संक्षिप्त समाचार 13-03-2026

दांडी मार्च

पाठ्यक्रम: GS1 / आधुनिक भारत का इतिहास

संदर्भ

  • भारत के उपराष्ट्रपति ने हाल ही में महात्मा गांधी और दांडी मार्च (1930) में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

दांडी मार्च के बारे में

  • ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने नमक के उत्पादन और बिक्री पर एकाधिकार स्थापित कर दिया था तथा नमक कर लगाया था, जिससे यह बुनियादी आवश्यकता भी भारतीयों के लिए महँगी हो गई।
  • 1930 में गांधीजी ने घोषणा की कि वे नमक कानून तोड़ने के लिए मार्च का नेतृत्व करेंगे, क्योंकि नमक पर कर लगाना पाप है, यह भोजन की आवश्यक वस्तु है।
  • गांधीजी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से नमक सत्याग्रह मार्च प्रारंभ किया और 24 दिनों बाद 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचे।
    • उन्होंने समुद्र तट से प्राकृतिक नमक उठाकर और समुद्र के जल को उबालकर नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा।
  • नमक सत्याग्रह नागरिक अवज्ञा आंदोलन का प्रारंभिक बिंदु बना।
  • दांडी मार्च ने विभिन्न क्षेत्रों में समान आंदोलनों को प्रेरित किया, जैसे—तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी के नेतृत्व में और केरल में के. केलप्पन (जिन्हें ‘केरल गांधी’ कहा जाता है) द्वारा।
  • गांधीजी की गिरफ्तारी के बाद, सरोजिनी नायडू ने 21 मई 1930 को धारासना साल्ट वर्क्स पर अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया।

स्रोत: AIR

ईरान की करुन नदी में बुल शार्क

पाठ्यक्रम: GS1 / भूगोल

संदर्भ

  • हाल ही में असामान्य वन्यजीव आवासों पर हुई चर्चाओं ने ईरान की करुन नदी (अहवाज़ शहर के निकट) में बुल शार्क की उपस्थिति को उजागर किया है।

करुन नदी के बारे में

  • करुन नदी ईरान की सबसे बड़ी और एकमात्र नौगम्य नदी है। इसका उद्गम ज़ाग्रोस पर्वतों में होता है।
  • यह दक्षिण-पश्चिमी ईरान से होकर प्रवाहित होती है और अंततः शत्त-अल-अरब से मिलती है, जो टिगरिस एवं यूफ्रेटीस नदियों के संगम से बनती है।
  • शत्त-अल-अरब फारस की खाड़ी में गिरती है।

बुल शार्क (कार्चारहिनस ल्यूकास)

  • जैविक विशेषताएँ: बुल शार्क उन कुछ शार्क प्रजातियों में से हैं जो लवणीय और स्वच्छ दोनों जल में जीवित रह सकती हैं।
    • इनके पास विशेष ओस्मोरेगुलेशन तंत्र होता है, जिससे वे अपने शरीर में नमक की सांद्रता को नियंत्रित कर पाती हैं।
    • यह अनुकूलन उन्हें नदी प्रणालियों के माध्यम से दूर अंदर तक यात्रा करने में सक्षम बनाता है।
  • वैश्विक वितरण: बुल शार्क विश्व की कई नदियों में पाई गई हैं, जैसे—मिसिसिपी नदी (USA), अमेज़न नदी, ज़ाम्बेज़ी नदी और गंगा नदी।
  • संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट में इसे सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है।

स्रोत: DTE

स्पेशल 301 रिपोर्ट

पाठ्यक्रम: GS2 / अंतर्राष्ट्रीय संबंध

समाचार में

  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूरोपीय संघ, चीन और भारत सहित 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की विनिर्माण एवं व्यापार नीतियों पर धारा 301 जाँच शुरू की है।

परिचय

  • धारा 301 अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 का एक प्रावधान है, जो अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) को विदेशी व्यापार प्रथाओं की जाँच करने का अधिकार देता है।
  • इसका उपयोग तब किया जाता है जब अमेरिका को लगता है कि किसी अन्य देश की नीतियाँ अनुचित, भेदभावपूर्ण या अमेरिकी व्यापार को प्रतिबंधित करती हैं।
  • जाँच के बाद अमेरिकी सरकार प्रतिशोधात्मक व्यापारिक कदम उठा सकती है, जैसे—टैरिफ लगाना, व्यापार प्रतिबंध और बाज़ार पहुँच सीमित करना।
  • रिपोर्ट देशों को IPR (बौद्धिक संपदा अधिकार) चिंताओं की गंभीरता के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में रखती है:
    • प्राथमिक विदेशी देश (Priority Foreign Country) – सबसे गंभीर श्रेणी।
    • प्राथमिक निगरानी सूची (Priority Watch List) – गंभीर IPR सुरक्षा कमियाँ।
    • निगरानी सूची (Watch List) – मध्यम स्तर की IPR समस्याएँ।

