शुआनज़ांग के अभिलेखों के लिए भारत-चीन द्वारा संयुक्त यूनेस्को नामांकन की पहल
पाठ्यक्रम: GS1 / इतिहास एवं संस्कृति
संदर्भ
- भारत और चीन, शुआनज़ांग की प्रसिद्ध कृति ‘द ग्रेट तांग रिकॉर्ड्स ऑन द वेस्टर्न रीजन’ को यूनेस्को के समक्ष संयुक्त रूप से नामांकित करने संबंधी उन्नत स्तर की वार्ताओं में संलग्न हैं।
शुआनज़ांग के बारे में
- शुआनज़ांग (ह्वेनसांग) 7वीं शताब्दी ईस्वी के एक प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु, विद्वान एवं यात्री थे।
- उन्होंने भारत में लगभग 19 वर्षों तक यात्रा की तथा बौद्ध दर्शन का अध्ययन किया।
- उन्होंने प्राचीन Nalanda University में शिक्षा प्राप्त की।
- उनकी कृति ‘द ग्रेट तांग रिकॉर्ड्स ऑन द वेस्टर्न रीजन’ प्रारंभिक मध्यकालीन भारत के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।
- कृति में वर्णित प्रमुख विषय: सम्राट हर्षवर्धन तथा अन्य शासकों के अधीन राजनीतिक परिस्थितियाँ।
- प्रारंभिक मध्यकालीन भारत का सामाजिक एवं आर्थिक जीवन।
- धार्मिक परंपराएँ एवं बौद्ध संस्थान।
- प्रारंभिक मध्यकालीन भारत की आर्थिक एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ।
विचाराधीन अन्य संयुक्त नामांकन
- ईरान के साथ पंचतंत्र: भारत, ईरान के साथ पंचतंत्र के संयुक्त यूनेस्को नामांकन की संभावनाओं का अन्वेषण कर रहा है।
- पंचतंत्र ने सदियों से फ़ारसी साहित्य एवं लोककथाओं को प्रभावित किया है।
- यह दोनों देशों की साझा साहित्यिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
- दक्षिण अफ्रीका के साथ सत्याग्रह: यह प्रस्ताव महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलन और दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों को प्रतिबिंबित करता है।
- साझा सभ्यतागत परंपराएँ
- भारत एवं इंडोनेशिया के बीच साझा रामायण परंपराएँ।
- भारत एवं चीन के मध्य साझा बौद्ध ग्रंथ एवं सांस्कृतिक विरासत।
स्रोत: IE
आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल (AM) कवक
पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- पत्रिका साइंस में प्रकाशित एक नवीन अध्ययन में पृथ्वी के विशाल भूमिगत आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल (AM) कवक नेटवर्क का पहला वैश्विक मानचित्र प्रस्तुत किया गया है।
परिचय
- ये कवक लाखों वर्षों से पौधों के जीवन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं, किंतु अब तक इनके विस्तार एवं वितरण की व्यापक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
- ये लगभग 70% पादप प्रजातियों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं, जिसमें वे पोषक तत्वों के बदले कार्बन प्राप्त करते हैं।
- AM कवक नेटवर्क प्रतिवर्ष अनुमानतः 4 अरब टन CO₂-समतुल्य कार्बन का अवशोषण करते हैं।
- दक्षिण सूडान के घासस्थल, तिब्बती पठार तथा भारत के बन्नी घास के मैदान जैसे पारितंत्र विश्व के लगभग 40% AM कवक नेटवर्क को आश्रय प्रदान करते हैं।
- वर्तमान में घासस्थलीय पारितंत्रों का कृषि भूमि में रूपांतरण वनों की तुलना में चार गुना अधिक तीव्र गति से हो रहा है, जिससे ये पारितंत्र गंभीर खतरे में हैं।
- यह अध्ययन पर्यावरणीय नीतियों में कवकों को हाशिये से निकालकर जलवायु कार्रवाई के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
AM कवक
- AM कवक ऐसे मृदा कवक हैं, जो लगभग 70% स्थलीय पादप प्रजातियों की जड़ों के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं।
- ये मुख्यतः ग्लोमेरोमाइकोटा संघ (Phylum) से संबंधित होते हैं।
- ये जड़ कोशिकाओं के अंदर आर्बस्कुल नामक विशेष संरचनाएँ बनाते हैं, जो पोषक तत्वों के आदान-प्रदान में सहायक होती हैं।
- प्रमुख कार्य: फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, जस्ता एवं तांबा जैसे आवश्यक पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाना।
- मृदा से जल ग्रहण क्षमता में वृद्धि करना।
- पौधों की वृद्धि एवं उत्पादकता को प्रोत्साहित करना।
- पौधों को लाभ: पौधों को पोषक तत्व एवं जल उपलब्ध कराते हैं।
- कवकों को लाभ: पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण से निर्मित कार्बोहाइड्रेट एवं लिपिड प्राप्त होते हैं।
कवक
- कवक यूकैरियोटिक जीव हैं, जिनमें यीस्ट, फफूँद तथा मशरूम शामिल हैं और ये कवक जगत से संबंधित होते हैं।
