भारत में अनुसंधान एवं विकास करने में सुगमता पर नीति आयोग की रिपोर्ट

पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन; जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सन्दर्भ

  • ‘भारत में अनुसंधान एवं विकास करने में सुगमता’ (Ease of Doing R&D in India) रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रमुख अनुसंधान वित्तपोषण संस्था अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के अंतर्गत लगभग 80% वित्तपोषण IITs में केंद्रित है।

भारत में अनुसंधान एवं विकास की स्थिति

  • अनुसंधान एवं विकास पर कम व्यय: भारत का अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय (GERD) कई वर्षों से GDP का लगभग 0.64% बना हुआ है। यह स्तर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है:
  • इज़राइल और दक्षिण कोरिया अपने GDP का 4% से अधिक R&D पर खर्च करते हैं।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन अपने GDP का 2% से अधिक R&D पर खर्च करते हैं।
  • रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद भारत का R&D व्यय स्थिर बना हुआ है।
  • R&D में सार्वजनिक क्षेत्र का प्रभुत्व: भारत का R&D वित्तपोषण सार्वजनिक वित्त पर अत्यधिक निर्भर है, जिसमें लगभग 64% योगदान सार्वजनिक क्षेत्र का है। इसके विपरीत, कई अग्रणी नवाचार अर्थव्यवस्थाओं में R&D बजट का 60% से अधिक योगदान निजी क्षेत्र द्वारा किया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख चुनौतियाँ

  • कम निवेश: अपर्याप्त निवेश वैज्ञानिक बुनियादी ढाँचे, उन्नत प्रौद्योगिकी के विकास, नवाचार क्षमता और भारत की वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता को सीमित करता है।
  • अत्यधिक प्रशासनिक एवं अनुपालन संबंधी बोझ: अत्यधिक नौकरशाही अनुसंधान के उत्पादक समय को कम करती है और वैज्ञानिक नवाचार को धीमा करती है।
  • कठोर खरीद एवं वित्तीय नियम: शोधकर्ताओं को विशेष उपकरणों की खरीद, धनराशि के पुनः आवंटन, परियोजना कर्मचारियों की नियुक्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।
  • खंडित शासन एवं समन्वय का अभाव: भारत का R&D पारिस्थितिकी तंत्र अनेक मंत्रालयों, विभागों और वित्तपोषण एजेंसियों में विभाजित है, जो स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं।
  • यह खंडित संरचना अनुसंधान प्रयासों के दोहराव, स्वीकृतियों में देरी तथा एकीकृत योजना और डेटा-साझाकरण प्रणालियों के अभाव को जन्म देती है।
  • उद्योग की कमजोर भागीदारी: भारत का R&D पारिस्थितिकी तंत्र सरकारी वित्तपोषण पर अत्यधिक निर्भर है, जबकि निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित बनी हुई है।
  • मानव संसाधन संबंधी चुनौतियाँ एवं प्रतिभा पलायन: बड़ी संख्या में STEM स्नातक तैयार करने के बावजूद भारत में कुशल शोधकर्ताओं, प्रयोगशाला तकनीशियनों और बहुविषयक विशेषज्ञों की कमी है।
  • रिपोर्ट सीमित करियर प्रगति, अपर्याप्त फेलोशिप तथा बेहतर अवसरों और बुनियादी ढाँचे के कारण प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं के विदेशों में पलायन जैसी समस्याओं को भी उजागर करती है।
  • अनुसंधान के व्यावसायीकरण की कमजोरी: यद्यपि भारत वैज्ञानिक प्रकाशनों और प्रयोगशाला स्तर के नवाचारों का उत्पादन करता है, लेकिन उन्हें पेटेंट, औद्योगिक प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप और बाजार के लिए तैयार उत्पादों में परिवर्तित करने की क्षमता सीमित बनी हुई है।