भारत का दृष्टिकोण

  • भारत का तर्क है कि उसका IPR ढाँचा WTO–TRIPS समझौते के अनुरूप है।
  • भारत नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं व सस्ती दवाओं के बीच संतुलन पर बल देता है।

स्रोत: IE

 भारत द्वारा ईरान हमलों की निंदा करने वाले UNSC प्रस्ताव का सह-प्रायोजन 

पाठ्यक्रम: GS2 / अंतर्राष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया, जिसमें ईरान द्वारा खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों और जॉर्डन पर किए गए हमलों की निंदा की गई।

परिचय

  • भारत सहित 134 देशों ने ईरान द्वारा किए गए सभी हमलों को “तुरंत रोकने” की माँग की। इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन शामिल हैं।
    • प्रस्ताव को UNSC के 13 सदस्यों ने समर्थन दिया, जबकि रूस और चीन ने मतदान से परहेज़ किया।
  • प्रस्ताव ने ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतर्राष्ट्रीय नौवहन को बाधित करने वाले किसी भी कदम या धमकी की निंदा की।
    • इसमें पुनः पुष्टि की गई कि व्यापारी और वाणिज्यिक जहाज़ों द्वारा नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रताओं का प्रयोग अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार सम्मानित किया जाना चाहिए।

भारत का दृष्टिकोण

  • GCC देशों में भारत का बड़ा प्रवासी समुदाय है, जिनकी सुरक्षा और कल्याण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • खाड़ी क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अहम है, क्योंकि भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 50% कच्चा तेल और 90% एलपीजी आयात इसी क्षेत्र से होता है।

स्रोत: TH

पर्पल आलू (Purple Potatoes)

पाठ्यक्रम: GS3 / कृषि

संदर्भ

  • पंजाब के एक युवा किसान ने बोलिविया से आयातित बीज कंदों का उपयोग कर पर्पल आलू की खेती कर ध्यान आकर्षित किया है।

पर्पल आलू के बारे में

  • मूल रूप से दक्षिण अमेरिका के एंडीज़ क्षेत्र, विशेषकर पेरू और बोलिविया में उगाए जाते हैं।
  • ये प्राकृतिक रूप से रंगीन आलू की किस्में हैं, जिनकी त्वचा और गूदा गहरे बैंगनी रंग का होता है।
  • उच्च मात्रा में एंथोसाइनिन्स (प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट) होने के कारण इनका रंग बैंगनी होता है।
  • मोटी छिलके के कारण इनकी शेल्फ लाइफ सामान्य आलू से अधिक होती है।
  • फसल अवधि लगभग 90–100 दिन होती है, जिसकी बुवाई सामान्यतः अक्टूबर–नवंबर में की जाती है।
  • यह विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं तथा मधुमेह या जोड़ों के दर्द जैसी स्थितियों को नियंत्रित करने में लाभकारी माने जाते हैं।

क्या आप जानते हैं?

  • भारत ने अपनी स्वयं की पर्पल आलू किस्म कुफ़री जमुनिया विकसित की है, जिसे 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया।

आलू की खेती

  • भारत आलू का उत्पादन और उपभोग करने वाला विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है (चीन के बाद)। 2020 में उत्पादन 51.30 मिलियन टन रहा।
  • भारत में उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल अग्रणी उत्पादक राज्य हैं, इसके बाद बिहार का स्थान है।
  • आलू ठंडे मौसम की फसल है और अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मृदा में सबसे उपयुक्त होता है।

स्रोत: TH

असम का GI-टैग प्राप्त जोहा चावल

पाठ्यक्रम: GS3 / अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • भारत ने असम के GI-टैग प्राप्त जोहा चावल के 25 मीट्रिक टन का निर्यात यूनाइटेड किंगडम और इटली को किया है।

परिचय

  • यह सुगंधित स्वदेशी चावल की किस्म है, जिसे 2017 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ।
  • अपनी विशिष्ट सुगंध, महीन दानेदार बनावट और समृद्ध स्वाद के कारण यह प्रीमियम वैश्विक बाज़ारों में पहचान बना रहा है।
  • जोहा चावल लगभग 21,662 हेक्टेयर में उगाया जाता है, जिसकी उत्पादन क्षमता FY 2024-25 में लगभग 43,298 मीट्रिक टन रही।
  • प्रमुख उत्पादन जिलों में नागांव, बक्सा, गोलपाड़ा, शिवसागर, माजुली, चिरांग और गोलाघाट शामिल हैं।
  • यह बेहतर उत्पादन आधार निर्यात हेतु अधिशेष बनाने और किसानों की आय बढ़ाने का अच्छा अवसर प्रदान करता है।

