मुख्य चुनाव आयुक्त का पदच्युत किया जाना
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था
संदर्भ
- विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं।
संविधान का अनुच्छेद 324
- संविधान का अनुच्छेद 324 कहता है कि निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और उतने संख्या में चुनाव आयुक्त (ECs) होंगे, जितने राष्ट्रपति तय करेंगे।
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) संसद, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने के लिए उत्तरदायी है।
- संविधान में प्रावधान है कि राष्ट्रपति, संसद के अधिनियम के प्रावधानों के अधीन, CEC और ECs की नियुक्ति करेंगे।
CEC को हटाने के संवैधानिक प्रावधान
- संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रकार और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को।
- CEC को पदच्युत करने हेतु प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है और उसमें हटाने के आधार स्पष्ट रूप से उल्लेखित होने चाहिए।
- प्रस्ताव का समर्थन आवश्यक है:
- लोकसभा के कम से कम 100 सदस्य, या
- राज्यसभा के कम से कम 50 सदस्य।
- प्रस्ताव स्वीकार होने पर लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति आरोपों की जाँच हेतु एक जाँच समिति गठित करते हैं।
- यदि समिति आरोपों को सिद्ध पाती है, तो प्रस्ताव संसद में मतदान हेतु प्रस्तुत किया जाता है।
- दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है।
- दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति हटाने का अंतिम आदेश जारी करते हैं।
स्रोत: द हिंदू (TH)
जल जीवन मिशन 2.0
पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी पहल
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) को वर्ष 2028 तक बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान।
जल जीवन मिशन (JJM) के बारे में
- प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना।
- नोडल मंत्रालय: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत।
- पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) का पुनर्गठन कर उसे JJM में सम्मिलित किया गया।
- उद्देश्य: प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराना, जिसमें प्रति व्यक्ति प्रति दिन 55 लीटर पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो।
- सभी ग्राम पंचायतों को “हर घर जल” प्रमाणित करना भी इसका लक्ष्य है।
- कवरेज और विस्तार:
- अगस्त 2019 में इसे 2024 तक 100% ग्रामीण नल जल कवरेज प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था।
- कार्यक्रम ने लगभग 81% कवरेज हासिल किया, जिसके चलते इसे 2028 तक JJM 2.0 के अंतर्गत बढ़ाया गया।
- डिजिटल निगरानी ढाँचा: “सुजलाम भारत” नामक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया जाएगा, जो स्रोत से नल तक पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण करेगा।
- प्रत्येक गाँव को एक विशिष्ट “सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र आईडी” प्रदान की जाएगी।
- प्रगति: ग्रामीण भारत में नल जल की पहुँच तेजी से बढ़ी है, जो 3.23 करोड़ परिवारों (16.7%) से बढ़कर अब अतिरिक्त 12.48 करोड़ परिवारों तक पहुँच गई है।
- वित्त पोषण पैटर्न:
- हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10
- केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100%
- अन्य राज्यों के लिए 50:50
क्या आप जानते हैं?
- भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शोधानुसार JJM ने 9 करोड़ महिलाओं को प्रतिदिन जल लाने के भार से मुक्त किया है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, महिलाओं की मेहनत में प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे की बचत, 4 लाख दस्त संबंधी मृत्युओं की रोकथाम और 1.4 करोड़ डिसएबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर्स (DALYs) की बचत हुई है।
- आईआईएम बैंगलोर एवं अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, JJM ने 59.9 लाख प्रत्यक्ष और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष व्यक्ति-वर्ष का संभावित रोजगार सृजन किया है, जिससे ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ किया गया है।
स्रोत: द हिंदू (TH)
