पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध/GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के प्रमुख ने अमेरिका की वैश्विक व्यापार प्रणाली में सुधार की माँग से सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली लचीली तो है, परंतु मज़बूत नहीं।
वैश्विक व्यापार प्रणाली और WTO की भूमिका
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों को संचालित करने वाली एकमात्र वैश्विक संस्था है।
- इसका उद्देश्य सदस्य देशों द्वारा वार्ता और अनुमोदित समझौतों के माध्यम से सुचारु, पूर्वानुमेय एवं मुक्त व्यापार सुनिश्चित करना है।
- यह वैश्विक व्यापार नियमों का प्रबंधन करता है, समझौतों पर वार्ता हेतु मंच प्रदान करता है, व्यापार विवादों का समाधान करता है और विकासशील देशों को सहयोग देता है।
- इसके निर्णय सदस्य सरकारों द्वारा जिनेवा में मंत्रियों या प्रतिनिधियों के माध्यम से लिए जाते हैं।
उभरते मुद्दे
- संरक्षणवाद का बढ़ना: शुल्क और व्यापार अवरोधों का बढ़ता उपयोग मुक्त व्यापार मानदंडों को कमजोर कर रहा है।
- भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता: प्रमुख शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा आपूर्ति श्रृंखलाओं और बाज़ारों को बाधित कर रही है।
- कृषि विवाद: विकसित देशों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडियाँ व्यापार को विकृत करती हैं और विकासशील देशों को प्रभावित करती हैं।
- विवाद निपटान संकट: WTO की अपील प्राधिकरण 2019 से निष्क्रिय है, जिससे नियमों का प्रवर्तन कमजोर हुआ है।
- डिजिटल और जलवायु मुद्दे: ई-कॉमर्स, डेटा प्रवाह और कार्बन करों पर वैश्विक सहमति का अभाव नए व्यापार तनाव उत्पन्न कर रहा है।
सुझाव
- विवाद निपटान प्रणाली को पुनः स्थापित किया जाए और डिजिटल व्यापार, सेवाओं तथा सततता के लिए नियमों को अद्यतन किया जाए।
- कृषि और जलवायु व्यापार पर विशेष रूप से विकासशील देशों की आवाज़ को सशक्त किया जाए।
- अत्यधिक निर्भरता को कम करने और स्थिरता बढ़ाने हेतु स्रोतों का विविधीकरण किया जाए।
- व्यापार नीतियों को जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जाए और हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाए।
निष्कर्ष
- वैश्विक व्यापार उदार बहुपक्षवाद से हटकर मर्केंटिलिज़्म की ओर बढ़ रहा है, जहाँ व्यापार को राज्य शक्ति और राष्ट्रीय लाभ के उपकरण के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
- इसलिए वैश्विक व्यापार प्रणाली में त्वरित सुधार आवश्यक हैं ताकि विखंडन और व्यापार संघर्षों को रोका जा सके तथा यह नियम-आधारित, समावेशी तथा विकासोन्मुख बनी रहे।
- भारत को WTO सुधारों का समर्थन करना चाहिए, साथ ही किसानों और लघु उद्योगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
- भारत के पास डिजिटल अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और सेवाओं में अवसर हैं, किंतु उभरते वैश्विक परिदृश्य में प्रासंगिक बने रहने के लिए संस्थानों, सामाजिक एकता और सार्वजनिक निवेश को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
स्रोत :DD
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संक्षिप्त समाचार 17-02-2026