पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- भारत का रचनात्मक उद्योग फिल्म, संगीत, गेमिंग, एनीमेशन, डिजाइन, प्रकाशन, विज्ञापन और डिजिटल सामग्री जैसे क्षेत्रों में तीव्रता से विस्तार कर रहा है। इसे संस्कृति, रचनात्मकता और बौद्धिक संपदा का आधार प्राप्त है।
रचनात्मक अर्थव्यवस्था
- रचनात्मक अर्थव्यवस्था में वे उद्योग शामिल हैं, जिनका मूल्य मुख्यतः रचनात्मकता, संस्कृति, प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा से प्राप्त होता है।
- इसमें मीडिया एवं मनोरंजन, एनीमेशन एवं दृश्य प्रभाव, गेमिंग, प्रत्यक्ष सांस्कृतिक अनुभव तथा डिजिटल सामग्री मंच शामिल हैं, जो बड़े पैमाने पर सीमाओं के पार कार्य करते हैं।
- ये केवल सांस्कृतिक गतिविधियाँ नहीं हैं, बल्कि प्रौद्योगिकी-प्रधान और वैश्विक स्तर पर व्यापार योग्य क्षेत्र हैं, जो आधुनिक सेवा अर्थव्यवस्थाओं तथा वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत हैं।
प्रमुख घटक
- AVGC-XR (एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग, कॉमिक्स एवं विस्तारित वास्तविकता) रचनात्मक अर्थव्यवस्था का प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्र है, जो कलात्मक कौशल को उच्च क्षमता वाली संगणना, वास्तविक समय प्रतिपादन और उभरती हुई तकनीकों के साथ जोड़ता है।
- भारत एक वैश्विक रूप से जुड़े AVGC-XR उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। यहाँ प्रतिभाओं का एक सुदृढ़ आधार है, जो फिल्मों, स्ट्रीमिंग, विज्ञापन और डिजिटल अनुभवों में योगदान देता है।
- गेमिंग एक बड़ा डिजिटल क्षेत्र बन गया है, जिसमें विशाल उपयोगकर्ता आधार, बढ़ता मुद्रीकरण, घरेलू स्टूडियो और अंतरराष्ट्रीय मंच मौजूद हैं।
- प्रत्यक्ष मनोरंजन क्षेत्र में भी तीव्रता से विस्तार हुआ है। संगीत कार्यक्रम और उत्सव पर्यटन, शहरी अर्थव्यवस्थाओं तथा रोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं और साथ ही तकनीशियनों, डिजाइनरों, रसद, आतिथ्य तथा स्थानीय व्यवसायों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी बनाए रखते हैं।
भारत की स्थिति
- रचनात्मक अर्थव्यवस्था वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 3.1% और वैश्विक रोजगार में 6.2% का योगदान देती है। अनुमानतः 5.7 करोड़ भारतीय पहले से ही सांस्कृतिक एवं रचनात्मक व्यवसायों में कार्यरत हैं।
- भारत की मीडिया एवं मनोरंजन अर्थव्यवस्था ₹2.5 लाख करोड़ की है।
विभिन्न पहल
- सरकार ने भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान तथा 15,000 विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में AVGC क्रिएटर लैब स्थापित करने के लिए सहायता की घोषणा की है, ताकि युवाओं को उभरते अवसरों के लिए तैयार किया जा सके।
- अकेले AVGC क्षेत्र को 2030 तक लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होने का अनुमान है।
- मीडिया नैतिकता संहिता: सरकार ने सुरक्षित, जवाबदेह और निष्पक्ष साइबर क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 अधिसूचित किए हैं।
- यह अधिनियम सामाजिक मीडिया मध्यस्थों के लिए पारदर्शिता, सामग्री के नियमन तथा शिकायत निवारण को अनिवार्य करता है।
- राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल विकास पहल: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गूगल और यूट्यूब के साथ साझेदारी में रचनात्मक एवं मीडिया क्षेत्रों के 15,000 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने के लिए राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल विकास पहल की घोषणा की है।
- इसे भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग, कॉमिक्स (AVGC) तथा मीडिया प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।
- इसका उद्देश्य भारत को डिजिटल सामग्री और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाना है।
- MyWaves – WAVES OTT के अंतर्गत नागरिक रचनाकार मंच: यह नागरिकों को सामग्री बनाने, अपलोड करने और साझा करने में सक्षम बनाने के साथ-साथ ‘क्रिएट इन इंडिया’ चैलेंज जैसी राष्ट्रीय पहलों में भाग लेने का अवसर प्रदान करता है।
