15वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन (2025)

पाठ्यक्रम: GS2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध

समाचार में 

  • 15वें भारत–जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन (2025) में दोनों देशों ने “आगामी  दशक के लिए संयुक्त दृष्टिकोण” को अपनाया, जिसमें आर्थिक, सुरक्षा, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े कई समझौते शामिल हैं।
    • जापान ने आगामी 10 वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन (₹5.5 लाख करोड़) के निवेश का लक्ष्य भी घोषित किया।

शिखर सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्ष 

  • आगामी दशक के लिए संयुक्त दृष्टिकोण: आठ स्तंभों पर आधारित रूपरेखा: आर्थिक साझेदारी, आर्थिक सुरक्षा, गतिशीलता, नवाचार, रक्षा, पर्यावरण, बहुपक्षीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान। 
  • सुरक्षा और रक्षा सहयोग: सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा को अपनाया गया, जिससे रणनीतिक संबंधों को मजबूती मिली।
    • आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक और खनिजों की सुरक्षा के लिए आर्थिक सुरक्षा पहल शुरू की गई। 
    • रक्षा अभ्यासों का विस्तार: धर्म गार्जियन (सेना), शिन्यु मैत्री (वायु सेना), जिमेक्स (नौसेना)। 
    • अधिग्रहण और पारस्परिक सेवा समझौते (ACSA) के तहत लॉजिस्टिक सहयोग को सुदृढ़ किया गया।
  • गतिशीलता और मानव संसाधन आदान-प्रदान: मानव संसाधन आदान-प्रदान के लिए कार्य योजना से 5 वर्षों में 5 लाख लोगों की द्विपक्षीय गतिशीलता संभव होगी।
    • आगामी पीढ़ी की गतिशीलता साझेदारी के अंतर्गत जापान में 50,000 भारतीय श्रमिकों की नियुक्ति का लक्ष्य।
  • प्रौद्योगिकी और डिजिटल सहयोग: भारत-जापान डिजिटल साझेदारी 2.0 की शुरुआत, जिसमें AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा शामिल हैं।
    • भारत-जापान AI पहल के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान और विकास से तकनीकी नवाचार को बढ़ावा।
  • स्थिरता और पर्यावरण: संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (JCM) के तहत सहयोग—निम्न-कार्बन तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की दिशा में।
    • सतत ईंधन पहल स्वच्छ हाइड्रोजन और अमोनिया को बढ़ावा देती है।
    • अपशिष्ट जल प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग।
  • अंतरिक्ष और खनिज: संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन में ISRO और JAXA की भागीदारी।
    •  महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर।
  • सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंध: कार्यक्रमों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन और शिक्षा को बढ़ावा।
    • नगर–प्रान्त स्तर की साझेदारियाँ उप-राष्ट्रीय संबंधों को गहरा करती हैं।

भारत–जापान संबंधों का महत्व 

  • रणनीतिक संगम: यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आक्रामकता की साझा चिंताओं को संबोधित करती है, और फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP) रणनीति के अनुरूप है। 
  • आर्थिक संबंध: जापान भारत में पाँचवां सबसे बड़ा निवेशक है और दिल्ली–मुंबई औद्योगिक गलियारा तथा बुलेट ट्रेन जैसे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में प्रमुख भागीदार है।
    • इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस पार्टनरशिप से लचीली आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण होता है। 
  • वैश्विक शासन: दोनों देश UNSC सुधार का समर्थन करते हैं, Quad और G20 के सदस्य हैं, और पुनर्गठित बहुपक्षवाद का समर्थन करते हैं। 
  • रक्षा सहयोग: नियमित संयुक्त अभ्यासों से इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ती है, जिससे भारत की इंडो-पैसिफिक भूमिका सुदृढ़ होती है।

