पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- हाल ही में वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों के केंद्रीय मंत्री ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया।
आर्थिक सर्वेक्षण क्या है?
- यह एक आधिकारिक वार्षिक दस्तावेज़ है जो बीते वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करता है तथा प्रमुख आर्थिक प्रवृत्तियों, चुनौतियों और नीतिगत दिशा-निर्देशों को रेखांकित करता है।
- यह आर्थिक विभाग (DEA), वित्त मंत्रालय के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के पर्यवेक्षण एवं मार्गदर्शन में तैयार किया जाता है।
- यह प्रत्येक वर्ष केंद्रीय बजट से ठीक पूर्व संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
- यह सामान्यतः निम्नलिखित को सम्मिलित करता है:
- अर्थव्यवस्था का अवलोकन: GDP वृद्धि, मुद्रास्फीति, रोजगार प्रवृत्तियाँ, राजकोषीय घाटा, बाह्य क्षेत्र (निर्यात, आयात, विदेशी मुद्रा भंडार)।
- क्षेत्रवार विश्लेषण: कृषि, उद्योग, सेवाएँ।
- लोक वित्त: सरकारी राजस्व एवं व्यय, कर प्रदर्शन, सब्सिडी और कल्याणकारी व्यय।
- सामाजिक क्षेत्र: शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी एवं असमानता, मानव विकास संकेतक।
- विशेष विषय: प्रत्येक वर्ष सर्वेक्षण एक या दो प्रमुख विषयों पर केंद्रित होता है, जैसे—जलवायु परिवर्तन एवं हरित विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, उत्पादकता और सुधार।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की प्रमुख विशेषताएँ
- वैश्विक परिप्रेक्ष्य एवं भारत की वृद्धि की बढ़त :
- वैश्विक अर्थव्यवस्था संवेदनशील बनी हुई है, जिस पर भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विखंडन और वित्तीय असुरक्षाएँ बनी हुई हैं।
- भारत निरंतर चौथे वर्ष सबसे तीव्रता से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।
- प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार, FY26 में वास्तविक GDP वृद्धि 7.4% आँकी गई है, जबकि सकल मूल्य वर्धन (GVA) वृद्धि 7.3% रही है, जो सुदृढ़ घरेलू आधारभूत संरचना को रेखांकित करती है।


- मांग-आधारित वृद्धि: उपभोग और निवेश
- उपभोग गति :
- निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) FY26 में 7.0% बढ़ा, जो GDP का 61.5% है—2012 के बाद का सर्वोच्च स्तर।
- यह निम्न एवं स्थिर मुद्रास्फीति, स्थिर रोजगार स्थिति और वास्तविक आय में वृद्धि को दर्शाता है।
- सुदृढ़ कृषि उत्पादन ने ग्रामीण उपभोग को बढ़ावा दिया, जबकि कर तर्कसंगतीकरण और आय वृद्धि ने शहरी मांग को सहारा दिया, जिससे व्यापक उपभोग पुनरुद्धार का संकेत मिलता है।
- निवेश पुनरुद्धार :
- सकल स्थिर पूंजी निर्माण 7.8% बढ़ा और GDP में 30% हिस्सेदारी बनाए रखी।
- निवेश वृद्धि को सतत सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और निजी क्षेत्र के नए निवेश ने गति दी, जो कॉर्पोरेट घोषणाओं में परिलक्षित हुआ।
- उपभोग गति :
- क्षेत्रीय प्रदर्शन: सेवाएँ अग्रणी, उद्योग तेज़ी से आगे
- सेवाएँ वृद्धि का इंजन : विकास का प्रमुख प्रेरक तत्व सेवाएँ बनी हुई हैं:
