पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
संदर्भ
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भारत में समावेशी ग्रामीण विकास को तीव्र गति से आगे बढ़ाने वाली एक आधारभूत तकनीक के रूप में उभर रही है।
ग्रामीण भारत में एआई के अनुप्रयोग
- ग्रामीण परिसंपत्तियों का भू-स्थानिक निगरानी: भूप्रहरी जैसे एआई-संचालित प्लेटफ़ॉर्म उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह चित्रों का उपयोग कर ग्रामीण परिसंपत्तियों — जैसे सड़कें, जल संचयन संरचनाएँ (अमृत सरोवर), और भवन — के निर्माण एवं रखरखाव का पता लगाते हैं, जिससे मैनुअल निरीक्षण की आवश्यकता समाप्त होती है।
- डिजिटल श्रमसेतु मिशन: यह एक समन्वित पहल है जो असंगठित क्षेत्र में एआई और अन्य अग्रणी तकनीकों को लागू करती है। नियामक ढाँचे और प्रभाव मूल्यांकन के साथ तकनीकी तैनाती को संरेखित कर यह मिशन सेवा वितरण एवं ग्रामीण व असंगठित श्रमिकों के आजीविका समर्थन को सुदृढ़ करता है।
- कृषि में एआई अवसंरचना: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने किसान ई-मित्र जैसी पहल के माध्यम से एआई को लागू किया है। यह एक वर्चुअल सहायक है जो सरकारी योजनाओं, विशेषकर आय समर्थन कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान करता है।
- ग्रामीण विकास में एआई का प्रोत्साहन: मध्य प्रदेश का सुमन सखी व्हाट्सएप चैटबॉट एआई-सक्षम संवादात्मक उपकरणों का उपयोग कर महिलाओं और परिवारों को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सुलभ कराता है।
- भाषाई समावेशन एवं बहुभाषी शासन हेतु एआई: एआई भारत में भाषाई पहुँच का विस्तार कर रहा है, जिससे ग्रामीण, दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के नागरिक डिजिटल सेवाओं तक पहुँच बना पा रहे हैं।
- भाषिणी (जुलाई 2022): एआई-संचालित राष्ट्रीय भाषा मंच, जो डिजिटल सेवाओं तक पहुँच में भाषाई बाधाओं को कम करता है। यह 36 से अधिक भारतीय भाषाओं में अनुवाद, स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-स्पीच और वॉयस-आधारित इंटरफ़ेस प्रदान करता है।
- भारतजेन (2025): भारत का प्रथम सरकारी वित्तपोषित सार्वभौमिक बड़ा भाषा मॉडल (LLM), जिसे विशेष रूप से भारतीय भाषाई एवं सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- आदि वाणी: एआई-सक्षम मंच, जो दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों की संचार चुनौतियों का समाधान करता है।
समावेशी विकास हेतु राष्ट्रीय एआई नीति ढाँचा
- 2018 में नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय एआई रणनीति प्रारंभ की गई, जिसने एआई को भारत की विकासात्मक चुनौतियों से निपटने हेतु एक रूपांतरणकारी उपकरण के रूप में पहचाना।
- रणनीति ने उच्च सामाजिक प्रभाव वाले क्षेत्रों — कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और शासन — को प्राथमिकता दी।
- इसने वंचित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं तक पहुँच, वहनीयता एवं गुणवत्ता सुधार पर बल दिया।
- नीति ने श्रम के प्रतिस्थापन के बजाय मानव क्षमताओं के संवर्धन पर बल दिया। यह डिजिटल कौशल विकास एवं तकनीक-सक्षम रोजगार के माध्यम से समावेशी आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।
भारत एआई शासन दिशानिर्देश
- 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा भारत एआई शासन दिशानिर्देश जारी किए गए, जिनका उद्देश्य उत्तरदायी और विश्वसनीय एआई तैनाती सुनिश्चित करना है।
- इस ढाँचे में चार प्रमुख घटक शामिल हैं:
- नैतिक एवं उत्तरदायी एआई हेतु सात मार्गदर्शक सिद्धांत (सूत्र)।
- एआई शासन के छह स्तंभों पर प्रमुख अनुशंसाएँ।
- अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक समयसीमा से जुड़ी कार्ययोजना।
- उद्योग, डेवलपर्स और नियामकों के लिए व्यावहारिक दिशानिर्देश, ताकि पारदर्शी एवं जवाबदेह एआई तैनाती सुनिश्चित हो सके।
चुनौतियाँ
- डिजिटल अवसंरचना की कमी: विश्वसनीय विद्युत , उच्च गति इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी ग्रामीण भारत में असमान रूप से उपलब्ध हैं।
- कम डिजिटल साक्षरता: ग्रामीण जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा एआई-सक्षम प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करने हेतु आवश्यक डिजिटल कौशल से वंचित है।
- डेटा उपलब्धता: एआई प्रणालियाँ विश्वसनीय एवं प्रतिनिधिक डेटा की बड़ी मात्रा पर निर्भर करती हैं, जो ग्रामीण संदर्भों में प्रायः दुर्लभ होती है।
- विभागीय डेटाबेस का विखंडन: यह एकीकृत निर्णय-निर्माण में बाधा डालता है।
- उच्च कार्यान्वयन लागत: एआई प्रणालियों का विकास, तैनाती और रखरखाव पर्याप्त वित्तीय निवेश की माँग करता है।
- बजटीय सीमाएँ: ग्रामीण स्थानीय निकायों को अक्सर सीमित बजट और प्रतिस्पर्धी विकास प्राथमिकताओं का सामना करना पड़ता है।
आगे की राह
- ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और डेटा पारिस्थितिकी तंत्र सहित डिजिटल अवसंरचना का विस्तार।
- नागरिकों और स्थानीय अधिकारियों में डिजिटल साक्षरता एवं एआई जागरूकता को बढ़ावा देना।
- दुरुपयोग और बहिष्करण रोकने हेतु सुदृढ़ डेटा संरक्षण एवं नैतिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना।
- पंचायत स्तर पर एआई अंगीकरण हेतु संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना।
स्रोत: PIB