स्रोत: AIR

पेप्टाइड थेरेपी

पाठ्यक्रम: GS2 / स्वास्थ्य; GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

समाचार में

  • बीमारियों के उपचार और स्वास्थ्य सुधार हेतु पेप्टाइड-आधारित उपचारों में बढ़ती वैश्विक रुचि ने चिकित्सा अवसरों के साथ-साथ सुरक्षा चिंताओं को भी उत्पन्न किया है। विशेषज्ञों ने इसके लिए सख़्त विनियमन और सावधानीपूर्वक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया है।

पेप्टाइड क्या हैं?

  • पेप्टाइड्स अमीनो अम्लों की बहुत छोटी श्रृंखलाएँ होती हैं, जो शरीर में प्रोटीन के मूलभूत निर्माण खंड हैं।
  • ये स्वाभाविक रूप से संदेशवाहक के रूप में कार्य करते हैं और हार्मोन स्राव, चयापचय, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तथा ऊतक मरम्मत जैसी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।

पेप्टाइड थेरेपी

  • इसमें कृत्रिम या प्राकृतिक रूप से प्राप्त पेप्टाइड्स का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है, जो शरीर के प्राकृतिक संकेतक अणुओं की नकल करते हैं।
  • पेप्टाइड्स कोशिकाओं पर विशिष्ट रिसेप्टर्स से “ताले-चाबी” जैसी प्रणाली में जुड़ते हैं।

प्रमुख अनुप्रयोग

  • चिकित्सकीय रूप से पेप्टाइड दवाएँ जैविक मार्गों को लक्षित करने वाले संकेतों की नकल करती हैं, जिससे वे अधिक सटीक और पारंपरिक दवाओं की तुलना में बेहतर सहनीय होती हैं।
  • इनका उपयोग चयापचय रोग, कैंसर विज्ञान, अंतःस्राविकी, पुनर्योजी चिकित्सा, त्वचाविज्ञान और हृदय स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में होता है।
  • अधिकांश पेप्टाइड दवाएँ इंजेक्शन द्वारा दी जाती हैं ताकि पाचन तंत्र में टूटने से बचा जा सके।

स्रोत: TH

ऑपरेशन व्हाइट हैमर

पाठ्यक्रम: GS3 / आंतरिक सुरक्षा

संदर्भ

  • राजस्व खुफ़िया निदेशालय (DRI) ने हाल ही में आंध्र प्रदेश में एक अवैध अल्प्राज़ोलम निर्माण इकाई पर छापा मारा। यह कार्रवाई “ऑपरेशन व्हाइट हैमर” का हिस्सा थी।

परिचय 

  • छापे में एक गुप्त औद्योगिक इकाई का पता चला, जो अल्प्राज़ोलम का उत्पादन कर रही थी। यह एक मनोदैहिक पदार्थ है, जिसे नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज़ अधिनियम, 1985 के अंतर्गत विनियमित किया जाता है।
  • अल्प्राज़ोलम एक बेंज़ोडायज़ेपीन दवा है, जिसका उपयोग चिंता विकारों के उपचार में किया जाता है। इसे सामान्यतः  Xanax जैसे ब्रांड नामों से बेचा जाता है।
  • भारत विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, जिससे कभी-कभी औषधीय रसायनों का अवैध मादक पदार्थ व्यापार में दुरुपयोग होता है।

भारत में कानूनी ढाँचा

  • नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज़ अधिनियम, 1985: मादक और मनोदैहिक पदार्थों के उत्पादन, स्वामित्व, बिक्री, परिवहन और उपभोग को नियंत्रित करता है।
  • औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940: भारत में औषधियों के निर्माण, गुणवत्ता और बिक्री को विनियमित करता है।

राजस्व खुफ़िया निदेशालय

  • परिचय: यह भारत की प्रमुख विरोधी-तस्करी खुफ़िया एजेंसी है और वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्य करती है।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।

स्रोत: TH

ऑपरेशन सागर बंधु

पाठ्यक्रम: GS2 / अंतर्राष्ट्रीय संबंध; GS3 / रक्षा

संदर्भ

  • भारतीय सेना ने श्रीलंका में ऑपरेशन सागर बंधु के तहत एक प्रमुख पुल परियोजना शुरू की है।