सिफारिशें

  • एकीकृत परियोजना प्रबंधन प्रणाली (UPMS): यह एक ऐसी प्रणाली है जिसका उद्देश्य मंत्रालयों और विभागों में सार्वजनिक R&D परियोजनाओं की योजना, वित्तपोषण, निगरानी और मूल्यांकन को सुव्यवस्थित करना है।
  • प्रशासनिक, वित्तीय एवं खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाना: यह शोधकर्ताओं पर अत्यधिक अनुपालन संबंधी बोझ को कम करने के लिए एकल-खिड़की डिजिटल प्रणालियों और सरल स्वीकृति प्रक्रियाओं को लागू करने की सिफारिश करती है।
  • इसमें अनुसंधान अनुदानों और परियोजना निधियों के उपयोग में अधिक लचीलापन प्रदान करने का भी आह्वान किया गया है।
  • उद्योग–शैक्षणिक सहयोग एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना: अनुसंधान पार्कों, नवाचार क्लस्टरों, सहयोगात्मक डॉक्टरेट कार्यक्रमों और उद्योग द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित परियोजनाओं के माध्यम से विश्वविद्यालयों, उद्योगों, स्टार्टअप और सरकारी प्रयोगशालाओं के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने की सिफारिश की गई है।
  • अनुसंधान करियर एवं मानव संसाधन प्रणालियों में सुधार: फेलोशिप, पारिश्रमिक संरचनाओं और दीर्घकालिक वित्तपोषण के अवसरों में सुधार करके शोधकर्ताओं के लिए आकर्षक एवं स्थिर करियर मार्ग बनाने की आवश्यकता है।
  • राष्ट्रीय पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अगले कुछ वर्षों तक S&T में पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप की संख्या में प्रतिवर्ष 20% वृद्धि की जानी चाहिए।
  • विज्ञान निधि की स्थापना: एक डिजिटल फेलोशिप मंच स्थापित किया जाना चाहिए, जो पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ताओं, मोबिलिटी अनुदानों और उद्योग से जुड़े अनुसंधान पदों के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण तथा संरचित सहायता प्रदान करे।
  • एकीकृत अनुसंधान शासन: दक्षता में सुधार के लिए एकीकृत डेटाबेस, एकीकृत निगरानी प्रणालियों और सुव्यवस्थित शासन ढाँचे के माध्यम से मंत्रालयों एवं वित्तपोषण एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान किया गया है।

सरकारी पहल

  • अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) योजना: ₹1 लाख करोड़ के कोष के साथ स्वीकृत इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र के R&D और डीप-टेक स्टार्टअप को गति प्रदान करना है।
    • यह दीर्घकालिक, कम या शून्य-ब्याज वाले ऋण, इक्विटी निवेश प्रदान करती है और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से एक नए डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स को वित्तपोषित करती है।
  • अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF): 2023 में स्थापित ANRF विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए उच्च-स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करता है।
    • फाउंडेशन का उद्देश्य 2023–28 के दौरान ₹50,000 करोड़ की धनराशि जुटाना है, जिसमें ANRF फंड, इनोवेशन फंड, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान फंड और विशेष प्रयोजन फंड सहित विभिन्न माध्यम शामिल हैं।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: यह 2020 में शुरू किए गए अंतरिक्ष सुधारों पर आधारित है, जिन्होंने गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में शुरू से अंत तक भागीदारी का मार्ग खोला।
    • इसका उद्देश्य अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाना, एक सुदृढ़ वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ावा देना तथा सार्वजनिक एवं निजी संस्थाओं के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: 2023–31 के लिए ₹6,003.65 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक एवं औद्योगिक R&D के माध्यम से क्वांटम प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाना है।
  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): 2015 में शुरू की गई यह पहल राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क के माध्यम से जुड़े अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम के साथ विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को सक्षम बनाती है।
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): 2021 में स्थापित इस मिशन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
    • भारत ने पहले ही छह राज्यों में 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें ओडिशा में पहली वाणिज्यिक सिलिकॉन कार्बाइड फैब्रिकेशन सुविधा भी शामिल है।
  • इंडिया AI मिशन: इंडियाAI मिशन “भारत में AI बनाना और AI को भारत के लिए उपयोगी बनाना” के दृष्टिकोण को साकार करता है।
    • यह तेजी से प्रगति कर रहा है और प्रारंभिक 10,000 GPU के लक्ष्य से कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाकर 38,000 GPU कर चुका है, जिससे स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और उद्योगों के लिए सुलभ AI बुनियादी ढाँचा सुनिश्चित हो रहा है।
  • अटल इनोवेशन मिशन (AIM): छात्रों, स्टार्टअप और उद्यमियों को सहायता प्रदान करके जमीनी स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देना।

स्रोत: TH

 

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