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA)
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचार में
- नई दिल्ली के आर.के. पुरम में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) का नया कार्यालय उद्घाटित किया गया।
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) के बारे में
- NDSA एक वैधानिक निकाय है, जिसे बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के अंतर्गत स्थापित किया गया है।
- यह जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के अधीन कार्य करता है।
- यह भारत में बांध सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर का नियामक निकाय है।
प्रमुख डिजिटल पहल
- NETRA (AI का उपयोग करके ट्रैकिंग और समीक्षा के लिए NDSA इंजन): यह DHARMA बांध सुरक्षा डेटाबेस से जुड़ा हुआ है।
- राष्ट्रीय बांध सुरक्षा दर्पण (RBSD): इसे उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (C-DAC) द्वारा बांध टूटने के विश्लेषण (DBA) के दृश्यांकन हेतु विकसित किया गया है।
स्रोत: PIB
भारत का कांच उद्योग
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण एलएनजी आपूर्ति में अनिश्चितताओं के चलते सरकार औद्योगिक उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति कम करने की योजना बना रही है, जिससे भारत का कांच निर्माण उद्योग परिचालन चुनौतियों का सामना कर रहा है।
कांच उद्योग की ऊर्जा निर्भरता
- कांच निर्माण संयंत्र मुख्यतः पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) पर निर्भर रहते हैं।
- निर्माण प्रक्रिया में निरंतर उच्च तापमान संचालन आवश्यक होता है, जिसके लिए ईंधन की अविरल आपूर्ति अनिवार्य है।
भारत का कांच उद्योग
- भारत का प्रथम आधुनिक कांच कारखाना पैसा फंड ग्लास वर्क्स 1908 में महाराष्ट्र के तालेगाँव में बाल गंगाधर तिलक द्वारा स्वदेशी आंदोलन के अंतर्गत स्थापित किया गया।
- फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश को “भारत का कांच नगरी” कहा जाता है। यह 17वीं शताब्दी से कांच उत्पादन का केंद्र रहा है और विश्व का सबसे बड़ा कांच की चूड़ियों का उत्पादक है।
- अन्य प्रमुख राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
- उद्योग का विभाजन:
- कंटेनर ग्लास: बोतलें, जार, पेय पदार्थ कंटेनर।
- फ्लैट ग्लास: निर्माण, ऑटोमोबाइल विंडशील्ड और दर्पणों में उपयोग।
- विशेष कांच: ऑप्टिकल ग्लास, प्रयोगशाला उपकरण, औषधीय कांच।
- फाइबरग्लास: इन्सुलेशन, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग।
- बाज़ार आकार एवं वृद्धि:
- 2024 में भारतीय कांच निर्माण बाज़ार का मूल्य लगभग 1.81 अरब अमेरिकी डॉलर था।
- 2030 तक इसके लगभग 2.81 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, लगभग 7.7% CAGR की दर से।
स्रोत: IE
राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना निधि (NIIF)
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना निधि (NIIF) ने अपने दूसरे निजी बाज़ार कोष (PMF-II) के लिए 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर एकत्रित किए।
राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना निधि (NIIF) के बारे में
- NIIF की स्थापना 2015 में भारत के सार्वभौमिक संपत्ति निधि (सॉवरेन वेल्थ फंड) के रूप में की गई।
- यह राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना निधि लिमिटेड (NIIFL) द्वारा प्रबंधित एक सहयोगात्मक मंच है, जिसका उद्देश्य अवसंरचना और संबंधित क्षेत्रों में इक्विटी निवेश आकर्षित करना है।
- इसमें सरकार की हिस्सेदारी 49% है और शेष 51% वैश्विक संस्थागत निवेशकों से आती है।
स्रोत: ET
डार्क ऑक्सीजन
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
समाचार में
- एक नए अध्ययन में प्रशांत महासागर के समुद्री तल पर “डार्क ऑक्सीजन” की खोज की गई, जिससे यह सिद्ध हुआ कि ऑक्सीजन बिना सूर्य प्रकाश के भी उत्पन्न हो सकती है।
डार्क ऑक्सीजन
- शोधकर्ताओं द्वारा इसका उपयोग उन गहरे समुद्री क्षेत्रों में पाई गई ऑक्सीजन का वर्णन करने हेतु किया जा रहा है, जहाँ सूर्य का प्रकाश पूरी तरह अनुपस्थित होता है।
- परंपरागत रूप से ऑक्सीजन उत्पादन प्रकाश ऊर्जा पर आधारित प्रकाश संश्लेषण से जुड़ा रहा है।
नवीनतम शोध