- H1 FY26 में GVA वृद्धि 9.3%।
- पूरे वर्ष के लिए अनुमानित वृद्धि 9.1%।
- सेवाओं का कुल GVA में हिस्सा 56.4% हो गया है, जो आधुनिक, व्यापार योग्य और डिजिटल रूप से प्रदत्त सेवाओं द्वारा संचालित है।
- उद्योग एवं विनिर्माण उछाल:
- वैश्विक चुनौतियों के बावजूद औद्योगिक गतिविधि सुदृढ़ हुई।
- H1 FY26 में उद्योग GVA 7.0% बढ़ा।
- विनिर्माण GVA Q1 में 7.72% और Q2 में 9.13% तक पहुँचा।
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने ₹2 लाख करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित किया, ₹18.7 लाख करोड़ अतिरिक्त उत्पादन किया और 12.6 लाख रोजगार सृजित किए।
- सेवाएँ वृद्धि का इंजन : विकास का प्रमुख प्रेरक तत्व सेवाएँ बनी हुई हैं:
- राजकोषीय विकास: समेकन से विश्वसनीयता
- विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन ने स्थिरता को मज़बूत किया और 2025 में तीन संप्रभु क्रेडिट रेटिंग उन्नयन प्राप्त किए।
- प्रमुख प्रवृत्तियाँ:
- FY25 में केंद्र के राजस्व प्राप्तियाँ GDP का 9.2%।
- गैर-कारपोरेट कर संग्रह महामारी-पूर्व 2.4% से बढ़कर 3.3%।
- आयकर दाखिल करने वालों की संख्या FY22 के 6.9 करोड़ से FY25 में 9.2 करोड़।
- सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में तीव्रता से वृद्धि हुई:
- सार्वजनिक पूंजीगत व्यय GDP का 4% तक पहुँचा।
- राज्यों को लक्षित सहायता द्वारा प्रोत्साहित किया गया।
- 2020 से भारत ने सामान्य सरकारी ऋण-से-GDP अनुपात में 7.1 प्रतिशत अंक की कमी की, जबकि उच्च निवेश स्तर बनाए रखा।
- प्रमुख प्रवृत्तियाँ:
- मौद्रिक प्रबंधन एवं वित्तीय मध्यस्थता
- बैंकिंग क्षेत्र की सुदृढ़ता:
- अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
- GNPA 2.2% और शुद्ध NPA 0.5% (सितंबर 2025)।
- दिसंबर 2025 तक ऋण वृद्धि 14.5% वार्षिक।
- वित्तीय समावेशन :
- प्रमुख योजनाओं ने वित्त तक पहुँच का विस्तार किया:
- PMJDY: 55.02 करोड़ खाते।
- PMMY: ₹36.18 लाख करोड़ वितरित, 55.45 करोड़ ऋण।
- स्टैंड-अप इंडिया एवं पीएम स्वनिधि ने उद्यमिता को सुदृढ़ किया।
- प्रमुख योजनाओं ने वित्त तक पहुँच का विस्तार किया:
- पूँजी बाज़ार एवं विनियमन :
- डिमैट खाते 21.6 करोड़ पार, जिनमें लगभग चौथाई महिलाएँ।
- म्यूचुअल फंड भागीदारी महानगरों से परे विस्तारित।
- IMF-वर्ल्ड बैंक FSAP (2025) ने भारत की सुदृढ़ वित्तीय प्रणाली की पुष्टि की।
- बैंकिंग क्षेत्र की सुदृढ़ता:
- बाह्य क्षेत्र: अस्थिर विश्व में लचीलापन
- वैश्विक माल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 1.8% और सेवाओं में 4.3%।
- FY25 में कुल निर्यात USD 825.3 अरब का रिकॉर्ड।
- चालू खाते का घाटा FY26 Q2 में GDP का 1.3%।
- प्रेषण USD 135.4 अरब, विश्व में सर्वाधिक।
- विदेशी मुद्रा भंडार USD 701.4 अरब (~11 माह आयात)।
- भारत डिजिटल ग्रीनफील्ड परियोजनाओं का सबसे बड़ा गंतव्य बना।
- मुद्रास्फीति
- भारत ने CPI मुद्रास्फीति का अब तक का न्यूनतम स्तर दर्ज किया—औसत 1.7% (अप्रैल–दिसंबर 2025)।
- खाद्य एवं ईंधन कीमतों में गिरावट तथा आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन ने इसे संभव बनाया।
