संक्षिप्त समाचार 15-06-2026

शुआनज़ांग के अभिलेखों के लिए भारत-चीन द्वारा संयुक्त यूनेस्को नामांकन की पहल

पाठ्यक्रम: GS1 / इतिहास एवं संस्कृति

संदर्भ 

  • भारत और चीन, शुआनज़ांग की प्रसिद्ध कृति ‘द ग्रेट तांग रिकॉर्ड्स ऑन द वेस्टर्न रीजन’ को यूनेस्को के समक्ष संयुक्त रूप से नामांकित करने संबंधी उन्नत स्तर की वार्ताओं में संलग्न हैं।

शुआनज़ांग के बारे में

  • शुआनज़ांग (ह्वेनसांग) 7वीं शताब्दी ईस्वी के एक प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु, विद्वान एवं यात्री थे।
  • उन्होंने भारत में लगभग 19 वर्षों तक यात्रा की तथा बौद्ध दर्शन का अध्ययन किया।
  • उन्होंने प्राचीन Nalanda University में शिक्षा प्राप्त की।
  • उनकी कृति ‘द ग्रेट तांग रिकॉर्ड्स ऑन द वेस्टर्न रीजन’ प्रारंभिक मध्यकालीन भारत के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।
  • कृति में वर्णित प्रमुख विषय: सम्राट हर्षवर्धन तथा अन्य शासकों के अधीन राजनीतिक परिस्थितियाँ।
  • प्रारंभिक मध्यकालीन भारत का सामाजिक एवं आर्थिक जीवन।
  • धार्मिक परंपराएँ एवं बौद्ध संस्थान।
  • प्रारंभिक मध्यकालीन भारत की आर्थिक एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ।

विचाराधीन अन्य संयुक्त नामांकन

  • ईरान के साथ पंचतंत्र: भारत, ईरान के साथ पंचतंत्र के संयुक्त यूनेस्को नामांकन की संभावनाओं का अन्वेषण कर रहा है।
    • पंचतंत्र ने सदियों से फ़ारसी साहित्य एवं लोककथाओं को प्रभावित किया है।
    • यह दोनों देशों की साझा साहित्यिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
  • दक्षिण अफ्रीका के साथ सत्याग्रह: यह प्रस्ताव महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलन और दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों को प्रतिबिंबित करता है।
    • साझा सभ्यतागत परंपराएँ
    • भारत एवं इंडोनेशिया के बीच साझा रामायण परंपराएँ।
    • भारत एवं चीन के मध्य साझा बौद्ध ग्रंथ एवं सांस्कृतिक विरासत।

स्रोत: IE

आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल (AM) कवक

पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ 

  • पत्रिका साइंस में प्रकाशित एक नवीन अध्ययन में पृथ्वी के विशाल भूमिगत आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल (AM) कवक नेटवर्क का पहला वैश्विक मानचित्र प्रस्तुत किया गया है।

परिचय 

  • ये कवक लाखों वर्षों से पौधों के जीवन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं, किंतु अब तक इनके विस्तार एवं वितरण की व्यापक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
  • ये लगभग 70% पादप प्रजातियों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं, जिसमें वे पोषक तत्वों के बदले कार्बन प्राप्त करते हैं।
  • AM कवक नेटवर्क प्रतिवर्ष अनुमानतः 4 अरब टन CO₂-समतुल्य कार्बन का अवशोषण करते हैं।
  • दक्षिण सूडान के घासस्थल, तिब्बती पठार तथा भारत के बन्नी घास के मैदान जैसे पारितंत्र विश्व के लगभग 40% AM कवक नेटवर्क को आश्रय प्रदान करते हैं।
  • वर्तमान में घासस्थलीय पारितंत्रों का कृषि भूमि में रूपांतरण वनों की तुलना में चार गुना अधिक तीव्र गति से हो रहा है, जिससे ये पारितंत्र गंभीर खतरे में हैं।
  • यह अध्ययन पर्यावरणीय नीतियों में कवकों को हाशिये से निकालकर जलवायु कार्रवाई के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