- प्रशांत महासागर के क्लैरियन क्लिपरटन क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने समुद्री तल की ऑक्सीजन की निगरानी हेतु बेंथिक चेंबर का उपयोग किया।
- आश्चर्यजनक रूप से, पूर्ण अंधकार में भी ऑक्सीजन स्तर बढ़ा, जबकि सामान्यतः सूक्ष्मजीव और रासायनिक प्रतिक्रियाएँ इसे उपभोग करती हैं।
- बार-बार किए गए मापन और प्रयोगशाला परीक्षणों से संकेत मिलता है कि बहुधात्विक नोड्यूल्स विद्युत-रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ऑक्सीजन उत्पन्न कर सकते हैं।
महत्व
- डार्क ऑक्सीजन की खोज वैश्विक ऑक्सीजन चक्र की समझ को पुनः परिभाषित कर सकती है और यह संकेत देती है कि ऑक्सीजन प्रकाश संश्लेषण के बिना भी चरम परिस्थितियों में उत्पन्न हो सकती है।
बहुधात्विक नोड्यूल्स
- ये चट्टान जैसी संरचनाएँ हैं जो समुद्री तल पर लाखों वर्षों में बनती हैं।
- इनमें बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपयोगी धातुएँ होती हैं।
- इन पर गहरे समुद्र में खनन की संभावना भी विचाराधीन है क्योंकि ये मूल्यवान हैं।
- ये सामान्यतः प्रशांत महासागर के एबिसल मैदानों में पाए जाते हैं।
स्रोत: TOI
क्षुद्रग्रह 2024 YR4
पाठ्यक्रम: GS3/अंतरिक्ष
संदर्भ
- नासा ने पुष्टि की है कि क्षुद्रग्रह 2024 YR4 वर्ष 2032 में चंद्रमा से टकराने का कोई जोखिम नहीं रखता, यह निष्कर्ष जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से प्राप्त अवलोकनों पर आधारित है।
- 2024 YR4 को निकट-पृथ्वी क्षुद्रग्रह (NEA) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसका अर्थ है कि इसकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा के निकट आती है।
परिचय
- क्षुद्रग्रह, जिन्हें कभी-कभी लघु ग्रह भी कहा जाता है, हमारे सौरमंडल के लगभग 4.6 अरब वर्ष पूर्व के निर्माण से शेष बचे चट्टानी, वायुरहित अवशेष हैं।
- अधिकांश क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी में करते हैं।

स्रोत: TH
SIPRI रिपोर्ट: हथियार
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने हाल ही में हथियार स्थानांतरण डेटाबेस (1950–2025) को अद्यतन किया।
प्रमुख निष्कर्ष
- 2021–25 में प्रमुख हथियारों के अंतर्राष्ट्रीय स्थानांतरण की मात्रा 2016–20 की तुलना में 9.2% अधिक रही। यह 2011–15 के बाद सबसे बड़ी वृद्धि है।
- 2021–25 में प्रमुख हथियारों के पाँच सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता थे: संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, रूस, जर्मनी और चीन।
- शीर्ष पाँच आयातक: यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब, क़तर और पाकिस्तान, जिन्होंने वैश्विक आयात का 35% हिस्सा लिया।
- यूरोप ने वैश्विक हथियार आयात का 33% हिस्सा लिया, इसके बाद एशिया और ओशिनिया 31% तथा पश्चिम एशिया 26% पर रहे।
- अमेरिका के हथियार निर्यात 2016–20 और 2021–25 के बीच 27% बढ़े, जिससे उसका वैश्विक हथियार निर्यात में हिस्सा 42% हो गया।
- भारत ने 2021–25 के बीच वैश्विक हथियार आयात का 8.2% हिस्सा लिया, जिससे वह दूसरा सबसे बड़ा आयातक बना।
- भारत के हथियार आयात का सबसे बड़ा हिस्सा रूस (40%) से आया, जो 2016–20 (51%) और 2011–15 (70%) की तुलना में काफी कम है।
- भारत अब तेजी से पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं जैसे फ्रांस, इज़राइल और अमेरिका की ओर प्रवृति कर रहा है।

SIPRI के बारे में
- SIPRI एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है, जो संघर्ष, शस्त्र, शस्त्र नियंत्रण और निरस्त्रीकरण पर शोध हेतु समर्पित है। इसका मुख्यालय स्टॉकहोम में है।
- इसकी स्थापना 1966 में हुई थी। SIPRI नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, मीडिया और आम जनता को खुले स्रोतों पर आधारित आँकड़े, विश्लेषण एवं सिफारिशें प्रदान करता है।
- वित्त पोषण: इसकी स्थापना स्वीडिश संसद के निर्णय पर हुई थी और इसे स्वीडिश सरकार से वार्षिक अनुदान के रूप में पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
- संस्थान अपने अनुसंधान कार्यों को पूरा करने हेतु अन्य संगठनों से भी वित्तीय सहयोग प्राप्त करता है।
स्रोत: SIPRI
कोयला गैसीकरण (Coal Gasification)
पाठ्यक्रम: GS3/ऊर्जा
संदर्भ
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG) परियोजनाओं के लिए न्यूनतम गहराई से छूट देने से मना कर दिया है।
कोयला गैसीकरण क्या है?
