भारत की उभरती कॉन्सर्ट अर्थव्यवस्था

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने देश में “कॉन्सर्ट अर्थव्यवस्था” के विस्तार को सुगम बनाने, रोजगार एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक लाइव इवेंट्स डेवलपमेंट सेल (LEDC) की स्थापना की है।

लाइव इवेंट्स डेवलपमेंट सेल (LEDC) क्या है?

  • LEDC का गठन जुलाई 2025 में सूचना और प्रसारण मंत्री के निर्देश पर किया गया।
  • यह एक सिंगल-विंडो सुविधा तंत्र के रूप में कार्य करता है, जो लाइव इवेंट्स उद्योग द्वारा सामना की जाने वाली नियामक, लॉजिस्टिक और समन्वय संबंधी चुनौतियों का समाधान करता है।
  • इस सेल में केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग संघों, संगीत अधिकार संस्थाओं एवं प्रमुख लाइव इवेंट कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
  • इसका उद्देश्य भारत भर में बड़े पैमाने पर कॉन्सर्ट, त्योहार, खेल आयोजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।

भारत का लाइव इवेंट्स बाजार विकास

  • संगठित लाइव इवेंट्स बाजार का मूल्य 2024 में ₹20,861 करोड़ था।
  • इस क्षेत्र ने 15% की वृद्धि दर दर्ज की, जो कई पारंपरिक मीडिया खंडों से तेज है।
  • थिएटर आयोजनों में उपस्थिति 45% बढ़ी, जो विविध सांस्कृतिक अनुभवों के प्रति जनता की नई भागीदारी को दर्शाती है।
  • महानगरों से परे विस्तार
    • टियर 2 और टियर 3 शहर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं मनोरंजन केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
    • पूर्वोत्तर शहरों में लाइव मनोरंजन की उपस्थिति में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है, जिनमें शिलांग (213%), गुवाहाटी (188%) एवं कोकराझार (143%) शामिल हैं।
    • विशाखापत्तनम ने सबसे अधिक 490% वृद्धि दर्ज की, इसके बाद वडोदरा (230%) रहा।

उभरती कॉन्सर्ट अर्थव्यवस्था का महत्व

  • रोजगार सृजन: एक बड़ा लाइव इवेंट 15,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित करता है, जिसमें कलाकार, तकनीशियन, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा, आतिथ्य और स्थानीय विक्रेता शामिल होते हैं।
  • पर्यटन को बढ़ावा: लाइव इवेंट्स घरेलू पर्यटन को तीव्रता से बढ़ा रहे हैं, जहाँ दर्शक कॉन्सर्ट, थिएटर और खेल आयोजनों में भाग लेने के लिए शहरों के बीच यात्रा करते हैं।
  • शहर ब्रांडिंग और शहरी अर्थव्यवस्था: बड़े कॉन्सर्ट शहरों को सांस्कृतिक और मनोरंजन गंतव्य के रूप में ब्रांड करने में सहायता करते हैं, जिससे अनुभव-आधारित अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलता है तथा भारतीय शहरों की सांस्कृतिक पहचान एवं वैश्विक दृश्यता बढ़ती है।
  • सांस्कृतिक कूटनीति: अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट और त्योहार भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को बढ़ाते हैं, जिससे देश को एक जीवंत, युवा-उन्मुख और सांस्कृतिक रूप से विविध वैश्विक गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

चुनौतियाँ

  • बुनियादी ढाँचे की कमी: कई शहरों में विश्वस्तरीय कॉन्सर्ट स्थल, पर्याप्त ध्वनिकी, भीड़ क्षमता योजना, पार्किंग सुविधाएँ और अंतिम-मील कनेक्टिविटी की कमी है, जिससे आयोजनों का पैमाना एवं आवृत्ति सीमित होती है।
  • सुरक्षा चिंताएँ: भीड़ सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया, अग्नि सुरक्षा और चिकित्सा तैयारी सुनिश्चित करना चुनौती बना हुआ है, विशेषकर बड़े आयोजनों में जहाँ अत्यधिक भीड़ होती है।
  • पर्यावरणीय स्थिरता: बड़े पैमाने पर लाइव इवेंट्स उच्च अपशिष्ट, ऊर्जा उपयोग और कार्बन उत्सर्जन उत्पन्न करते हैं, जबकि मानकीकृत हरित प्रथाओं को सीमित रूप से अपनाया गया है।

आगे की राह

  • इवेंट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल: भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया, बीमा कवरेज और सुरक्षा ऑडिट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत दिशानिर्देश लागू करना, ताकि जनता का विश्वास बढ़े।
  • कौशल विकास: इवेंट मैनेजमेंट, साउंड और लाइट इंजीनियरिंग तथा लाइव प्रोडक्शन कौशल को स्किल इंडिया और NSDC कार्यक्रमों में शामिल करना, ताकि एक पेशेवर कार्यबल तैयार हो सके।
  • संतुलित शहरी योजना: शहरों के अंदर निर्दिष्ट इवेंट ज़ोन की पहचान करना, जहाँ उचित शोर, यातायात और सुरक्षा योजना हो, ताकि सामाजिक टकराव को न्यूनतम किया जा सके।

स्रोत: TH

 

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