पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत और इटली ने अपने संबंधों को विशेष सामरिक साझेदारी में उन्नत किया।
प्रमुख बिंदु
- दोनों पक्षों ने 10 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, समुद्री परिवहन और समुद्री उत्पादों में साझेदारी को बढ़ावा देने के समझौते शामिल हैं।
- भारत और इटली ने रक्षा औद्योगिक रोडमैप जारी किया, जिसमें सैन्य उपकरणों और प्लेटफार्मों का सह-विकास एवं सह-उत्पादन शामिल है, जैसे हेलीकॉप्टर और समुद्री शस्त्र।
- दोनों ने भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEEC) पर सहयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की ।
- दोनों देशों ने वार्षिक व्यापार को 2029 तक 20 अरब यूरो तक बढ़ाने का संकल्प लिया, जो वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार €14 अरब (15.2 अरब डॉलर) है।
भारत-इटली द्विपक्षीय संबंधों पर संक्षेप
- इटली के साथ राजनयिक संबंध 1947 में स्थापित हुए और 2023 में इन्हें सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया, जब दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाई।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र: 2021 में ‘भारत-इटली-जापान’ त्रिपक्षीय पहल शुरू की गई, जिसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता, समृद्धि और बहुपक्षवाद को बढ़ावा देना है।
- यह यूरोपीय देश के साथ भारत की दूसरी त्रिपक्षीय पहल है, ‘भारत-फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया’ त्रिपक्षीय के बाद।
- संयुक्त कार्य योजना: प्रधानमंत्री और उनके इतालवी समकक्ष ने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त सामरिक कार्य योजना 2025-29 का अनावरण किया।
- यह पांच वर्षीय योजना रक्षा, अर्थव्यवस्था, संपर्क, विज्ञान एवं नवाचार, प्रवासन एवं गतिशीलता, अंतरिक्ष और ऊर्जा संक्रमण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की दृष्टि प्रस्तुत करती है।
- वैश्विक मंच: इटली ने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान शुरू की गई महत्वपूर्ण पहलों — ‘ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस’ और ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ — में भाग लिया।
- इटली 2021 में ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ (ISA) से भी जुड़ा, जब वह G20 की अध्यक्षता और COP26 की सह-अध्यक्षता कर रहा था।
- आर्थिक संबंध: इटली, यूरोपीय संघ में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2025 में द्विपक्षीय व्यापार €14.25 अरब तक पहुंचा, जिसमें भारत का निर्यात €8.55 अरब रहा और भारत के पक्ष में €2.85 अरब का संतुलन रहा।
- यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता दोनों दिशाओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देता है।
- भारतीय प्रवासी समुदाय: इटली में भारतीय नागरिक यूरोपीय संघ में सबसे बड़ा भारतीय समुदाय हैं।
- वे इटली में सातवां सबसे बड़ा विदेशी समुदाय हैं, जो वहां के विदेशी नागरिकों का 3.25% हिस्सा हैं।
- 2023 में ‘प्रवासन और गतिशीलता समझौता’ (MMA) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे श्रमिकों का सुरक्षित और कानूनी प्रवासन संभव हुआ।
- भविष्य की दृष्टि: बीते घटना दोनों पक्षों की नए सिरे से रुचि को दर्शाते हैं। भारत और इटली क्रमशः हिंद महासागर और भूमध्यसागर में अपनी सामरिक स्थिति का लाभ उठाकर संपर्क, स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा एवं नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा दे सकते हैं।
भारत के लिए इटली का महत्व
- सामरिक और राजनीतिक महत्व: इटली यूरोपीय संघ, G7 और NATO का महत्वपूर्ण सदस्य है, जिससे भारत को यूरोप और व्यापक पश्चिमी जगत से जुड़ने में सहयोग मिलता है।
- व्यापार और आर्थिक महत्व: इटली यूरोप में भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। इतालवी कंपनियां उन्नत विनिर्माण, लक्ज़री वस्त्र, फैशन, डिज़ाइन और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के लिए प्रसिद्ध हैं, जो भारत की औद्योगिक वृद्धि को पूरक बनाती हैं।
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग: इटली नौसैनिक प्रणालियों, एयरोस्पेस तकनीक, रक्षा निर्माण और जहाज निर्माण में विशेषज्ञता रखता है। रक्षा सहयोग भारत की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ कर सकता है।
- नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु सहयोग: इटली स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और जलवायु कार्रवाई में महत्वपूर्ण भागीदार है।
- दोनों देश सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, सतत गतिशीलता और जलवायु-प्रतिरोधी तकनीकों में सहयोग करते हैं।
- समुद्री और संपर्क महत्व: भूमध्य सागर में इटली का सामरिक स्थान भारत के लिए यूरोप और उत्तरी अफ्रीका तक व्यापारिक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष
- इटली भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सामरिक यूरोपीय साझेदार है, जिसकी तकनीक, विनिर्माण, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक कूटनीति में विशेष ताकतें हैं। भारत-इटली सहयोग को सुदृढ़ करने से भारत को आर्थिक साझेदारियों का विविधीकरण, तकनीकी उन्नति, समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ करने और यूरोप के साथ गहन जुड़ाव में सहायता मिलेगी।
Source: TH