- कोयला गैसीकरण कोयले को सिंथेटिक गैस (Syngas) में परिवर्तित करने की प्रक्रिया है, जिसमें हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और CO₂ शामिल होते हैं।
- यह सिंथेटिक गैस मेथनॉल, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG), अमोनियम नाइट्रेट, उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स और विद्युत उत्पादन में प्रयुक्त हो सकती है।
भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG)
- UCG एक प्रक्रिया है जिसमें कोयले को पारंपरिक खनन के बजाय भूमिगत ही ज्वलनशील गैस (Syngas) में परिवर्तित किया जाता है।

- यह भारत के गहरे कोयला भंडारों का उपयोग करने की एक रणनीतिक पहल है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से खनन करना संभव नहीं है।
- यह नवाचार आयातित प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ निवेश के नए अवसर खोलने की अपेक्षा करता है।
कोयला गैसीकरण हेतु वित्तीय प्रोत्साहन योजना
- यह योजना 2024 में शुरू की गई थी, जिसकी कुल राशि ₹8,500 करोड़ है।
- इसका लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण प्राप्त करना है, जिससे भारत के प्रचुर घरेलू कोयला भंडार का उपयोग कर सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
- यह योजना सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को देशभर में कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
स्रोत: HT
विशाखापट्टनम में प्रोटॉन त्वरक सुविधा
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
समाचार में
- आंध्र प्रदेश, भारत के दीर्घकालिक परमाणु अनुसंधान कार्यक्रम के अंतर्गत विशाखापट्टनम में उच्च-ऊर्जा प्रोटॉन त्वरक (Proton Accelerator) की मेजबानी करेगा।
- प्रोटॉन एक उपपरमाण्विक कण है, जिसमें धनात्मक विद्युत आवेश होता है। यह प्रत्येक तत्व के परमाणु नाभिक में पाया जाता है।
परियोजना के बारे में
- विशाखापट्टनम में उच्च-ऊर्जा प्रोटॉन त्वरक थोरियम को यूरेनियम ईंधन में परिवर्तित करने हेतु उच्च-ऊर्जा न्यूट्रॉनों का उत्पादन करेगा।
- इस सुविधा को विशाखापट्टनम के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र और शीतलन हेतु समुद्री पहुँच का लाभ मिलेगा।
- यह परियोजना राजा रामन्ना उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT) से जुड़ी हुई है।
महत्व
- प्रोटॉन त्वरक भारत के दीर्घकालिक परमाणु कार्यक्रम का हिस्सा है।
- यह एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी है, जिसे पूर्ण रूप से परिचालित होने में दशकों लग सकते हैं।
- यह स्पैलेशन प्रतिक्रियाओं के माध्यम से उच्च-ऊर्जा न्यूट्रॉनों का उत्पादन करेगा, जिससे भारत के प्रचुर थोरियम को यूरेनियम ईंधन में परिवर्तित किया जा सकेगा।
राजा रामन्ना उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT)
- इसकी स्थापना 1984 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत की गई थी।
- यह कण त्वरक और लेज़र प्रौद्योगिकी में अनुसंधान का नेतृत्व करता है, जिनका उपयोग अंतरिक्ष, रक्षा, संचार एवं चिकित्सा विज्ञान में होता है।
- यह राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाएँ भी संचालित करता है, जहाँ उद्योग, अस्पताल और संस्थान प्रयोग करते हैं।
स्रोत: TH
हलीम
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- वाणिज्यिक LPG की कमी के बीच आशंका है कि हैदराबाद में रमज़ान के मेन्यू से हलीम हट सकता है।
हलीम के बारे में
- हलीम हैदराबाद में रमज़ान के इस्लामी पवित्र महीने के दौरान परोसा जाने वाला GI-टैग प्राप्त मौसमी व्यंजन है, जिसे कई रेस्तरां श्रृंखलाओं द्वारा पूरे देश में भेजा जाता है।
- इसे लकड़ी से जलने वाले ओवन — जिन्हें ‘भट्टी’ कहा जाता है — पर लगभग 12 घंटे तक पकाया जाता है।
- गेहूँ, मांस और मसाले शाम तक गाढ़े मिश्रण में बदल जाते हैं और यह इफ्तार में रोज़ा खोलने के खाद्य पदार्थों का हिस्सा होता है।
स्रोत: TH
राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक (NH-GCI)
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसरो के सहयोग से राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक (NH-GCI) 2025–26 पर प्रथम बार वार्षिक रिपोर्ट जारी की है।
परिचय
- इस आकलन में उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह सेंसर का उपयोग कर क्लोरोफिल सामग्री का पता लगाया जाता है, जिससे राजमार्गों के किनारे वनस्पति का वस्तुनिष्ठ और प्रौद्योगिकी-आधारित मापन संभव होता है।
- NH-GCI का मान प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे (RoW) क्षेत्र में हरित आवरण से आच्छादित भूमि के अनुपात को दर्शाता है।
- यह सूचकांक राजमार्गों के दोनों ओर की वनस्पति को एक किलोमीटर की सूक्ष्मता पर मापता है।
- जुलाई–दिसंबर 2024 की अवधि के लिए लगभग 30,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग, जो 24 राज्यों में फैले हैं, को शामिल किया गया है।
स्रोत: PIB