पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- अमेरिकी आव्रजन नीति में हालिया कठोरता ने उच्च कौशल वाले विदेशी श्रमिकों के लिए अनिश्चितता उत्पन्न की है, जिसके परिणामस्वरूप सरकार लक्षित पहलों एवं बेहतर अवसरों के माध्यम से अपने वैश्विक प्रतिभा को पुनः आकर्षित करने का प्रयास कर रही है।
अमेरिका में उच्च-कौशल प्रवासन में भारत की प्रधानता
- वित्तीय वर्ष 2024 में H-1B स्वीकृतियों में भारतीय नागरिकों का हिस्सा लगभग 71% रहा, जो इस चैनल पर अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है।
- लाभार्थियों का एक बड़ा हिस्सा उच्च डिग्री धारक है, जिससे स्पष्ट होता है कि प्रवासन में अत्यधिक प्रशिक्षित मानव पूंजी शामिल है।
- मास्टर डिग्री धारकों का अनुपात दशकों से लगातार बढ़ रहा है, जो भारतीय प्रवासन की बढ़ती ज्ञान-गहनता को दर्शाता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, इंजीनियरिंग और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में एकाग्रता भारतीय पेशेवरों को अमेरिकी नवाचार प्रणाली का केंद्रीय हिस्सा बनाती है।
उभरते प्रतिलोम प्रवासन प्रवृति
- बढ़ती वीज़ा लागत और H-1B कार्यक्रम से जुड़ी अनिश्चितताओं ने कई कुशल भारतीयों को दीर्घकालिक विदेशी बसावट पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है।
- कई विदेशी विश्वविद्यालयों में अनुसंधान निधि, छात्रवृत्ति और भर्ती सहायता में कमी ने पारंपरिक शैक्षणिक एवं पेशेवर मार्गों को कमजोर किया है।
- प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से स्नातक भारतीय अब घरेलू अवसरों में बढ़ती संभावनाओं के कारण भारत में रोजगार खोज रहे हैं।
- भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स में बढ़ते अवसरों ने वापसी प्रवासन को पहले से अधिक आकर्षक बना दिया है।
भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र
- सशक्तियाँ:
- भारत में 1,600 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स हैं, जो लाखों पेशेवरों को रोजगार देते हैं।
- स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र विश्व के सबसे बड़े में से एक है और विभिन्न क्षेत्रों में लगातार विस्तार कर रहा है।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और विशाल घरेलू बाज़ार नवाचार के लिए उपजाऊ भूमि तैयार करते हैं।
- कमज़ोरियाँ:
- भारत का अनुसंधान एवं विकास व्यय GDP का लगभग 0.64% है, जो अमेरिका (3.47%), चीन (2.41%) और इज़राइल (5.71%) से काफी कम है।
- अनुसंधान निधि में निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित है।
- उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण और डीप-टेक क्षेत्र अभी भी अविकसित हैं।
- उद्योग-अकादमिक सहयोग की कमी अनुसंधान के व्यावसायीकरण को बाधित करती है।
प्रवासी प्रतिभा को पुनः संलग्न करने हेतु सरकारी पहल
- ग्लोबल एक्सेस टू टैलेंट फ्रॉम इंडिया (GATI): अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता, सहयोग और कौशल विनिमय को सुगम बनाने का प्रयास।
- ई-माइग्रेट V2.0: प्रवासी श्रमिकों की निगरानी और संरक्षण हेतु डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
- VAJRA (उन्नत संयुक्त अनुसंधान का दौरा): एक फेलोशिप कार्यक्रम जो प्रवासी वैज्ञानिकों (NRIs और PIOs सहित) को भारतीय अनुसंधान संस्थानों में अल्पकालिक पद प्रदान करता है।
- भारत को जानो कार्यक्रम: प्रवासी युवाओं के साथ जुड़ाव को सुदृढ़ करता है और भारत के विकास पथ से दीर्घकालिक संबंध को प्रोत्साहित करता है।
- SWADES (रोज़गार सहायता के लिए कुशल कामगारों के आगमन का डेटाबेस): विदेश से लौटे योग्य नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने की पहल। यह लौटती प्रतिभा के कौशल का मानचित्रण कर भारत में कार्यरत भारतीय और विदेशी कंपनियों में रिक्तियों को भरने में सहायक होता है।
आगे की राह
- वैश्विक वीज़ा अनिश्चितता ने भारत के लिए अपने उच्च कौशल वाले प्रवासी समुदाय को पुनः प्राप्त करने का एक दुर्लभ रणनीतिक अवसर प्रदान किया है। तथापि, प्रतिभा को आकर्षित करना केवल प्रथम कदम है। दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए शहरी जीवन-योग्यता, अनुसंधान अवसरों और आर्थिक गतिशीलता में सुधार आवश्यक है।
- यदि व्यापक सुधारों द्वारा समर्थन प्राप्त हो, तो लौटे हुए पेशेवर भारत को नवाचार-प्रेरित अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करने की गति को तीव्र कर सकते हैं। अन्यथा, यह अवसर नष्ट हो सकता है और प्रतिभा वैकल्पिक गंतव्यों की ओर प्रवास कर सकती है, जिससे ब्रेन-ड्रेन(Brain Drain) का चक्र जारी रहेगा।
स्रोत: TH