वितरित नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक परिवर्तनकारी सिद्ध हो सकती है।

पाठ्यक्रम: GS3/ऊर्जा 

संदर्भ

  • भारत AI इम्पैक्ट समिट में नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत की तीव्र गति से विस्तारित हो रही वितरित नवीकरणीय ऊर्जा के लिए परिवर्तनकारी  सिद्ध हो सकती है।

वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (DRE)

  • वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (DRE) छोटे पैमाने की, विकेंद्रीकृत विद्युत उत्पादन प्रणालियों को संदर्भित करती है, जो कुछ किलोवाट से लेकर मेगावाट तक की क्षमता में सीधे नवीकरणीय स्रोतों से विद्युत उत्पन्न करती हैं।
    • पारंपरिक केंद्रीकृत विद्युत संयंत्रों के विपरीत, जिन्हें व्यापक प्रसारण अवसंरचना की आवश्यकता होती है, DRE प्रणालियाँ स्वतंत्र रूप से संचालित होती हैं या स्थानीय वितरण नेटवर्क से जुड़ती हैं।
  • स्रोत: रूफटॉप सौर ऊर्जा,
    • छोटे पवन टरबाइन,
    • बायोमास।
  • भारत के पास लगभग 140 गीगावाट (GW) सौर ऊर्जा क्षमता है, जिसमें से लगभग 35 GW DRE है।
    • विगत 15 महीनों में भारत ने PM सूर्य घर और PM-KUSUM योजनाओं के अंतर्गत लगभग 18 GW DRE जोड़ा है।
  • भारत में DRE के लाभ: दूरस्थ क्षेत्रों में ग्रिड विस्तार की प्रतीक्षा किए बिना त्वरित परिनियोजन।
    • प्रसारण और वितरण हानियों में कमी।
    • विविधीकरण के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि।
    • जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम पर्यावरणीय प्रभाव।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास।
    • ऊर्जा स्वामित्व के माध्यम से स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण।

DRE में AI का उपयोग

  • ऊर्जा प्रणालियों का अनुकूलन: AI सौर और पवन ऊर्जा का बेहतर पूर्वानुमान लगाने में सहायता करता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक एकीकरण एवं कटौती में कमी होती है।
    • AI-प्रबंधित स्मार्ट ग्रिड, बैटरियाँ और डिमांड-रिस्पॉन्स प्रणालियाँ ऊर्जा अपव्यय को कम करती हैं।
  • उद्योगों में दक्षता: AI-आधारित अनुकूलन परिवहन (ईंधन मार्ग, लॉजिस्टिक्स), भवन (स्मार्ट HVAC), और विनिर्माण (प्रक्रिया स्वचालन) में उत्सर्जन को कम करता है।
  • नीति ढाँचा: एनर्जी कंज़र्वेशन बिल्डिंग कोड और राष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता रोडमैप नवीकरणीय ऊर्जा एवं सतत डिज़ाइन में AI को एकीकृत करते हैं।
  • स्मार्ट रियल एस्टेट: AI-आधारित समाधान जैसे स्मार्ट लाइटिंग, पूर्वानुमानित HVAC, स्वचालित भवन नियंत्रण ऊर्जा बचत को 25% तक बढ़ा सकते हैं।

चुनौतियाँ

  • डेटा की कमी और निम्न गुणवत्ता: रूफटॉप सौर, माइक्रोग्रिड और ग्रामीण प्रणालियों से उच्च-रिज़ॉल्यूशन, वास्तविक समय डेटा की सीमित उपलब्धता AI पूर्वानुमान एवं अनुकूलन मॉडलों की सटीकता को कम करती है।
  • उच्च प्रारंभिक लागत: स्मार्ट सेंसर, AI सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म और प्रशिक्षित जनशक्ति की तैनाती अग्रिम निवेश बढ़ाती है, जिससे छोटे DRE प्रोजेक्ट वित्तीय रूप से कम व्यवहार्य हो जाते हैं।
  • कौशल और क्षमता की कमी: स्थानीय उपयोगिता और DISCOM स्तर पर AI–ऊर्जा एकीकरण में प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी प्रभावी क्रियान्वयन को सीमित करती है।
  • साइबर सुरक्षा और अंतःसंचालनीयता जोखिम: AI-सक्षम DRE प्रणालियाँ साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील होती हैं और विविध हार्डवेयर विक्रेताओं तथा पुरानी ग्रिड अवसंरचना के कारण संगतता समस्याओं का सामना करती हैं।

