पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यात संवर्धन मिशन के अंतर्गत सात अतिरिक्त हस्तक्षेपों की घोषणा की है।
- इनका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए सशक्त बनाना है।
निर्यात संवर्धन मिशन ( EPM)
- केंद्रीय बजट 2025-26 में वित्त मंत्री ने निर्यात संवर्धन मिशन की घोषणा की थी।
- इसका उद्देश्य निर्यात ऋण तक आसान पहुँच, सीमा-पार फैक्टरिंग सहायता, और विदेशी बाज़ारों में गैर-शुल्कीय उपायों से निपटने हेतु MSMEs को सहयोग प्रदान करना है।
- संबंधित मंत्रालय: यह मिशन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा वित्त मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाएगा।
- EPM के अंतर्गत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जो हाल ही में वैश्विक शुल्क वृद्धि से प्रभावित हुए हैं, जैसे वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा समुद्री उत्पाद।
- विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा, जिसमें आवेदन से लेकर वितरण तक की सभी प्रक्रियाएँ सम्मिलित होंगी।
- यह मिशन एक समर्पित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से संचालित होगा, जो वर्तमान व्यापार प्रणालियों से एकीकृत रहेगा।
EPM के प्रमुख घटक
वित्तीय सहयोग
- निर्यातकों हेतु ऋण गारंटी योजना (CGSE): राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) द्वारा 100% कवरेज प्रदान किया जाएगा।
- पात्र निर्यातकों (MSMEs सहित) को ₹20,000 करोड़ तक की अतिरिक्त ऋण सुविधा उपलब्ध होगी।
- यह बिना संपार्श्विक (Collateral-free) ऋण की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे तरलता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा।
- योजनाओं का एकीकरण:
- ब्याज समानिकरण योजना : निर्यातकों हेतु ब्याज सब्सिडी।
- बाज़ार पहुँच पहल (MAI): व्यापार मेलों और बाज़ार संवर्धन हेतु सहयोग।
- दोनों योजनाओं को डिजिटल रूप से संचालित EPM ढाँचे में एकीकृत किया गया है।
गैर-वित्तीय सहयोग
- गैर-शुल्कीय बाधाओं (NTBs) का समाधान: अनुपालन, प्रमाणन और तकनीकी मानकों हेतु वित्तीय सहयोग।
- बाज़ार अधिग्रहण एवं ब्रांडिंग: अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, पैकेजिंग और ब्रांडिंग हेतु सहायता।
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: आपूर्ति श्रृंखला दक्षता और व्यापार सुगमता हेतु सहयोग।
मिशन से अपेक्षित परिणाम
- MSMEs के लिए सुलभ एवं किफायती व्यापार वित्त तक पहुँच सुनिश्चित करना।
- अनुपालन और प्रमाणन सहयोग के माध्यम से निर्यात तत्परता को बढ़ाना।
- भारतीय उत्पादों के लिए बाज़ार पहुँच और दृश्यता में सुधार करना।
- गैर-पारंपरिक जिलों और क्षेत्रों से निर्यात को बढ़ावा देना।
- विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध सेवाओं में रोजगार सृजन करना।
स्रोत: TH
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