AM कवक

  • AM कवक ऐसे मृदा कवक हैं, जो लगभग 70% स्थलीय पादप प्रजातियों की जड़ों के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं।
  • ये मुख्यतः ग्लोमेरोमाइकोटा संघ (Phylum) से संबंधित होते हैं।
  • ये जड़ कोशिकाओं के अंदर आर्बस्कुल नामक विशेष संरचनाएँ बनाते हैं, जो पोषक तत्वों के आदान-प्रदान में सहायक होती हैं।
  • प्रमुख कार्य: फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, जस्ता एवं तांबा जैसे आवश्यक पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाना।
    • मृदा से जल ग्रहण क्षमता में वृद्धि करना।
    • पौधों की वृद्धि एवं उत्पादकता को प्रोत्साहित करना।
  • पौधों को लाभ: पौधों को पोषक तत्व एवं जल उपलब्ध कराते हैं।
  • कवकों को लाभ: पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण से निर्मित कार्बोहाइड्रेट एवं लिपिड प्राप्त होते हैं।

कवक

  • कवक यूकैरियोटिक जीव हैं, जिनमें यीस्ट, फफूँद तथा मशरूम शामिल हैं और ये कवक जगत से संबंधित होते हैं।
  • इनमें क्लोरोफिल का अभाव होता है, इसलिए ये प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते।
  • ये अपने आसपास उपस्थित कार्बनिक पदार्थों का अवशोषण कर पोषण प्राप्त करते हैं।
  • कवक बीजाणुओं के माध्यम से प्रजनन करते हैं।
  • ये एककोशिकीय (जैसे—यीस्ट) अथवा बहुकोशिकीय (जैसे—मशरूम) हो सकते हैं।
  • पारिस्थितिक महत्त्व: कवक प्रमुख अपघटक  के रूप में कार्य करते हैं।
    • ये मृत पौधों एवं जीवों के अपघटन द्वारा पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं।
    • पारिस्थितिक तंत्रों में पोषक चक्र को बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

स्रोत: (TH)

क्वीन अनानास (Queen Pineapple)

पाठ्यक्रम: GS3 / कृषि

संदर्भ

  • दिल्ली में आयोजित होने वाले अनानास महोत्सव से पूर्व, त्रिपुरा अपने क्वीन अनानास को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयासरत है।

परिचय 

  • क्वीन अनानास को वर्ष 2018 में त्रिपुरा का राजकीय फल घोषित किया गया था।
  • इससे चार वर्ष पूर्व, वर्ष 2014 में इसे इसके सुनहरे-पीले रंग तथा विशिष्ट सुगंध के कारण भौगोलिक संकेतक प्राप्त हुआ था।
  • खेती : इसकी खेती के लिए सामान्यतः 30–40% ढाल वाले क्षेत्र का चयन किया जाता है।
    • पौधों के लिए बलुई मिट्टी तथा जलभराव रोकने हेतु उचित जल निकासी आवश्यक होती है।
    • 18°C से 32°C का तापमान इसकी खेती के लिए सर्वाधिक अनुकूल माना जाता है।
    • त्रिपुरा की विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ इसे भारत के प्रमुख अनानास उत्पादक क्षेत्रों में शामिल करती हैं।
    • यहाँ मुख्य रूप से क्वीन एवं क्यू (Kew) किस्मों की खेती की जाती है, जिसे अधिकांशतः जनजातीय कृषकों द्वारा उगाया जाता है।
  • मिशन क्वीन अनानास: यह वर्ष 2026 में प्रारंभ किया गया तीन वर्षीय केंद्रीय वित्तपोषित “फार्म-टू-प्लेट” कार्यक्रम है।
    • इसकी कुल लागत 236 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
  • उत्पादन में भारत की स्थिति: वैश्विक अनानास उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 6–8% है।
    • भारत में पश्चिम बंगाल एवं असम अनानास उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य हैं।

क्या आप जानते हैं?

