पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत और फ्रांस ने 38वें भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद के दौरान अपनी रणनीतिक साझेदारी को पुनः पुष्टि की, जिसकी सह-अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एवं फ्रांसीसी राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार ने की।
परिचय
- भारत और फ्रांस ने सुरक्षा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष एवं नागरिक परमाणु सहयोग के क्षेत्रों में चल रही द्विपक्षीय पहलों पर चर्चा की।
- ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना में संयुक्त विकास एवं सहयोग के अवसरों का अन्वेषण किया गया।
भारत-फ्रांस संबंधों की प्रमुख विशेषताएँ
- भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी: 26 जनवरी 1998 को शुरू हुई और यह भारत की प्रथम रणनीतिक साझेदारी है।
- मुख्य दृष्टि: रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाना और द्विपक्षीय सहयोग को बेहतर करना।
- प्रमुख रणनीतिक स्तंभ: रक्षा और सुरक्षा, नागरिक परमाणु सहयोग एवं अंतरिक्ष सहयोग।
- विस्तारित क्षेत्र: इंडो-पैसिफिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, डिजिटलीकरण, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, उन्नत प्रौद्योगिकियाँ और आतंकवाद-रोधी प्रयास।
- रक्षा सहयोग: वार्षिक रक्षा संवाद (मंत्री-स्तर) और उच्च रक्षा सहयोग समिति (HCDC) (सचिव-स्तर) के माध्यम से समीक्षा की जाती है।
- राफेल लड़ाकू विमान: भारत ने डसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल खरीदे।
- स्कॉर्पीन पनडुब्बियाँ (प्रोजेक्ट P-75): फ्रांस की नेवल ग्रुप के साथ सहयोग, भारत में 6 पनडुब्बियाँ निर्मित; नवीनतम है आईएनएस वाघशीर।
- लड़ाकू विमान इंजन विकास: एचएएल और फ्रांस की सफरान हेलीकॉप्टर इंजन्स ने आईएमआरएच कार्यक्रम के अंतर्गत इंजन सह-विकास के लिए समझौता किया।
- हाल ही में दोनों देशों ने भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद हेतु एक अंतर-सरकारी समझौते (IGA) को औपचारिक रूप से पूरा किया।
- भविष्य की योजनाएँ: आगामी पीढ़ी के लड़ाकू विमान इंजनों का सह-विकास।
- संयुक्त अभ्यास: शक्ति, वरुणा, FRINJEX-23।
- आर्थिक सहयोग: यूरोपीय संघ में, फ्रांस भारत का पाँचवाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, नीदरलैंड, बेल्जियम, इटली एवं जर्मनी के बाद।
- भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय व्यापार विगत दशक में दोगुना होकर 2023-24 में 15.11 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
- दोनों देश संयुक्त रूप से प्रौद्योगिकियों का विकास और वर्तमान प्रौद्योगिकियों का एकीकरण कर रहे हैं।
- फ्रांस में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को सक्षम करने की प्रक्रिया सफल रही है।
- फ्रांसीसी प्रौद्योगिकियाँ विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विनिर्माण और शहरी अवसंरचना विकास में भारत में एकीकृत की जा रही हैं।
- अंतरिक्ष सहयोग: इसरो और सीएनईएस (फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी) के बीच 60 वर्षों से अधिक का सहयोग है।
- फ्रांस घटकों, प्रक्षेपण सेवाओं (एरियनस्पेस) का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।
- संयुक्त मिशन: TRISHNA (उपग्रह मिशन), MDA सिस्टम, ग्राउंड स्टेशन समर्थन।
- ऊर्जा सहयोग:
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सह-स्थापित।
- परमाणु ऊर्जा सहयोग: 2025 में भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद के ढाँचे में परमाणु ऊर्जा पर विशेष कार्यबल की प्रथम बैठक आयोजित हुई।
- दोनों पक्षों ने निम्न और मध्यम शक्ति वाले मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) एवं उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टर (AMR) पर साझेदारी स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की।
- समुदाय: फ्रांस में अनुमानित 1,19,000 भारतीय समुदाय हैं, जो मुख्यतः पूर्व फ्रांसीसी उपनिवेशों से उत्पन्न हुए हैं।
चिंता के क्षेत्र
- व्यापार असंतुलन: द्विपक्षीय व्यापार क्षमता से कम है, विशेषकर भारत के अन्य ईयू देशों के साथ व्यापार की तुलना में।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रक्षा प्रतिबंध: यद्यपि फ्रांस ने भारत के रक्षा लक्ष्यों का समर्थन किया है, बड़े रक्षा उपकरणों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की गहराई पर चिंताएँ हैं।
- परमाणु दायित्व चिंताएँ: 2008 में नागरिक परमाणु समझौते और जैतापुर में रिएक्टरों की योजनाओं के बावजूद प्रगति धीमी रही है।
- नागरिक परमाणु क्षति अधिनियम (2010) फ्रांसीसी कंपनियों के लिए बाधाएँ उत्पन्न करता है क्योंकि यह परमाणु दुर्घटना की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं पर दायित्व लगाता है।
- भूराजनीतिक मतभेद: चीन के साथ फ्रांस के सुदृढ़ आर्थिक संबंध कभी-कभी इंडो-पैसिफिक मुद्दों पर भारत के साथ पूर्ण सामंजस्य को कमजोर कर सकते हैं।
- मध्य पूर्व पर दृष्टिकोण में अंतर: ईरान, इज़राइल–फिलिस्तीन पर दृष्टिकोण में कभी-कभी मतभेद।
भविष्य की दृष्टि
- होराइजन 2047 रोडमैप: भारत-फ्रांस साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ पर दोनों देशों ने 2047 तक द्विपक्षीय संबंधों की रूपरेखा तय करने के लिए रोडमैप अपनाने पर सहमति व्यक्त की।
- उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का संयुक्त विकास और उत्पादन।
- वैश्विक हित के लिए संयुक्त रूप से विकसित उत्पादों का तीसरे देशों को निर्यात।
- गहरी समुद्री और अंतरिक्ष सुरक्षा सहयोग।
- रणनीतिक संवाद और संयुक्त सैन्य उपस्थिति के माध्यम से इंडो-पैसिफिक में बढ़ती समानता।
निष्कर्ष
- भारत–फ्रांस रक्षा सहयोग उनकी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का आधार है।
- संप्रभुता, बहुपक्षवाद और क्षेत्रीय स्थिरता में साझा हितों के साथ, दोनों देश ‘होराइजन 2047’ दृष्टि के अंतर्गत संबंधों को और ऊँचाई पर ले जाने के लिए तैयार हैं — जिससे रक्षा संबंध अधिक सहयोगात्मक, नवोन्मेषी एवं निर्यात-उन्मुख बनेंगे।
स्रोत: DD
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