पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- नेपाल के वित्त मंत्री ने भारत का दौरा किया तथा भारत के वित्त मंत्री और विदेश मंत्री के साथ बैठक की।
परिचय
- व्यापार, पारगमन एवं अनधिकृत व्यापार पर नियंत्रण हेतु सहयोग संबंधी अंतर-सरकारी उपसमिति की बैठक संपन्न हुई।
- इस बैठक में बाजार तक पहुँच, सीमा शुल्क एवं व्यापार सुविधा, मानक, खाद्य सुरक्षा, सीमा अवसंरचना, रेल एवं सड़क संपर्क तथा व्यापार से संबंधित अन्य विषयों पर चर्चा की गई।
- विदेश मंत्री के साथ हुई वार्ता के प्रमुख विषयों में नेपाल में बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण की योजनाएँ तथा नवनिर्वाचित सरकार के साथ भारत-नेपाल संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाना शामिल था।
भारत-नेपाल संबंधों का अवलोकन
- साझा सीमा: नेपाल की सीमा भारत के पाँच राज्यों—सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से लगती है।
- स्थलरुद्ध देश होने के कारण नेपाल वस्तुओं एवं सेवाओं के परिवहन के लिए भारत पर अत्यंत सीमा तक निर्भर है। समुद्र तक उसकी पहुँच भी भारत के माध्यम से होती है।
- भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि: भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि पर वर्ष 1950 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह संधि दोनों देशों के बीच विद्यमान विशेष संबंधों की आधारशिला है।
- संधि के प्रावधानों के अनुसार, नेपाली नागरिकों को भारत में भारतीय नागरिकों के समान सुविधाएँ एवं अवसर प्राप्त होते हैं।
- रक्षा सहयोग: भारत उपकरणों की आपूर्ति तथा प्रशिक्षण प्रदान करके नेपाली सेना के आधुनिकीकरण में सहायता करता रहा है।
- दोनों देश बारी-बारी से भारत और नेपाल में संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सूर्य किरण’ आयोजित करते हैं।
- वर्ष 1950 से दोनों देश एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को मानद जनरल की उपाधि प्रदान करते आ रहे हैं।
- भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंटों में आंशिक रूप से नेपाल के पहाड़ी जिलों से भर्ती किए गए सैनिक शामिल होते हैं।
- व्यापार एवं आर्थिक संबंध: वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत-नेपाल वस्तु व्यापार लगभग 9.38 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा। यह नेपाल के कुल बाह्य वस्तु व्यापार का 60 प्रतिशत से अधिक है।
- भारत नेपाल का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य भी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नेपाल के वस्तु निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक भारत को प्राप्त हुआ।
- भारत नेपाल में विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत भी है तथा नेपाल को प्राप्त कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भारत की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है।
- संपर्क एवं विकास साझेदारी: भारत स्वास्थ्य, शिक्षा और संपर्क जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नेपाल का सबसे बड़ा विकास सहयोगी है।
- प्रमुख परियोजनाओं में गौचर हवाई अड्डा, जिसे वर्तमान में त्रिभुवन हवाई अड्डे के नाम से जाना जाता है; पूर्व-पश्चिम राजमार्ग; सीमा-पार रेल संपर्क का विकास तथा एकीकृत जाँच चौकियों की स्थापना शामिल हैं।
- वर्ष 2006 से भारत ने नेपाल को लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सहायता प्रदान की है।
- ऊर्जा सहयोग: भारत और नेपाल के बीच सीमा क्षेत्र की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्ष 1971 से विद्युत विनिमय समझौता है।
- विद्युत क्षेत्र में सहयोग संबंधी संयुक्त दृष्टिकोण वक्तव्य, 2022 में नेपाल में संयुक्त रूप से विद्युत उत्पादन परियोजनाओं का विकास, सीमा-पार विद्युत पारेषण अवसंरचना का विकास तथा दोनों देशों के विद्युत ग्रिडों का समन्वित संचालन शामिल है।
- मानवीय सहायता एवं आपदा राहत: वर्ष 2015 में नेपाल में आए भूकंप के बाद भारत ने सबसे पहले सहायता पहुँचाई और विदेशों में अपने सबसे बड़े आपदा राहत अभियानों में से एक ‘ऑपरेशन मैत्री’ चलाया।
- अगस्त 2026 में नेपाल में आई विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ के बाद भारत ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान शुरू किया।
- यह पड़ोसी देशों में प्रथम प्रत्युत्तरदाता के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है तथा नेपाल के साथ मानवीय एवं जन-से-जन संबंधों को सुदृढ़ करता है।
- सांस्कृतिक संबंध: दोनों देशों के नेताओं ने प्रायः सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ संबंध का उल्लेख किया है। यह दोनों देशों के लोगों के बीच होने वाले सीमा-पार वैवाहिक संबंधों को संदर्भित करता है।
भारत एवं नेपाल के बीच चिंता के क्षेत्र
- 1950 की शांति एवं मैत्री संधि: 1950 की संधि दोनों देशों के बीच संबंधों को सुदृढ़ एवं विकसित करने तथा आपसी शांति बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी।
- समय के साथ नेपाल में यह धारणा बनी कि यह संधि असममित है और नेपाल के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है।
- भारत ने निरंतर कहा है कि वह संधि की “रचनात्मक एवं दूरदर्शी तरीके से” समीक्षा के लिए तैयार है।
- कालापानी विवाद: कालापानी क्षेत्र वर्तमान में भारत के नियंत्रण में है, जबकि नेपाल ऐतिहासिक आधारों पर इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है।
- यह क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच प्रमुख क्षेत्रीय विवाद का विषय है।
- दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी: काठमांडू में यह धारणा देखने को मिलती है कि भारत नेपाल की आंतरिक राजनीतिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करता है।
- दूसरी ओर, भारत नेपाल के बुनियादी ढाँचे, व्यापार और राजनीतिक निर्णयों में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित है।
- नेपाल में समय-समय पर ऐसे राजनीतिक आख्यान भी सामने आते रहे हैं, जिनमें भारत को प्रभुत्ववादी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: भारत और नेपाल के बीच साझा सुरक्षा चिंताएँ हैं, जिनमें सीमा-पार आतंकवाद, मानव तस्करी, अन्य प्रकार की तस्करी तथा सीमा सुरक्षा से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।
- असमान संबंध की धारणा: नेपाल के समाज के कुछ वर्गों ने भारत के साथ संबंधों को असमान मानते हुए चिंता व्यक्त की है।
- इन चिंताओं में आर्थिक निर्भरता तथा द्विपक्षीय संबंधों में पारस्परिकता की कमी से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।
आगे की राह
- इन चुनौतियों और विवादों के बावजूद भारत एवं नेपाल ने ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं तथा द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हैं।
- दोनों देश अपने संबंधों के महत्व को स्वीकार करते हैं और मतभेदों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक हितों को ध्यान में रखते हुए सहयोग एवं मैत्री को बढ़ावा देना इस संबंध का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 18-09-2026