भारत की ऊर्जा को रूपांतरित करने वाले प्रमुख DRE समाधान

  • रूफटॉप सौर प्रणालियाँ: 1–10 kW तक की क्षमता वाले घरेलू संयंत्रों से लेकर वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं हेतु बड़ी क्षमता तक।
  • सौर + भंडारण समाधान: एकीकृत सौर और बैटरी भंडारण प्रणालियाँ सौर ऊर्जा की अस्थिरता की चुनौती का समाधान करती हैं।
  • सौर कृषि पंप: ये प्रणालियाँ किसानों की डीज़ल पंप या अविश्वसनीय ग्रिड विद्युत पर निर्भरता समाप्त करती हैं।
  • बायोमास और छोटे जलविद्युत संयंत्र: बायोमास गैसीकरण संयंत्र कृषि अपशिष्ट को बिजली में परिवर्तित करते हैं, जो सौर ऊर्जा के पूरक के रूप में विश्वसनीय बेसलोड ऊर्जा प्रदान करते हैं।
    • छोटे जलविद्युत परियोजनाएँ (25 MW तक) पहाड़ी क्षेत्रों में प्रवाहित होते जल का उपयोग करती हैं।

DRE को अपनाने हेतु सरकारी नीतियाँ और प्रोत्साहन

  • PM-KUSUM योजना:प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान का लक्ष्य 30.8 GW सौर क्षमता जोड़ना है।
    • घटक A: 10 GW विकेंद्रीकृत ग्राउंड-माउंटेड सौर संयंत्र।
    • घटक B: 20 लाख स्वतंत्र सौर पंपों की स्थापना।
    • घटक C: 15 लाख ग्रिड-संयुक्त कृषि पंपों का सौरकरण।
    • योजना में घटक और लाभार्थी श्रेणी के अनुसार 30–90% तक की सब्सिडी दी जाती है।
  • प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना: इस योजना का लक्ष्य एक करोड़ परिवारों को रूफटॉप सौर संयंत्र उपलब्ध कराना है।
    • 3 kW तक की प्रणालियों पर 40% सब्सिडी।
    • 3–10 kW प्रणालियों पर 20% सब्सिडी।
    • राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से सरल आवेदन प्रक्रिया।
    • साझेदार बैंकों के माध्यम से कम-ब्याज ऋण।
    • इस पहल का उद्देश्य परिवारों को विद्युत बिलों में प्रतिवर्ष ₹15,000 तक की बचत कराना है।
  • राज्य-स्तरीय पहलें: कई राज्यों ने समान पूरक नीतियाँ लागू की हैं।

निष्कर्ष

  • वितरित नवीकरणीय ऊर्जा भारत की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान करने हेतु एक रूपांतरकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
  • उपयोग स्थल के निकट स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करके DRE प्रणालियाँ ऊर्जा पहुँच को बढ़ाती हैं, विश्वसनीयता सुधारती हैं, पर्यावरणीय प्रभाव कम करती हैं और आर्थिक अवसर उत्पन्न करती हैं।
  • प्रौद्योगिकियों की घटती लागत, सहायक सरकारी नीतियाँ और नवोन्मेषी व्यापार मॉडल भारत में DRE को तीव्रता से अपनाने में सहायक हो रहे हैं।

स्रोत: IE

 

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