AIR
इंडिया डीप टेक एलायंस
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- इंडिया डीप टेक एलायंस (IDTA) के सदस्यों ने विगत एक वर्ष में 56 भारतीय डीप-टेक कंपनियों में ₹2,170 करोड़ का निवेश किया है, जो रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में बढ़ते निजी निवेश का संकेत है।
इंडिया डीप टेक एलायंस
- इसे सितंबर 2025 में शुरू किया गया था और तब से इसने भारत के डीप-टेक उद्यमियों के लिए दीर्घकालिक पूँजी एवं पारिस्थितिकी तंत्र संबंधी सहायता पाने की दिशा में कार्य किया है।
- यह निवेशकों, कॉरपोरेट संस्थाओं, प्रौद्योगिकी भागीदारों एवं पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हितधारकों का उद्योग-नेतृत्व वाला संघ है।
- इसमें भारत एवं विदेशों के व्यक्तिगत तथा कॉरपोरेट निवेशक शामिल हैं।
- इसका ध्यान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालक, उन्नत संगणना, रोबोटिक्स, जैव-प्रौद्योगिकी तथा अन्य क्षेत्रों में भारत की डीप-टेक कंपनियों को तेजी से आगे बढ़ाने पर है।
- यह संस्थापकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकी कंपनियाँ भारत से विकसित करने में सहायता देने के लिए पूँजी तक पहुँच, तकनीकी मार्गदर्शन, बाजार संपर्क एवं नीतिगत सहभागिता को एक मंच पर लाता है।
स्रोत: TH
भारत द्वारा पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग खारिज
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत ने तथाकथित पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्र से संबंधित किसी भी व्यवस्था में शामिल होने का कोई वैध अधिकार नहीं है, क्योंकि वह क्षेत्र उसके अवैध एवं बलपूर्वक नियन्त्रण में है।
परिचय
- भारत ने कहा कि तथाकथित ‘चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता’, जिस पर 1963 में शिनजियांग और पाकिस्तान के नियन्त्रण वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के बीच सीमा निर्धारण के लिए हस्ताक्षर किए गए थे, “अवैध” और “अमान्य” है।
- पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग: इस आयोग की उत्पत्ति 2013 में इस्लामाबाद में तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग की यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित सीमा प्रबंधन प्रणाली संबंधी समझौते से हुई। इस समझौते में सीमा प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए संयुक्त आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया था।
पाकिस्तान और चीन के बीच सीमा समझौता
- ऐतिहासिक रूप से, जम्मू-कश्मीर की रियासत का गठन 1846 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह के बीच अमृतसर की संधि पर हस्ताक्षर के बाद हुआ था।
- इसमें गिलगित-बाल्टिस्तान, पाकिस्तान के नियन्त्रण वाला कश्मीर, जम्मू, लद्दाख, कश्मीर तथा ट्रांस-काराकोरम क्षेत्र शामिल थे।
- 1963 का समझौता ऐसे समय हुआ जब चीन और पाकिस्तान के बीच संबंध बेहतर हो रहे थे।
- इसी अवधि के आसपास पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी, जिसे ट्रांस-काराकोरम क्षेत्र भी कहा जाता है, चीन को सौंप दी थी।
- यह पाकिस्तान के नियन्त्रण वाले हुंजा-गिलगित क्षेत्र का हिस्सा है और सियाचिन हिमनद के उत्तर में स्थित है।
- 5,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले इस क्षेत्र की भौगोलिक एवं जलवायवीय परिस्थितियाँ मानव निवास के लिए अत्यंत कठिन हैं।
- भारत लगातार यह दृष्टिकोण अपनाता रहा है कि 1963 में शक्सगाम घाटी जैसे भारत के कुछ क्षेत्रों को पाकिस्तान द्वारा चीन को सौंपना अवैध एवं अस्वीकार्य था।
स्रोत: AIR
हिमालयी मोनाल
पाठ्यक्रम: GS3/समाचार में प्रजातियाँ
समाचार में
- हाल ही में पाया गया है कि हिमालयी मोनाल आसपास के शोर के स्तर के अनुसार अपनी ध्वनियों में परिवर्तन करता है।
हिमालयी मोनाल
- यह एक आकर्षक स्थलीय पक्षी है, जो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम सहित हिमालयी पर्वत श्रृंखला में पाया जाता है।
- यह उत्तराखंड का राज्य पक्षी है।
- इसे आईयूसीएन की लाल सूची में “कम चिंतनीय” श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
स्रोत :IE
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