पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास
समाचारों में
- हाल ही में एक पंजाबी गायक ने 1914 में कनाडा द्वारा भारतीयों को अस्वीकार किए जाने वाली कोमागाटा मारू घटना की तुलना अपने सोल्ड आउट संगीत कार्यक्रम से की, ताकि यह दिखाया जा सके कि समय के साथ दृष्टिकोण किस प्रकार बदल गए हैं।
कोमागाटा मारू घटना
- कोमागाटा मारू (जिसे गुरु नानक जहाज़ भी कहा जाता है) एक जापानी भाप-जहाज़ था जिसे 1914 में गुरदित सिंह ने चार्टर किया था। इसमें 376 भारतीय यात्री कनाडा में बेहतर अवसरों की खोज में जा रहे थे।
- बीसवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में पंजाब ग्रामीण ऋणग्रस्तता, अकाल और महामारियों का सामना कर रहा था, जिसके कारण अनेक पूर्व सैनिक और किसान जीविका हेतु विदेश प्रवास करने लगे।
- अधिकांश यात्री सिख थे, साथ ही मुस्लिम और हिंदू भी थे, जिन्हें कनाडा के कठोर आव्रजन कानूनों का सामना करना पड़ा।
- वैंकूवर पहुँचने पर केवल 24 यात्रियों को उतरने की अनुमति दी गई, शेष को जहाज़ पर ही अपर्याप्त भोजन, पानी और चिकित्सीय सहायता के साथ रोक दिया गया।
- प्रशासन द्वारा जहाज़ को जब्त करने के प्रयासों का विरोध किया गया, और स्थानीय समर्थन समूह ने कानूनी चुनौती हेतु धन एकत्र किया, किंतु अंततः जहाज़ को वापस लौटने के लिए विवश किया गया।
यात्रियों को प्रवेश से वंचित करने के कारण
- भारत और कनाडा दोनों ब्रिटिश शासन के अधीन थे, अतः भारतीय यात्रियों को विश्वास था कि उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य के किसी भी भाग में बसने का अधिकार है।
- किन्तु 1908 में कनाडा ने “निरंतर यात्रा नियम” लागू किया, जिसके अनुसार प्रवासियों को अपने मूल देश से बिना किसी ठहराव के सीधे पहुँचना आवश्यक था—जो भारत से व्यावहारिक रूप से असंभव था।
- यह नियम 1907 के वैंकूवर दंगों (एशियाटिक एक्सक्लूज़न लीग द्वारा प्रेरित) के बाद एशियाई प्रवास को सीमित करने हेतु बनाया गया था, जिसका विशेष लक्ष्य भारतीयों सहित एशियाई समुदाय था।
भारत में वापसी
- वैंकूवर से निष्कासित किए जाने और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अन्य बंदरगाहों पर प्रवेश से वंचित होने के बाद जहाज़ को भारत वापस भेज दिया गया।
- कोलकाता के निकट बालीगंज (बज-बज) में ब्रिटिश अधिकारियों ने यात्रियों को पंजाब भेजने का प्रयास किया, किंतु उन्होंने विरोध किया और शहर की ओर कूच किया। सैनिकों ने गोलीबारी की, जिसमें 20 लोग मारे गए और कई घायल हुए। गुरदित सिंह प्रारंभ में बच निकले, परंतु बाद में महात्मा गांधी की सलाह पर आत्मसमर्पण किया और पाँच वर्ष के लिए कारावास में रहे।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर प्रभाव
- कोमागाटा मारू घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य के अंदर भारतीयों के द्वारा समाना किए जा रहे नस्लीय भेदभाव को उजागर किया—पहले कनाडा में और बाद में भारत में।
- यात्रियों के साथ हुई अपमानजनक घटनाओं और हिंसा ने यह विश्वास दृढ़ किया कि औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत भारतीयों को समान अधिकार नहीं मिल सकते। इससे सुधारों की बजाय पूर्ण स्वतंत्रता की माँग को बल मिला।
- इस घटना ने ग़दर पार्टी जैसे क्रांतिकारी समूहों को भी प्रेरित किया और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष की धारणा को प्रोत्साहित किया।
स्रोत :TH
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संक्षिप्त समाचार 30-04-2026
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