आगे की राह

  • समुद्री तकनीक के सह-विकास के साथ रक्षा संबंधों का विस्तार।
  • CEPA को उन्नत कर द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना।
  • हाइड्रोजन, अमोनिया और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को बढ़ाना।
  • भारत के कार्यबल को जापान की जनसांख्यिकीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास से जोड़ना।
  • लचीली आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल अवसंरचना और ग्लोबल साउथ में जलवायु नेतृत्व को बढ़ावा देना। 
  • यह शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय स्थिरता, साझा आर्थिक विकास और सतत प्रगति के लिए भारत-जापान सहयोग को तेज करता है।
भारत–जापान संबंधों पर संक्षिप्त जानकारी 
संबंधों की स्थापना: द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात भारत ने जापान के साथ अलग शांति संधि पर हस्ताक्षर किए, जो 1952 में हुई और औपचारिक राजनयिक संबंधों की शुरुआत हुई। 
द्विपक्षीय संबंधों में वृद्धि: भारत-जापान संबंधों को 2000 में वैश्विक साझेदारी, 2006 में रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी, और 2014 में 2014 में विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का दर्जा मिला। 
रणनीतिक समन्वय: भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) जापान की FOIP नीति के साथ घनिष्ठ रूप से सामंजस्यशील है।
वैश्विक पहलों में सहयोग: भारत एवं जापान इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI), और इंडस्ट्री ट्रांजिशन के लिए लीडरशिप ग्रुप (LeadIT) जैसी पहलों में सहयोग करते हैं। 
– दोनों देश जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत-अमेरिका Quad और भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पहल (SCRI) जैसे बहुपक्षीय ढाँचों में साथ कार्य करते हैं।
रक्षा और सुरक्षा:
1. सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा (2008)
2. रक्षा सहयोग और आदान-प्रदान MoU (2014)
3. सूचना संरक्षण समझौता (2015)
4. आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान का समझौता (2020)
5. UNICORN नौसेना मस्तूल का सह-विकास (2024) 
अभ्यास: मालाबार (अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ), मिलन (बहुपक्षीय नौसेना), जिमेक्स (द्विपक्षीय समुद्री), धर्म गार्जियन (सेना), और तटरक्षक सहयोग नियमित रूप से आयोजित होते हैं।
  1. 2024-25 में भारत और जापान के सेवा प्रमुखों की भागीदारी से इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूती मिली।
द्विपक्षीय व्यापार: 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार $22.8 बिलियन तक पहुंचा। जापान से आयात भारत के निर्यात से अधिक हैं। 
भारत के प्रमुख निर्यात: रसायन, वाहन, एल्युमिनियम, और समुद्री खाद्य; प्रमुख आयात: मशीनरी, स्टील, तांबा, एवं रिएक्टर।
निवेश: जापान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का पाँचवां सबसे बड़ा स्रोत है, 2024 तक $43.2 बिलियन का संचयी निवेश। 
जापान निरंतर भारत को दीर्घकालिक निवेश के लिए सबसे आशाजनक गंतव्य मानता है।
अंतरिक्ष सहयोग: ISRO और JAXA एक्स-रे खगोलशास्त्र, उपग्रह नेविगेशन, चंद्र अन्वेषण और एशिया पैसिफिक रीजनल स्पेस एजेंसी फोरम (APRSAF) में सहयोग करते हैं। 2016 में शांतिपूर्ण अंतरिक्ष अन्वेषण और उपयोग के लिए सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए गए।
उभरते फोकस क्षेत्र: डिजिटल सहयोग (सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप), स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, और कौशल विकास।
– विकास और अवसंरचना सहयोग: जापान 1958 से भारत का सबसे बड़ा आधिकारिक विकास सहायता (ODA) दाता रहा है, जो महत्वपूर्ण अवसंरचना और मानव विकास परियोजनाओं का समर्थन करता है। 2023-24 में ODA वितरण लगभग JPY 580 बिलियन ($4.5 बिलियन) रहा। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रमुख परियोजना है जो उन्नत तकनीक हस्तांतरण और कौशल विकास का प्रतीक है।
1. पर्यटन: वर्ष 2023-24 को पर्यटन आदान-प्रदान वर्ष के रूप में मनाया गया, जिसका विषय था “हिमालय को माउंट फ़ूजी से जोड़ना”।
2. प्रवासी: जापान में लगभग 54,000 भारतीय रहते हैं, जिनमें मुख्यतः आईटी पेशेवर और इंजीनियर हैं।

Source: DD News

 

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