परिचय 

  • यह पुल कोलंबो (राजधानी) को पुत्तलम (प्रमुख आर्थिक केंद्र) से जोड़ेगा। यह पुल चिलाव ज़िले से होकर गुजरने वाले महत्वपूर्ण तटीय गलियारे पर स्थित है।
  • परियोजना श्रीलंका की अवसंरचना पुनर्प्राप्ति और संपर्कता को समर्थन देने हेतु भारत की इंजीनियरिंग सहायता को दर्शाती है।
  • यह भारत की पड़ोसी प्रथम नीति (Neighbourhood First Policy) और व्यापक क्षेत्रीय सहयोग पहलों के अनुरूप है।

पृष्ठभूमि

  • भारत ने नवंबर 2025 में ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया था, जब चक्रवात दितवाह ने श्रीलंका को प्रभावित किया।
  • इस ऑपरेशन का उद्देश्य श्रीलंका को मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रदान करना था।

स्रोत: AIR

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs)

पाठ्यक्रम: GS3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के अंतर्गत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) के अनुसंधान, डिज़ाइन, विकास और परिनियोजन हेतु ₹20,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) क्या हैं?

  • SMRs उन्नत परमाणु रिएक्टर हैं जिनकी प्रति इकाई क्षमता 300 मेगावाट (MW(e)) तक होती है, जो पारंपरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता का लगभग एक-तिहाई है।
    • Small (लघु/स्मॉल) – आकार में पारंपरिक परमाणु रिएक्टर का एक अंश।
    • Modular (मॉड्यूलर) – प्रणालियों और घटकों को फैक्टरी में तैयार कर स्थापना स्थल तक पहुँचाना संभव।
    • Reactors (रिएक्टर) – परमाणु विखंडन का उपयोग कर ऊष्मा उत्पन्न करना और ऊर्जा उत्पादन।
  • SMRs के चार प्रमुख प्रकार हैं: लाइट वाटर, उच्च तापमान गैस, तरल धातु और पिघला हुआ नमक।

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर

SMR के लाभ

  • सुरक्षा विशेषताएँ: प्राकृतिक संवहन और गुरुत्वाकर्षण-आधारित शीतलन जैसी निष्क्रिय सुरक्षा प्रणालियाँ, जो बाहरी ऊर्जा या मानव हस्तक्षेप पर निर्भर हुए बिना अधिक ताप से बचाती हैं।
  • लचीलापन: मॉड्यूलर प्रकृति के कारण ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार क्रमिक रूप से क्षमता बढ़ाना संभव।
  • दूरस्थ एवं ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों के लिए उपयुक्तता: कॉम्पैक्ट डिज़ाइन छोटे ग्रिड सिस्टम और जिला हीटिंग व जल विलवणीकरण जैसी अनुप्रयोगों के लिए अनुकूल।
  • लागत-प्रभावी निर्माण: नियंत्रित वातावरण में पूर्वनिर्माण से स्थल पर निर्माण समय और लागत कम होती है।

स्रोत: PIB

शैडो फ़्लीट

पाठ्यक्रम: GS2 / अंतर्राष्ट्रीय संबंध

समाचार में

  • 2026 के संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है, जिससे अधिकांश टैंकर फँस गए हैं, जबकि “शैडो फ़्लीट” नामक जहाज़ों का समूह नियमों को तोड़ते हुए संचालन जारी रखे हुए है।

शैडो फ़्लीट के बारे में

  • “शैडो फ़्लीट” उन जहाज़ों का समूह है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधों को दरकिनार करते हैं, पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं, माल की तस्करी करते हैं या अपने कार्गो और संचालन को छिपाते हैं।
  • ये जहाज़ समुद्री विनियमन की स्वैच्छिक प्रकृति का लाभ उठाते हैं:
    • ट्रैकिंग ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं।
    • सुविधा वाले झंडों (Flags of Convenience) के अंतर्गत पंजीकरण करते हैं।
    • अपारदर्शी बीमा और शेल कंपनियों का उपयोग करते हैं।
      • कुछ जहाज़ पहचान से बचने हेतु नाम या पहचान संख्या भी बदल लेते हैं।
  • ये इसलिए बने रहते हैं क्योंकि भूमि सीमाओं की तरह सख़्त प्रवर्तन समुद्रों पर नहीं होता, जहाँ अधिकांश नियम स्वैच्छिक हैं।

अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग का शासन

  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री जीवन सुरक्षा संधि 167 देशों द्वारा हस्ताक्षरित है।
  • यह संधि लगभग प्रत्येक वाणिज्यिक जहाज़ को रेडियो ट्रांसपोंडर रखने के लिए बाध्य करती है, जो जहाज़ की पहचान, स्थिति और गति की जानकारी बंदरगाह प्राधिकरणों, तटरक्षक बल एवं वाणिज्यिक ट्रैकिंग नेटवर्क को प्रसारित करता है।

स्रोत: DTE

 

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