पाठ्यक्रम: GS3/जैव विविधता और संरक्षण
संदर्भ
- राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र (NCSCM) ने महाराष्ट्र की 23,415 आर्द्रभूमियों का प्रलेखन और स्थल-यथार्थापन पूर्ण किया है।
आर्द्रभूमि क्या है?
- आर्द्रभूमि वह पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें भूमि जल से ढकी रहती है — चाहे वह लवणीय हो, स्वच्छ हो या दोनों के बीच का — और यह मौसमी अथवा स्थायी रूप से हो सकता है।
- यह अपना विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र होता है।
- इसमें झीलें, नदियाँ, भूमिगत जलभृत, दलदल, आर्द्र घासभूमि, पीटलैंड, डेल्टा, ज्वारीय मैदान, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ और अन्य तटीय क्षेत्र शामिल होते हैं।
- आर्द्रभूमियों को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है: अंतर्देशीय आर्द्रभूमि, तटीय आर्द्रभूमि और मानव-निर्मित आर्द्रभूमि।
भारत में आर्द्रभूमियाँ
- भारत में हिमालय की उच्च-ऊँचाई वाली आर्द्रभूमियाँ, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों की बाढ़भूमियाँ, तटीय क्षेत्र में लैगून और मैंग्रोव दलदल, तथा समुद्री पर्यावरण में प्रवाल भित्तियाँ शामिल हैं।
- भारत की लगभग 4.6% भूमि आर्द्रभूमि है।
- भारत की 99 आर्द्रभूमियाँ अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची (रामसर स्थल) में शामिल हैं।
- भारत एशिया में सबसे बड़ा रामसर स्थल नेटवर्क और विश्व में संख्या के आधार पर तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क रखता है।
- 2026 में तमिलनाडु भारत में सर्वाधिक 20 रामसर स्थलों वाला राज्य है।
आर्द्रभूमियों का महत्व
- जैव विविधता केंद्र: आर्द्रभूमियाँ पृथ्वी पर सबसे अधिक जैव विविध पारिस्थितिकी तंत्रों में से हैं, जो अनेक प्रकार की वनस्पतियों और जीवों का समर्थन करती हैं।
- जल शोधन और परिशोधन: ये प्राकृतिक फिल्टर की तरह कार्य करती हैं, प्रदूषकों और तलछट को जल से हटाती हैं।
- बाढ़ नियंत्रण और जल विनियमन: भारी वर्षा या तूफान के दौरान अतिरिक्त जल को अवशोषित और धीमा कर प्राकृतिक बफर का कार्य करती हैं।
- कार्बन अवशोषण: आर्द्रभूमियों की जलसिक्त परिस्थितियाँ कार्बनिक पदार्थों के विघटन को धीमा करती हैं, जिससे मृदा में कार्बन का संचय होता है।
- आर्थिक लाभ: आर्द्रभूमियाँ मत्स्य पालन, कृषि और पर्यटन जैसी विभिन्न आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करती हैं।
रामसर अभिसमय
- यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य विश्वभर में आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना है।
- इसे 1971 में ईरान के रामसर में अपनाया गया और 1975 में लागू किया गया।
- संधि के पक्षकार देशों को अपने क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों को नामित करना होता है, जिन्हें रामसर स्थल कहा जाता है।
- मानदंड:
- यदि यह संकटग्रस्त, विलुप्तप्राय या गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों अथवा पारिस्थितिक समुदायों का समर्थन करती है।
- यदि यह नियमित रूप से 20,000 या अधिक जलपक्षियों का समर्थन करती है।
- यदि यह मछलियों के लिए भोजन का महत्वपूर्ण स्रोत, प्रजनन स्थल और नर्सरी है।
- भारत 1982 से इस अभिसमय का पक्षकार है।
Source: TH
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