संशोधित ग्रीन इंडिया मिशन योजना

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण 

संदर्भ

  •  केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 2021–2030 की अवधि के लिए संशोधित ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) दस्तावेज़ जारी किया।

राष्ट्रीय ग्रीन इंडिया मिशन (Green India Mission – GIM) 

  • ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) की शुरुआत 2014 में भारत की राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के अंतर्गत आठ प्रमुख मिशनों में से एक के रूप में की गई थी।
    • इस मिशन का उद्देश्य भारत में वन और वृक्षों की आच्छादन को संरक्षित करना, पुनःस्थापित करना और बढ़ाना है, साथ ही अनुकूलन (Adaptation) और शमन (Mitigation) रणनीतियों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान करना भी है। 
    • ग्रीन इंडिया मिशन को 2021 से 2030 तक की 10-वर्षीय अवधि में लागू किया जा रहा है। 
    • वनरोपण संबंधी कुछ गतिविधियाँ पहले ही पूरी की जा चुकी हैं। 
    • यदि प्रतिवर्ष दो मिलियन हेक्टेयर से अधिक वृक्षारोपण की वर्तमान प्रवृत्ति जारी रहती है, तो 2025 से 2030 के बीच और 12 मिलियन हेक्टेयर भूमि को हरित किया जा सकता है।
  • प्रमुख उद्देश्य और लक्ष्य: मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य पांच मिलियन हेक्टेयर वन और गैर-वन भूमि पर वन और वृक्ष आवरण को बढ़ाना है।
    •  साथ ही, यह मिशन अतिरिक्त पांच मिलियन हेक्टेयर भूमि पर वन कवर की गुणवत्ता में सुधार का भी लक्ष्य रखता है। 
    • यह मिशन भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं में योगदान देता है, जिसका उद्देश्य पेरिस समझौते के अंतर्गत भारत की निर्धारित राष्ट्रीय योगदान (NDCs) के हिस्से के रूप में 2.5 से 3 बिलियन टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना है।

संशोधित अनुमान और क्षेत्रीय आवश्यकता: 

  • भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के अनुसार, यदि सभी नियोजित पुनर्स्थापन गतिविधियों को कार्यान्वित किया जाए, तो भारत 3.39 बिलियन टन CO₂ समतुल्य का कार्बन सिंक प्राप्त कर सकता है। 
  • इस लक्ष्य को पाने के लिए, मिशन को अनुमानित 24.7 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर वन और वृक्ष कवर बढ़ाना होगा।
  • संवेदनशील क्षेत्रों में सूक्ष्म-इकोसिस्टम आधारित दृष्टिकोण: मिशन पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील परिदृश्यों में पुनर्स्थापन के लिए ‘माइक्रो-इकोसिस्टम’ दृष्टिकोण अपनाने का प्रस्ताव करता है।
    •  इन परिदृश्यों में अरावली, पश्चिमी घाट, उत्तर-पश्चिम भारत के शुष्क क्षेत्र, मैंग्रोव और भारतीय हिमालय क्षेत्र सम्मिलित हैं। 
    • इस दृष्टिकोण में प्रत्येक क्षेत्र की पारिस्थितिकी आवश्यकताओं के अनुसार विशिष्ट पुनर्स्थापन पद्धतियों को अपनाया जाएगा।
  • प्रमुख कार्यान्वयन रणनीतियाँ: पुनर्स्थापन कार्य खुले वनों की बहाली, कृषि वानिकी और अपक्षयित भूमि पर वृक्षारोपण के माध्यम से किया जाएगा।
    • इसके अतिरिक्त, परती भूमि, रेलवे पटरियों के किनारे और राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ भी वृक्षारोपण किया जाएगा ताकि हरित आवरण बढ़ाया जा सके।
    •  FSI ने यह पहचान की है कि बीते 15–20 वर्षों में जो वन क्षरण का शिकार हुए हैं, उन्हें पुनर्स्थापित करके सबसे अधिक कार्बन सिंक क्षमता प्राप्त की जा सकती है।

मिशन संचालन ढांचा 

  • मिशन की राष्ट्रीय संचालन परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री करेंगे। 
  • राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की अध्यक्षता पर्यावरण मंत्रालय के सचिव करेंगे। 
  • निदेशालय को विशेषज्ञों और सचिवालय कर्मियों की एक टीम का सहयोग प्राप्त होगा।

अब तक की प्रगति

  • मिशन के अंतर्गत क्षेत्रीय स्तर की पहल वर्ष 2015–16 में शुरू हुई थीं। 
  • 2020–21 तक कुल 11.22 मिलियन हेक्टेयर भूमि को विभिन्न वृक्षारोपण और पुनर्स्थापन गतिविधियों के अंतर्गत लाया जा चुका है।

Source: IE

 

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