  • अनानास की खेती का उद्गम दक्षिण अमेरिका में हुआ था और बाद में यह विश्व के अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैल गई।
  • भारत में अनानास की खेती का परिचय पुर्तगालियों द्वारा वर्ष 1548 ईस्वी में कराया गया था।
  • कोस्टा रिका वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा अनानास उत्पादक एवं निर्यातक देश है।

स्रोत: (IE)

आर्मी यूनिफॉर्म्स–2026 मैनुअल

पाठ्यक्रम: GS3 / रक्षा

संदर्भ 

  • विश्व की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना, भारतीय सेना ने “आर्मी यूनिफॉर्म्स–2026 मैनुअल” जारी किया है।

परिचय 

  • यह नया मैनुअल वर्ष 2015 के वर्दी विनियमों का स्थान लेगा।
  • यह सैन्य परिधान के आधुनिकीकरण के साथ-साथ परिचालन प्रभावशीलता एवं रेजिमेंटीय परंपराओं के संरक्षण के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • प्रमुख परिवर्तन 
    • पारंपरिक बंदी (नेहरू) जैकेट का समावेश: औपचारिक सैन्य वेशभूषा में पारंपरिक बंदी (नेहरू) जैकेट को शामिल किया गया है।
    • औपनिवेशिक शब्दावली का निष्कासन: “रॉयल” जैसे औपनिवेशिक काल से जुड़े शब्दों को हटाया गया है।
    • तलवार धारण करने के नियम में परिवर्तन: समीक्षा अधिकारी द्वारा तलवार धारण करना अब अनिवार्य न होकर वैकल्पिक होगा।
  • यह कदम भारत में औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति एवं स्वदेशीकरण की व्यापक प्रक्रिया को प्रतिबिंबित करता है।
  • इसी प्रवृत्ति के अंतर्गत औपनिवेशिक युग के आपराधिक कानूनों के स्थान पर निम्नलिखित नए विधिक ढाँचे लागू किए गए हैं—
    • भारतीय न्याय संहिता
    • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
    • भारतीय साक्षात् अधिनियमम्
  • आर्मी यूनिफॉर्म्स–2026 मैनुअल भारतीय सेना की परंपराओं को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय पहचान, सांस्कृतिक आत्मविश्वास एवं स्वदेशी मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

स्रोत: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध संदर्भ  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। यह दोनों नेताओं के बीच इस वर्ष भारत-फ्रांस संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किए जाने के बाद प्रथम बैठक थी। प्रमुख बिंदु  प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में द्विपक्षीय...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीयसंबंध, GS3/सुरक्षा संदर्भ हाल ही में भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के समक्ष गंभीर आपत्ति दर्ज कराई, जब फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक हमलों के परिणामस्वरूप वाणिज्यिक जहाजों पर कार्यरत तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई। वैश्विक नौवहन में भारतीय नाविक भारत का वैश्विक समुद्री कार्यबल: भारत विश्व में समुद्री मानव संसाधन...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ अर्थव्यवस्था संदर्भ भारत, जिसकी लगभग 65% जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है, अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग करते हुए विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में अग्रसर है। युवा-नेतृत्वित विकास पर बल राष्ट्रीय युवा नीति (NYP), 2014 ने देश में युवा विकास के लिए...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अंतरिक्ष क्षेत्र संदर्भ  भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जिसका वर्तमान मूल्य लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर है तथा जो वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में 2–3% का योगदान करती है, आगामी दशक में पाँच गुना बढ़कर 40–45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। साथ ही, वर्ष 2030 तक इसकी वैश्विक हिस्सेदारी को 8% तक बढ़ाने...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/ ऊर्जा संदर्भ केंद्र सरकार ने उच्च एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (22%–30% एथेनॉल) को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट प्रदान की है तथा केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अंतर्गत E85 और E100 ईंधनों को मान्यता देने हेतु संशोधनों का प्रस्ताव किया है। एथेनॉल क्या है? एथेनॉल 99.9% शुद्ध अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल के साथ मिश्रित किया...
Read More
scroll to top