केरल उच्च न्यायालय ने पहाड़ी क्षेत्रों में एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया

पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण

संदर्भ

  • केरल उच्च न्यायालय ने पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया है और शादियों व सरकारी कार्यक्रमों जैसे बड़े आयोजनों में प्लास्टिक बोतलों के उपयोग को नियंत्रित किया है।
    • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध 60 GSM (ग्राम प्रति वर्ग मीटर) या उससे अधिक मोटाई वाले नॉन-वोवन पॉलीप्रोपाइलीन बैग्स पर लागू नहीं होगा।

प्लास्टिक अपशिष्ट का प्रभाव 

  • जलवायु और जैव विविधता संबंध: पहाड़ी क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट से मृदा और जल प्रदूषित होते हैं, जिससे जैव विविधता और स्थानीय खाद्य प्रणालियाँ प्रभावित होती हैं। 
  • पर्यावरणीय संवेदनशीलता: पर्वतीय क्षेत्र पारिस्थितिकी रूप से नाज़ुक होते हैं और उन्हें प्रदूषण एवं क्षरण से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
  •  सार्वजनिक स्वास्थ्य: एकत्रित प्लास्टिक अपशिष्ट से मच्छरों का प्रजनन होता है, जल प्रदूषण होता है और पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता प्रभावित होती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ

  • स्थानीय अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना की कमी: अधिकांश पर्वतीय कस्बों और गाँवों में अपशिष्ट संग्रहण, पृथक्करण और उपचार की मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
  • प्लास्टिक प्रतिबंध नीतियाँ: यद्यपि कई पर्यटन स्थलों पर कुछ प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध है, लेकिन निगरानी में असंगतता और स्थानीय समुदायों व विक्रेताओं के लिए व्यवहार्य विकल्पों की कमी के कारण प्रवर्तन कमजोर है।
  • जागरूकता की कमी: उत्पादकों में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के अंतर्गत अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता अपर्याप्त है। साथ ही, पर्यटकों में सतत प्रथाओं के प्रति शिक्षा और संवेदनशीलता की भी कमी है।
  • विखंडित बस्तियाँ: बीहड़ स्थलाकृति, बिखरी हुई जनसंख्या एवं मौसमी मौसम स्थितियों के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की स्थापना और रखरखाव में लॉजिस्टिक चुनौतियाँ आती हैं।

भारत के प्रयास — प्लास्टिक अपशिष्ट से निपटने में

  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR): भारत सरकार ने EPR को लागू किया है, जिसके अंतर्गत प्लास्टिक निर्माताओं को उनके उत्पादों से उत्पन्न अपशिष्ट के प्रबंधन और निपटान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022: यह 120 माइक्रॉन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग्स के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग को प्रतिबंधित करता है।
  • स्वच्छ भारत अभियान: यह एक राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान है, जिसमें प्लास्टिक अपशिष्ट का संग्रह और निपटान शामिल है।
  • प्लास्टिक पार्क: भारत ने ऐसे विशेष औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए हैं जहाँ प्लास्टिक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण और प्रसंस्करण किया जाता है।
  • न्यायिक सक्रियता: भारत का न्याय तंत्र अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) के अंतर्गत पर्यावरणीय क्षरण से संबंधित मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

आगे का राह

  • पर्वतीय क्षेत्रों के लिए संवेदनशील अपशिष्ट नीति: ऐसी नीतियाँ आवश्यक हैं जो भौगोलिक दूरी, पारंपरिक प्रथाओं और पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखें।
  • विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट प्रणाली: समुदाय-आधारित, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय शासन पर आधारित कम प्रभाव वाली अपशिष्ट समाधान रणनीतियों को प्राथमिकता देना चाहिए।
  • सतत पर्यटन प्रथाएँ: विशेषकर जल निकायों और तीर्थ स्थलों के आस-पास, पर्यटक स्थलों पर अनिवार्य अपशिष्ट ऑडिट और प्रबंधन प्रोटोकॉल की स्थापना करना आवश्यक है।

Source: TH

 

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