ऑनलाइन कौशल-आधारित गेमिंग

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

सन्दर्भ

  • ऑनलाइन कौशल-आधारित गेमिंग में प्रोग्रामिंग, डिजाइन और कहानी कहने की प्रतिभा का उपयोग करके भारत को वैश्विक स्तर पर तकनीकी लीडरबोर्ड के शीर्ष पर पहुँचाने की क्षमता है।

परिचय

  • भारत में 650 मिलियन स्मार्टफोन उपयोगकर्त्ता और युवा जनसंख्या है, इसलिए देश गेमिंग को तकनीकी नवाचार, रोजगार एवं आर्थिक विस्तार के चालक के रूप में उपयोग करने के लिए अद्वितीय स्थिति में है। 
  • हालाँकि, कठोर कराधान नीतियाँ, अस्पष्ट नियामक ढाँचे और पूर्वव्यापी कराधान की माँग से इस क्षेत्र के विकास में बाधा उत्पन्न होने का खतरा है।

ऑनलाइन कौशल-आधारित गेमिंग की संभावना

  • यह भारत के प्रमुख उभरते क्षेत्रों में से एक है। ऑनलाइन गेमिंग उद्योग ने तेजी से विकास किया है, जिसमें तीन भारतीय स्टार्टअप ने यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया है। PwC की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र:
    • 2023 में ₹33,000 करोड़ का था।
    • 2028 तक इसके दोगुना होकर ₹66,000 करोड़ होने की संभावना है, जो 14.5% की CAGR से बढ़ रहा है।
    • इससे उद्योग में 2 लाख वर्तमान रोजगारों के अतिरिक्त 2-3 लाख अतिरिक्त प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन हो सकती हैं।

भारत के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ऑनलाइन गेमिंग क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • प्रतिभा को बढ़ावा देना: यह क्षेत्र प्रोग्रामिंग, डिजाइन और कहानी कहने में कौशल का उपयोग करता है, जिससे एक बहु-विषयक नवाचार केंद्र बनता है।
  • निर्यात को बढ़ावा देना: भारत गेम डेवलपमेंट, एनीमेशन और AR/VR प्रौद्योगिकियों का वैश्विक निर्यातक बन सकता है।
  • स्टार्टअप और निवेश वृद्धि: गेमिंग इकोसिस्टम उद्यम पूँजी और अंतर्राष्ट्रीय निवेश को आकर्षित कर रहा है, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था एवं मजबूत हो रही है।

विकास में बाधा डाल रही नियामक चुनौतियाँ

  • अत्यधिक कराधान और पूर्वव्यापी GST माँग: केंद्र सरकार की ₹1.12 लाख करोड़ की पूर्वव्यापी GST माँग पर उच्चतम न्यायालय के 2025 के स्थगन आदेश ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अत्यधिक कराधान उद्योग के अस्तित्व को कैसे खतरे में डालता है।
    • ऑनलाइन गेमिंग पर 28% GST लगाया जाता है, जो जुआ, शराब और तम्बाकू के समान दर है।
    • छोटे स्टार्टअप इस तरह के कराधान का पालन करने के लिए संघर्ष करते हैं, जिससे दिवालिया होने और बंद होने का जोखिम रहता है।
  • जुए और सट्टेबाजी के साथ टकराव: कुछ राज्य सरकारों ने ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगा दिया, उन्हें जुआ के रूप में वर्गीकृत किया।
    • बाद में अदालतों ने इन प्रतिबंधों को पलट दिया, यह मानते हुए कि “कौशल के खेल” कानूनी हैं और जुए से अलग हैं।
    • हालाँकि, गेमिंग के बारे में गलत धारणाएँ बनी हुई हैं, जो नियामक स्पष्टता को प्रभावित करती हैं।
  • अवैध ऑफशोर गेमिंग साइट्स का जोखिम: अत्यधिक कराधान उपयोगकर्त्ताओं को अनियमित जुआ साइटों की ओर ले जा सकता है, जो भारतीय नियामक पहुँच से परे ऑफशोर संचालित होती हैं।
    • ऐसे प्लेटफ़ॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय जोखिम उत्पन्न करते हैं जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैध कर राजस्व से वंचित करते हैं।
  • सामाजिक चिंताएँ: परिवार एवं नियामक गेमिंग की लत और अत्यधिक स्क्रीन समय के बारे में चिंतित हैं।

संतुलित विनियामक दृष्टिकोण की आवश्यकता

  • करों को तर्कसंगत बनाना: ऑनलाइन गेमिंग पर जुआ, शराब और तम्बाकू के बराबर कर नहीं लगाया जाना चाहिए।
    • एक अलग कर संरचना प्रारंभ की जानी चाहिए, जिसमें गेमिंग को एक बुरी आदत के बजाय मनोरंजन और कौशल-आधारित उद्योग के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
  • एक पारदर्शी विनियामक ढाँचा विकसित करना: उद्योग के हितधारकों के सहयोग से एक राष्ट्रीय नीति ढाँचा तैयार किया जाना चाहिए।
  • नीतियों में निम्नलिखित बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए:
    • कौशल-आधारित गेमिंग बनाम जुआ भेद
    • उपभोक्ता सुरक्षा उपाय (आयु प्रतिबंध, स्व-बहिष्कार विकल्प)
    • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा विनियम
  • गेमिंग अनुसंधान और विकास में निवेश को प्रोत्साहित करना: सांस्कृतिक और शैक्षिक मूल्य वाले भारतीय मूल के गेम बनाने के लिए गेम डेवलपमेंट स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहन।
    • AR, VR एवं AI-आधारित गेमिंग में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए गेमिंग इनक्यूबेटर और अनुसंधान केंद्र स्थापित करें।
  • उपभोक्ता जागरूकता को मजबूत करना: गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म को समस्याग्रस्त व्यवहार की पहचान करने और जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा देने के लिए स्वयं को विनियमित करना चाहिए।

Source: TH

 

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