भारत के औद्योगिक गलियारे

पाठ्यक्रम:GS3/अर्थव्यवस्था

समाचार में

  • वित्त वर्ष 2026–27 के केंद्रीय बजट में एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे की घोषणा की गई है, जिसका प्रमुख नोड दुर्गापुर में होगा। इसका उद्देश्य आधुनिक, वैश्विक प्रतिस्पर्धी औद्योगिक केंद्रों और ग्रीनफील्ड निवेश क्षेत्रों का निर्माण करना है।
    • देशभर में 11 औद्योगिक गलियारों की योजना बनाई गई है, जो उत्तर–दक्षिण और पूर्व–पश्चिम पट्टियों में फैले होंगे।

औद्योगिक गलियारे

  • ये रैखिक विकास क्षेत्र होते हैं जो प्रमुख आर्थिक केंद्रों को सड़कों, रेलमार्गों, बंदरगाहों एवं हवाई अड्डों के एकीकृत नेटवर्क के माध्यम से जोड़ते हैं।
  • औद्योगिक गलियारे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को रूपांतरित करने में मौलिक भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे ऐसे वातावरण का निर्माण करते हैं जहाँ उद्योग कुशलतापूर्वक, सतत रूप से और प्रतिस्पर्धात्मक ढंग से संचालित हो सकें।

विशेषताएँ

  • उद्योग और मूलभूत अवसंरचना के बीच संबंध को सुदृढ़ कर तीव्र औद्योगिक वृद्धि को प्रोत्साहित करना।
  • परिभाषित मार्ग के साथ वैश्विक स्तर पर तुलनीय अवसंरचना का निर्माण, जो प्रतिस्पर्धी और व्यवसाय-अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
  • आर्थिक संकेंद्रण और औद्योगिक क्लस्टरिंग को सुगम बनाना, जिससे क्षेत्र अपनी विकास क्षमता का अधिकतम उपयोग कर सकें।
  • क्षेत्रीय शक्तियों का इष्टतम उपयोग केंद्रित निवेश और नियोजित औद्योगिक विकास के माध्यम से करना।
  • प्रमुख परिवहन मार्गों, विशेषकर रेल ट्रंक मार्गों के साथ विकास, जिससे माल और जनसाधारण की कुशल आवाजाही हेतु सुदृढ़ संपर्क सुनिश्चित हो।

महत्व

  • एकीकृत अवसंरचना औद्योगिक दक्षता को सुदृढ़ करती है: बहु-माध्यम परिवहन नेटवर्क, विश्वसनीय उपयोगिताएँ और आईसीटी-सक्षम सेवाएँ एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती हैं, जो औद्योगिक संचालन एवं वस्तुओं की आवाजाही को कुशल बनाती हैं।
  • प्लग-एंड-प्ले पारिस्थितिकी तंत्र व्यापार तत्परता को तीव्र करता है: तैयार सुविधाएँ, सुनिश्चित उपयोगिताएँ और सुव्यवस्थित अनुमोदन समय की बचत करते हैं, जिससे उद्योग शीघ्र एवं प्रतिस्पर्धात्मक रूप से संचालन प्रारंभ कर सकते हैं।
  • सततता पहल जिम्मेदार वृद्धि सुनिश्चित करती हैं: नवीकरणीय ऊर्जा अपनाना, अपशिष्ट पुनर्चक्रण प्रणाली और हरित भवन मानदंड उद्योगों को पर्यावरणीय प्रभाव सीमित रखते हुए विस्तार करने में सहायक होते हैं।
  • कौशल विकास पहल क्षेत्रीय रोजगार को प्रोत्साहित करती हैं: प्रशिक्षण कार्यक्रम और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी कुशल कार्यबल का निर्माण करती हैं, जिससे रोजगार सृजन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र निवेश आकर्षित करते हैं और निर्यात को बढ़ावा देते हैं: SEZ कर प्रोत्साहन और नियामकीय लाभ प्रदान करते हैं, जो विदेशी निवेश को आकर्षित करते हैं तथा भारत की वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में स्थिति को सुदृढ़ करते हैं।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी विकास परिणामों में सुधार करती है: सरकार और उद्योग के बीच सहयोगी मॉडल बेहतर योजना, संसाधनों के कुशल उपयोग एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करते हैं।
  • वॉक-टू-वर्क योजना जीवन गुणवत्ता और उत्पादकता को बढ़ाती है: कम आवागमन, कम प्रदूषण, पैदल-मैत्रीपूर्ण लेआउट और हरित स्थान स्वस्थ जीवनशैली एवं अधिक उत्पादक शहरी वातावरण को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे औद्योगिक नगर निवेशकों तथा श्रमिकों दोनों के लिए आकर्षक बनते हैं।

सरकारी कदम

  • भारत सरकार राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम (NICDP) के अंतर्गत अनेक औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं का विकास कर रही है, जिसे पीएम गतिशक्ति ढाँचे द्वारा मार्गदर्शित किया जा रहा है ताकि प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों के लिए समन्वित, बहु-माध्यम संपर्क सुनिश्चित हो सके।
  • नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NICDC), जिसे पूर्व में दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DMICDC) के नाम से जाना जाता था, जनवरी 2008 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) के विकास, समन्वय और क्रियान्वयन हेतु स्थापित किया गया था।

स्रोत :PIB

 

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