पाठ्यक्रम: GS2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत–श्रीलंका बिज़नेस फ़ोरम, जिसे भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने सीलोन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के साथ साझेदारी में मुंबई में आयोजित किया, ने छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- बंदरगाह: भारत और श्रीलंका व्यापार और क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने हेतु बंदरगाह अवसंरचना एवं समुद्री संपर्क में सहयोग की संभावनाएँ तलाश रहे हैं।
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स: शिपिंग मार्गों, रेल संपर्क, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं में सुधार कर लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना।
- औषधि उद्योग: श्रीलंका ने वर्तमान मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ढाँचे के अंतर्गत भारत से किफायती जेनेरिक दवाइयाँ आयात करने में रुचि दिखाई है।
- डिजिटल भुगतान: श्रीलंका भारत के साथ UPI जैसी सीमा-पार डिजिटल भुगतान प्रणालियों की संभावनाओं का अन्वेषण कर रहा है।
- यात्रा और पर्यटन: बेहतर वीज़ा सुविधाओं और यात्रा सर्किटों के माध्यम से पर्यटन और यात्रा संपर्क का विस्तार।
- भारत–श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की समीक्षा: दोनों देश FTA को अद्यतन करने पर विचार कर रहे हैं ताकि इसमें औषधि कच्चा माल, लॉजिस्टिक्स उपकरण और व्यापार सुविधा उपाय शामिल किए जा सकें।
द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग की चुनौतियाँ
- व्यापार असंतुलन: श्रीलंका को भारत के साथ व्यापार घाटे को लेकर चिंता है।
- नियामक अवरोध: सीमा शुल्क मंजूरी और नियामक अनुमोदनों में विलंब व्यापार दक्षता को प्रभावित करता है।
- अवसंरचना सीमाएँ: सीमित लॉजिस्टिक्स और परिवहन अवसंरचना व्यापार लागत बढ़ा सकती है।
- आर्थिक अस्थिरता: श्रीलंका के हालिया आर्थिक संकट ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है।
- भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा: बाहरी शक्तियाँ बंदरगाह और अवसंरचना जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
भारत के लिए श्रीलंका का महत्व
- रणनीतिक स्थिति: श्रीलंका हिंद महासागर में संचार की महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों (SLOCs) के निकट स्थित है, जिनसे होकर भारत की 60% से अधिक ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण व्यापार गुजरता है।
- समुद्री सुरक्षा: भारत की SAGAR पहल के अंतर्गत क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने और चीन की नौसैनिक उपस्थिति का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण।
भारत–श्रीलंका संबंध
- व्यापारिक संबंध: 2000 में भारत–श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता (ISFTA) ने दोनों देशों के बीच व्यापार विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- भारत परंपरागत रूप से श्रीलंका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में रहा है और श्रीलंका SAARC में भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है।
- भारत श्रीलंका में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है।
- सांस्कृतिक संबंध: 1977 में हस्ताक्षरित सांस्कृतिक सहयोग समझौता दोनों देशों के बीच समय-समय पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों का आधार है।
- बौद्ध और तमिल संबंध जन-से-जन संपर्क और सॉफ्ट पावर को बढ़ाते हैं।
- पर्यटन: भारत परंपरागत रूप से श्रीलंका का शीर्ष आगंतुक पर्यटन बाज़ार रहा है, जिसके बाद चीन का स्थान है।
- श्रीलंका पर्यटन विकास प्राधिकरण के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत श्रीलंका के लिए पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत रहा।
- समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग: 2011 में कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
- भारत और श्रीलंका संयुक्त सैन्य अभ्यास मित्र शक्ति, त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास दोस्ती और नौसैनिक अभ्यास SLINEX आयोजित करते हैं।
- बहुपक्षीय मंच सहयोग: भारत और श्रीलंका दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC), दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम, दक्षिण एशियाई आर्थिक संघ और BIMSTEC के सदस्य राष्ट्र हैं, जो सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए कार्यरत हैं।
स्रोत: TH
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