डेटा केंद्र विस्तार से भारत की विद्युत ग्रिड के समक्ष चुनौतियाँ

पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • भारत की विद्युत प्रणाली एक “पैराडाइम शिफ्ट” की ओर बढ़ रही है क्योंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)-संचालित डेटा केंद्र बड़े, जटिल और विद्युत-गहन अवसंरचना के रूप में उभर रहे हैं।

डेटा केंद्रों से बढ़ती विद्युत मांग

  • भारत की स्थापित डेटा केंद्र क्षमता 1.2 GW है, जो 2030 तक लगभग 10 GW तक बढ़ जाएगी, जिसमें $200 अरब से अधिक का निवेश होगा।
  • डेटा केंद्रों की विद्युत मांग: AI वर्कलोड्स बड़ी संख्या में ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) का उपयोग करते हैं, जहाँ प्रत्येक रैक 80-150 KW विद्युत खपत करता है, जबकि पारंपरिक एंटरप्राइज सर्वर केवल 15-20 KW खपत करते हैं।
    • यह संगणनात्मक तीव्रता विद्युत की असीमित मांग को उत्पन्न कर देती है, जिससे डेटा केंद्र क्षेत्र में ऊर्जा खपत बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक AI बन गया है।
  • निरंतर परंतु अत्यधिक परिवर्तनशील मांग:डेटा केंद्र चौबीसों घंटे संचालित होते हैं और निरंतर कंप्यूटिंग तथा शीतलन आवश्यकताओं के कारण एक स्थिर आधार-भार बनाए रखते हैं।
    • हालाँकि, AI-संचालित वर्कलोड्स उच्चतम प्रसंस्करण अवधि के दौरान विद्युत खपत में अचानक वृद्धि कर सकते हैं, जिससे तीव्र लोड उतार-चढ़ाव उत्पन्न होते हैं जो ग्रिड संतुलन और आवृत्ति स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण होते हैं।

ग्रिड अवसंरचना पर प्रभाव

  • प्रेषण प्रणालियों पर दबाव: वर्तमान उप-प्रेषण अवसंरचना हाइपरस्केल सुविधाओं की विशाल विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं हो सकती।
    • अतः नई उच्च-क्षमता वाली प्रेषण गलियाँ, अल्ट्रा-हाई-वोल्टेज सबस्टेशन और समर्पित कनेक्टिविटी आवश्यक होंगी।
  • संसाधन पर्याप्तता चुनौतियाँ: डेटा केंद्र मांग को पूरा करने के लिए केवल अतिरिक्त उत्पादन क्षमता स्थापित करना पर्याप्त नहीं है।
    • प्रणाली को पर्याप्त रिज़र्व, संतुलन शक्ति और सहायक सेवाएँ भी बनाए रखनी होंगी।
  • मांग पूर्वानुमान में कठिनाई: AI-आधारित संगणनात्मक मांग स्वभावतः अप्रत्याशित होती है।
    • इससे लोड पूर्वानुमान और शेड्यूलिंग जटिल हो जाती है और आपूर्ति-मांग असंतुलन का जोखिम बढ़ता है।

डेटा केंद्र विद्युत मांग को संबोधित करने के उपाय

  • मांग-पक्ष उपाय:
    • ऊर्जा-कुशल संगणनात्मक अवसंरचना: उन्नत चिप्स, कुशल शीतलन प्रणाली और अनुकूलित हार्डवेयर का उपयोग।
    • विषम संगणन: CPUs, GPUs और विशेष एक्सेलेरेटर का मिश्रित उपयोग।
    • ऑन-साइट ऊर्जा भंडारण: बैटरी प्रणालियाँ अचानक मांग के समय अल्पकालिक बिजली आपूर्ति कर सकती हैं।
  • आपूर्ति-पक्ष उपाय:
    • विश्वसनीय बेसलोड उत्पादन का विस्तार: कोयला, जल, गैस और परमाणु ऊर्जा जैसे स्थिर स्रोत।
    • हाइब्रिड ऊर्जा प्रणाली: ग्रिड आपूर्ति को कैप्टिव उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा के साथ संयोजित करना।
    • उच्च-वोल्टेज सबस्टेशन और प्रेषण गलियों का विकास।

आगे की राह

  • AI-संचालित डेटा केंद्र भारत की विद्युत प्रणाली के लिए एक बड़ा अवसर और एक महत्वपूर्ण चुनौती दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • भारत को डिजिटल अवसंरचना विस्तार को ऊर्जा नियोजन के साथ एकीकृत करने हेतु दूरदर्शी रणनीति अपनानी होगी।
  • इस रणनीति में डेटा केंद्र विद्युत आपूर्ति हेतु समर्पित नीति ढाँचा, बड़े गतिशील लोड्स के लिए अद्यतन ग्रिड कोड्स और परमाणु एवं जल ऊर्जा जैसे निम्न-कार्बन स्रोतों का तीव्र विकास शामिल होना चाहिए।

Source: IE

 

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