- इनमें क्लोरोफिल का अभाव होता है, इसलिए ये प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते।
- ये अपने आसपास उपस्थित कार्बनिक पदार्थों का अवशोषण कर पोषण प्राप्त करते हैं।
- कवक बीजाणुओं के माध्यम से प्रजनन करते हैं।
- ये एककोशिकीय (जैसे—यीस्ट) अथवा बहुकोशिकीय (जैसे—मशरूम) हो सकते हैं।
- पारिस्थितिक महत्त्व: कवक प्रमुख अपघटक के रूप में कार्य करते हैं।
- ये मृत पौधों एवं जीवों के अपघटन द्वारा पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं।
- पारिस्थितिक तंत्रों में पोषक चक्र को बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
स्रोत: (TH)
क्वीन अनानास (Queen Pineapple)
पाठ्यक्रम: GS3 / कृषि
संदर्भ
- दिल्ली में आयोजित होने वाले अनानास महोत्सव से पूर्व, त्रिपुरा अपने क्वीन अनानास को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयासरत है।
परिचय
- क्वीन अनानास को वर्ष 2018 में त्रिपुरा का राजकीय फल घोषित किया गया था।
- इससे चार वर्ष पूर्व, वर्ष 2014 में इसे इसके सुनहरे-पीले रंग तथा विशिष्ट सुगंध के कारण भौगोलिक संकेतक प्राप्त हुआ था।
- खेती : इसकी खेती के लिए सामान्यतः 30–40% ढाल वाले क्षेत्र का चयन किया जाता है।
- पौधों के लिए बलुई मिट्टी तथा जलभराव रोकने हेतु उचित जल निकासी आवश्यक होती है।
- 18°C से 32°C का तापमान इसकी खेती के लिए सर्वाधिक अनुकूल माना जाता है।
- त्रिपुरा की विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ इसे भारत के प्रमुख अनानास उत्पादक क्षेत्रों में शामिल करती हैं।
- यहाँ मुख्य रूप से क्वीन एवं क्यू (Kew) किस्मों की खेती की जाती है, जिसे अधिकांशतः जनजातीय कृषकों द्वारा उगाया जाता है।
- मिशन क्वीन अनानास: यह वर्ष 2026 में प्रारंभ किया गया तीन वर्षीय केंद्रीय वित्तपोषित “फार्म-टू-प्लेट” कार्यक्रम है।
- इसकी कुल लागत 236 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
- उत्पादन में भारत की स्थिति: वैश्विक अनानास उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 6–8% है।
- भारत में पश्चिम बंगाल एवं असम अनानास उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य हैं।
क्या आप जानते हैं?
- अनानास की खेती का उद्गम दक्षिण अमेरिका में हुआ था और बाद में यह विश्व के अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैल गई।
- भारत में अनानास की खेती का परिचय पुर्तगालियों द्वारा वर्ष 1548 ईस्वी में कराया गया था।
- कोस्टा रिका वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा अनानास उत्पादक एवं निर्यातक देश है।
स्रोत: (IE)
आर्मी यूनिफॉर्म्स–2026 मैनुअल
पाठ्यक्रम: GS3 / रक्षा
संदर्भ
- विश्व की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना, भारतीय सेना ने “आर्मी यूनिफॉर्म्स–2026 मैनुअल” जारी किया है।
परिचय
- यह नया मैनुअल वर्ष 2015 के वर्दी विनियमों का स्थान लेगा।
- यह सैन्य परिधान के आधुनिकीकरण के साथ-साथ परिचालन प्रभावशीलता एवं रेजिमेंटीय परंपराओं के संरक्षण के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- प्रमुख परिवर्तन
- पारंपरिक बंदी (नेहरू) जैकेट का समावेश: औपचारिक सैन्य वेशभूषा में पारंपरिक बंदी (नेहरू) जैकेट को शामिल किया गया है।
- औपनिवेशिक शब्दावली का निष्कासन: “रॉयल” जैसे औपनिवेशिक काल से जुड़े शब्दों को हटाया गया है।
- तलवार धारण करने के नियम में परिवर्तन: समीक्षा अधिकारी द्वारा तलवार धारण करना अब अनिवार्य न होकर वैकल्पिक होगा।
- यह कदम भारत में औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति एवं स्वदेशीकरण की व्यापक प्रक्रिया को प्रतिबिंबित करता है।
- इसी प्रवृत्ति के अंतर्गत औपनिवेशिक युग के आपराधिक कानूनों के स्थान पर निम्नलिखित नए विधिक ढाँचे लागू किए गए हैं—
- भारतीय न्याय संहिता
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
- भारतीय साक्षात् अधिनियमम्
- आर्मी यूनिफॉर्म्स–2026 मैनुअल भारतीय सेना की परंपराओं को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय पहचान, सांस्कृतिक आत्मविश्वास एवं स्वदेशी मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

स्रोत: TH
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