- इस प्रकार यह मंच केवल सामग्री देखने से आगे बढ़कर सक्रिय सामग्री भागीदारी की ओर बदलाव को दर्शाता है।
महत्व
- आजीविका एवं रोजगार का सृजन: यह लाखों लोगों के लिए मानव-केंद्रित और श्रम-प्रधान रोजगार के अवसर सृजित करता है। इसमें पारंपरिक ग्रामीण हस्तशिल्प से लेकर किफायती पूँजी की आवश्यकता वाले शहरी डिजिटल उद्यमियों तक विभिन्न प्रकार के व्यवसाय शामिल हैं।
- सांस्कृतिक कूटनीति एवं सॉफ्ट पावर: फिल्म, संगीत और कला जैसे रचनात्मक उत्पादों के निर्यात के माध्यम से विदेशों में राष्ट्रीय पहचान को प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति तथा कूटनीतिक सद्भावना को बढ़ावा मिल सकता है।
- समावेशी एवं जमीनी स्तर का विकास: यह महिलाओं, युवाओं और स्वदेशी समुदायों को अपनी विशिष्ट क्षमताओं एवं डिजिटल सामग्री का मुद्रीकरण करने में सक्षम बनाकर संपदा के अवसरों का लोकतंत्रीकरण करता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को तत्काल लाभ मिलता है।
- आर्थिक प्रभाव: यह पर्यटन, खाद्य सेवाओं, खुदरा व्यापार और परिवहन सहित अन्य क्षेत्रों के लिए अप्रत्यक्ष आय एवं आर्थिक वृद्धि के अवसर सृजित करता है।
- नवाचार एवं प्रौद्योगिकी को अपनाना: कला और डिजाइन को प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उपयोगकर्ता अंतरफलक/उपयोगकर्ता अनुभव (UI/UX) डिजाइन, आभासी वास्तविकता और डिजिटल विपणन जैसे क्षेत्रों में रचनात्मकता को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
- बौद्धिक संपदा की कमजोर सुरक्षा एवं पायरेसी: डिजिटल पायरेसी, कॉपीराइट उल्लंघन और बिना अनुमति कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा सामग्री के संग्रहण के कारण लगातार राजस्व की हानि हो रही है। वर्तमान नियामक व्यवस्था नई प्रौद्योगिकी-आधारित वितरण प्रणालियों के विकास की गति से पीछे रह गई है।
- अनौपचारिक संरचना एवं वित्तीय अस्थिरता: अधिकांश निर्माता असंगठित अस्थायी रोजगार व्यवस्था में कार्य करते हैं, जहाँ आय अनिश्चित होती है, न्यूनतम वेतन की सुरक्षा उपलब्ध नहीं होती और सामाजिक सुरक्षा का अभाव रहता है।
- सीमित वित्तपोषण एवं मूल्यांकन संबंधी समस्याएँ: वित्तीय संस्थानों के लिए गैर-भौतिक बौद्धिक संपदा परिसंपत्तियों का मूल्य निर्धारित करना कठिन होता है। इसके कारण रचनाकारों के लिए संस्थागत ऋण और जोखिम पूँजी तक पहुँच बहुत सीमित हो जाती है।
- कौशल एवं उद्योग के बीच असंगति: व्यावसायिक रणनीतियाँ और नई प्रौद्योगिकियाँ, जैसे 3D प्रतिपादन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरण और आभासी उत्पादन, सामान्यतः शैक्षणिक एवं कला संस्थानों में पर्याप्त रूप से नहीं सिखाई जाती हैं।
- अवसंरचना एवं डिजिटल विभाजन: बड़े शहरी क्षेत्रों के बाहर के प्रतिभाशाली लोगों को सीमित डिजिटल संपर्क, विशिष्ट रचनात्मक केंद्रों की कमी और अपर्याप्त उत्पादन सुविधाओं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
- भारत की परिवर्तित रचनात्मक अर्थव्यवस्था डिजिटल नवाचार को पारंपरिक विरासत के साथ जोड़कर कलात्मक दृष्टि को एक सुव्यवस्थित वाणिज्यिक उद्यम में परिवर्तित कर रही है। इससे समावेशी घरेलू समृद्धि को बढ़ावा देने तथा वैश्विक स्तर पर भारत की सॉफ्ट पावर को सुदृढ़ करने, दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है।
- नीति और अवसंरचना के स्तर पर कक्षाओं, उत्पादन प्रयोगशालाओं तथा डिजिटल मंचों के बीच बढ़ता समन्वय स्थानीय रचनाकारों को पूँजी और वैश्विक बाजारों से जोड़ रहा है।
- रचनात्मक उद्योग रोजगार सृजन और सेवा निर्यात के प्रमुख माध्यमों के रूप में उभर रहे हैं।
- हालाँकि, इस गति को सतत आर्थिक शक्ति में बदलने के लिए देश को बौद्धिक संपदा की कमजोर सुरक्षा, अमूर्त परिसंपत्तियों के लिए सीमित वित्तपोषण, अनौपचारिक श्रम से जुड़े जोखिमों और बढ़ती प्रौद्योगिकी-कौशल की कमी जैसी महत्वपूर्ण संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना होगा।
स्रोत :PIB
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