- उभरती अर्थव्यवस्थाओं में 2025 के दौरान भारत में मुद्रास्फीति में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई।
- भारत ने CPI मुद्रास्फीति का अब तक का न्यूनतम स्तर दर्ज किया—औसत 1.7% (अप्रैल–दिसंबर 2025)।
- कृषि एवं खाद्य प्रबंधन
- खाद्यान्न उत्पादन AY 2024-25 में 357.7 मिलियन टन।
- बागवानी उत्पादन 362.08 MT, कृषि GVA का 33%।
- e-NAM का विस्तार 1.79 करोड़ किसानों तक।
- MSP, PM-KISAN (₹4.09 लाख करोड़ वितरित) एवं PMKMY पेंशन द्वारा आय समर्थन।
- उद्योग एवं विनिर्माण
- उद्योग GVA H1 FY26 में 7.0% बढ़ा, जबकि विनिर्माण Q2 में 9.13% तक तीव्र हुआ।
- PLI योजनाओं ने ₹2 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित किया और 12.6 लाख रोजगार सृजित किए।
- भारत की वैश्विक नवाचार सूचकांक में रैंक 2025 में सुधरकर 38वीं हुई।
- सेमीकंडक्टर मिशन ने ₹1.6 लाख करोड़ मूल्य की परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की।
- मानव पूँजी: शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल
- शिक्षा: 24.69 करोड़ विद्यार्थी, 14.71 लाख विद्यालय; उच्च शिक्षा संस्थान 70,018।
- NEP सुधारों ने लचीला अधिगम, क्रेडिट पोर्टेबिलिटी और कौशल एकीकरण सक्षम किया।
- स्वास्थ्य: 1990 से MMR में 86% कमी; IMR 25 (2023); पाँच वर्ष से कम आयु मृत्यु दर में 78% कमी।
- रोजगार एवं कौशल: Q2 FY26 में 56.2 करोड़ लोग कार्यरत;
- संगठित विनिर्माण में FY24 में 10 लाख रोजगार;
- ई-श्रम में 31 करोड़ पंजीकरण (54% महिलाएँ)।
- सामाजिक सेवाओं पर व्यय GDP का 7.9% (FY26 BE)।
- ग्रामीण विकास एवं सामाजिक प्रगति
- संशोधित वैश्विक मानकों के अनुसार गरीबी स्तर में उल्लेखनीय कमी।
- सामाजिक सेवाओं पर व्यय GDP का 7.9%।
- ग्रामीण संपत्ति स्वामित्व, डिजिटल मैपिंग और महिला-नेतृत्व वाली पहलों ने आर्थिक भागीदारी को सुदृढ़ किया।
- उभरते क्षेत्र: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शहरीकरण एवं रणनीतिक लचीलापन
- भारत का AI पारिस्थितिकी तंत्र व्यावहारिक, कम लागत और स्थानीय समाधानों पर आधारित है, जिससे कृषि, स्वास्थ्य एवं शासन जैसे क्षेत्रों में अपनाने की सुविधा मिली।
- शहरी संपर्क परियोजनाएँ श्रम बाज़ारों को पुनः आकार दे रही हैं और महानगरीय दबाव को कम कर रही हैं।
- रणनीतिक रूप से, भारत संकीर्ण आयात प्रतिस्थापन से आगे बढ़कर रणनीतिक लचीलापन एवं वैश्विक अनिवार्यता की ओर अग्रसर है, और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहराई से समाहित हो रहा है।
आगे की दिशा: रणनीतिक लचीलापन और वैश्विक अनिवार्यता
- भारत की विकास रणनीति आयात प्रतिस्थापन से आगे बढ़कर रणनीतिक लचीलापन और वैश्विक अनिवार्यता की ओर विकसित हो रही है।
- अनुशासित स्वदेशीकरण ढाँचा, कम इनपुट लागत, वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रसार, और एकीकृत शहरीकरण मॉडल भारत को इस स्थिति में ला रहे हैं कि वह ‘भारतीय वस्तुएँ खरीदना(buying Indian)’ से ‘बिना सोचे भारतीय वस्तुएँ खरीदना(buying Indian without thinking)’ की ओर अग्रसर हो सके।
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संक्षिप्त समाचार 29-01-2026