व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा चिकित्सा उपकरण नियमों में बदलाव का प्रस्ताव

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ स्वास्थ्य/ शासन

सन्दर्भ

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है।

प्रस्तावित प्रमुख संशोधन

1. आउटसोर्स की गई नसबंदी प्रक्रिया का सरलीकरण(नियम 44 में संशोधन)

  • जो निर्माता नसबंदी का कार्य ऐसी बाहरी सुविधा से करवाते हैं, जिसके पास चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 के तहत वैध लाइसेंस है, उन्हें अब नसबंदी गतिविधि के लिए अलग से ऋण लाइसेंस (Loan Licence) लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • अनुरेखणीयता (Traceability) बनी रहेगी: निर्माताओं को चिकित्सा उपकरण के लेबल पर उस नसबंदी सुविधा का लाइसेंस नंबर अंकित करना होगा।
  • कंपनियों को लेबल, पैकेजिंग और संबंधित प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव करने के लिए 6 महीने की संक्रमण अवधि प्रदान की गई है।

2. परीक्षण शुल्क का मानकीकरण

  • चिकित्सा उपकरण परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) में एक समान शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
  • इससे परीक्षण शुल्क में होने वाली असमानता और अनिश्चितता कम होगी।

3. यूरोपीय संघ को मान्यता(नियम 63 में संशोधन)

  • यूरोपीय संघ (EU) को उन मान्यता प्राप्त कठोर नियामक अधिकार क्षेत्रों (Stringent Regulatory Jurisdictions) की सूची में शामिल किया जाएगा, जिनके आधार पर भारत में कुछ ऐसे चिकित्सा उपकरणों के लिए नैदानिक ​​जाँच की आवश्यकता से छूट दी जा सकती है, जिनके समान कोई पूर्व-स्वीकृत उपकरण उपलब्ध नहीं है।
  • वर्तमान सूची में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान शामिल हैं।
  • यूरोपीय संघ में स्वीकृत ऐसे चिकित्सा उपकरण, जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, भारत में भी नैदानिक जाँच से छूट संबंधी प्रावधानों का लाभ उठा सकेंगे।

महत्व

  • अनावश्यक लाइसेंस और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को कम करता है।
  • पात्र और नवीन चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को तेज करने में सहायता करेगा।
  • मानकीकृत परीक्षण शुल्क से अनुपालन की लागत अधिक पूर्वानुमेय होगी।
  • भारत के नियामक ढाँचे को वैश्विक प्रथाओं के अधिक अनुरूप बनाने में मदद करेगा।
  • सरल और अधिक पूर्वानुमेय नियामक वातावरण भारत के चिकित्सा उपकरण उद्योग में निवेश और नवाचार को बढ़ावा दे सकता है।

भारत में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र

चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के उत्पाद शामिल हैं, जैसे:

  • नैदानिक उपकरण
  • एमआरआई और सीटी स्कैनर जैसे इमेजिंग उपकरण
  • प्रत्यारोपण उपकरण
  • शल्य चिकित्सा उपकरण
  • रोगी निगरानी उपकरण
  • इन-विट्रो नैदानिक (IVD) उपकरण
  • भारत का चिकित्सा उपकरण बाजार 2025 में 15.2 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2030 तक 50.1 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
  • अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच चिकित्सा और शल्य चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह 4.24 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

सरकारी पहल

  • राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, बुनियादी ढाँचे के विकास, अनुसंधान एवं विकास तथा निवेश को बढ़ावा देने के माध्यम से भारत के चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को समर्थन प्रदान करती है। इससे क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात को बढ़ावा मिलता है।
  • भारत में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति है। उपकरण एवं यंत्र, उपभोग्य वस्तुएँ तथा प्रत्यारोपण उपकरण जैसी श्रेणियों में सबसे अधिक FDI आकर्षित होता है।
  • चिकित्सा उपकरण पार्कों को बढ़ावा देने की योजना का उद्देश्य सामान्य बुनियादी ढाँचे और परीक्षण सुविधाओं का निर्माण करना है। इससे संसाधनों के अनुकूलन के माध्यम से चिकित्सा उपकरण इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिलेगी।

इस योजना के तहत तीन पार्कों को मंजूरी दी गई है और ये उन्नत विकास चरण में हैं:

  • ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश
  • उज्जैन, मध्य प्रदेश
  • कांचीपुरम, तमिलनाडु
  • नियामक ढाँचा: औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 चिकित्सा उपकरणों के आयात, विनिर्माण, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करते हैं।
  • वर्ष 2026 में भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India–EU FTA) ने 572.3 अरब अमेरिकी डॉलर के यूरोपीय संघ के फार्मास्यूटिकल और चिकित्सा प्रौद्योगिकी (MedTech) बाजार तक पहुँच का मार्ग खोला। इससे शुल्कों में उदारीकरण और तरजीही बाजार पहुँच के माध्यम से भारतीय चिकित्सा उपकरणों के लिए निर्यात के अवसरों में वृद्धि हुई।

भारत में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के समक्ष चुनौतियाँ

  • भारत अभी भी अपने लगभग 70–80% चिकित्सा उपकरणों का आयात करता है, विशेष रूप से उच्च-स्तरीय और तकनीकी रूप से उन्नत उपकरणों का।
  • महत्वपूर्ण घटकों और कच्चे माल के घरेलू विनिर्माण की क्षमता सीमित है।
  • अनुसंधान एवं विकास (R&D) और नैदानिक जाँच की उच्च लागत नवाचार को हतोत्साहित कर सकती है।
  • कुछ क्षेत्रों में परीक्षण और विनिर्माण संबंधी बुनियादी ढाँचा अपर्याप्त है।
  • विशेषज्ञता प्राप्त और उद्योग के लिए तैयार कुशल मानव संसाधन की कमी है।
  • भारतीय निर्माताओं का वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में एकीकरण सीमित है।

आगे की राह

  • भारत को घरेलू विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार तथा चिकित्सा उपकरणों से संबंधित बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देकर चिकित्सा उपकरणों के लिए अपनी आयात निर्भरता कम करनी चाहिए।
  • गुणवत्ता, सुरक्षा और अनुरेखणीयता सुनिश्चित करते हुए एक पूर्वानुमेय और सरल नियामक ढाँचा निवेश को आकर्षित कर सकता है तथा भारत को वैश्विक चिकित्सा उपकरण विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकता है।

स्रोत: TH

 

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