भद्रकाली अभिलेख
पाठ्यक्रम: GS1/संस्कृति
समाचारों में
- हाल ही में यह उजागर हुआ है कि प्रभास पाटन का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत अत्यंत समृद्ध है, जहाँ भद्रकाली अभिलेख, ताम्रपत्र एवं स्मारक शिलाएँ उसकी समृद्धि, पराक्रम तथा भक्ति को प्रदर्शित करती हैं।
भद्रकाली अभिलेख
- यह 1169 ईस्वी (वलभी संवत 850 और विक्रम संवत 1255) में उत्कीर्ण किया गया था और वर्तमान में राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।
- यह प्रभास पाटन में संग्रहालय के पास, भद्रकाली गली में प्राचीन राम मंदिर के बगल में स्थित है।
- प्रभास पाटन, जो ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर का स्थल है, प्राचीन सूर्य मंदिर में स्थित है।
- यह अभिलेख परम पशुपताचार्य श्रीमान भवबृहस्पति का स्तुतिपरक अभिलेख है, जो अनहिलवाड़ पाटन के महाराजाधिराज कुमारपाल के आध्यात्मिक गुरु थे।
विशेषताएँ
- यह सोमनाथ मंदिर के प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास को दर्ज करता है।
- इसमें चारों युगों में सोमनाथ महादेव के निर्माण का उल्लेख है।
- सत्ययुग में चंद्र (सोम) ने इसे स्वर्ण से बनाया।
- त्रेतायुग में रावण ने इसे रजत से बनाया।
- द्वापरयुग में श्रीकृष्ण ने इसे लकड़ी से बनाया।
- कलियुग में राजा भीमदेव सोलंकी ने कलात्मक पत्थर का मंदिर निर्मित किया।
- इतिहास पुष्टि करता है कि भीमदेव सोलंकी ने चौथा मंदिर पुराने अवशेषों पर बनाया, जिसके बाद 1169 ईस्वी में कुमारपाल ने उसी स्थल पर पाँचवाँ मंदिर निर्मित किया।
महत्व
- प्रभास पाटन सनातन धर्म के आध्यात्मिक गौरव का प्रतीक है।
- भद्रकाली अभिलेख सोलंकी शासकों और भवबृहस्पति जैसे विद्वानों की भक्ति को उजागर करता है। इसकी समृद्ध कलात्मक, स्थापत्य और साहित्यिक विरासत आज भी प्रेरणा देती है तथा यह पुष्टि करती है कि भक्ति एवं आत्मसम्मान शाश्वत हैं।
स्रोत: PIB
पैक्स सिलिका
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध, GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- अमेरिकी राजदूत ने घोषणा की कि भारत को अगले महीने पैक्स सिलिका में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
पैक्स सिलिका
- पैक्स सिलिका एक अमेरिका-नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों से सुरक्षित, समृद्ध और नवाचार-आधारित सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला बनाना है।
- प्रथम पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन दिसंबर 2025 में आयोजित हुआ था और इसके हस्ताक्षरकर्ताओं में ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ब्रिटेन, नीदरलैंड एवं यूएई शामिल हैं।
- ये देश वैश्विक एआई आपूर्ति श्रृंखला को शक्ति देने वाली सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों और निवेशकों का घर हैं।
- क़तर पैक्स सिलिका का नवीनतम हस्ताक्षरकर्ता बना।
- इसका उद्देश्य जबरन निर्भरताओं को कम करना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नींव रखने वाली सामग्रियों और क्षमताओं की रक्षा करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि सहयोगी राष्ट्र बड़े पैमाने पर परिवर्तनकारी तकनीकों का विकास एवं परिनियोजन कर सकें।
- देश वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला के रणनीतिक हिस्सों को सुरक्षित करने के लिए साझेदारी करेंगे, जिसमें सॉफ़्टवेयर अनुप्रयोग और प्लेटफ़ॉर्म भी शामिल हैं।
भारत के लिए महत्व
- पैक्स सिलिका में शामिल होना भारत को चीन से हटकर ऑस्ट्रेलिया जैसे सुरक्षित आपूर्तिकर्ताओं की ओर विविधता लाने में सहायता कर सकता है।
- यह जापान और नीदरलैंड के साथ साझेदारी के माध्यम से निवेश एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बना सकता है।
- यह भारत की क्षमता को दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के उन्नत निष्कर्षण और प्रसंस्करण में बढ़ा सकता है, विशेषकर इसके विशाल मोनाज़ाइट और थोरियम संसाधनों से।
स्रोत: DD
केंद्र द्वारा राष्ट्रीय खेल शासन नियम, 2026 अधिसूचित
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचारों में
- केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के अंतगर्त राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 अधिसूचित किए।
नियमों के उद्देश्य
- राष्ट्रीय खेल निकायों (NSBs) के कार्यों को पेशेवर और मानकीकृत करना।
- खेल प्रशासन में खिलाड़ियों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना।
नियमों के बारे में
- विशिष्ट योग्यता वाले खिलाड़ियों (SOMs) का समावेश: प्रत्येक राष्ट्रीय खेल निकाय की सामान्य सभा में न्यूनतम 4 SOMs शामिल किए जाने चाहिए।
- लैंगिक प्रतिनिधित्व: SOMs में से 50% महिला खिलाड़ी होना अनिवार्य है।
- SOM पात्रता स्तर: 10 स्तर निर्धारित किए गए हैं, जिनमें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, पैरालंपिक या शीतकालीन ओलंपिक में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों से लेकर राष्ट्रीय खेलों या राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ी शामिल हैं।
- अयोग्यता मानदंड: दोषसिद्ध व्यक्तियों को, जिन्हें कारावास का सामना करना पड़ रहा है, सामान्य सभा सदस्यता, कार्यकारी समिति चुनाव या एथलीट समिति से बाहर रखा जाएगा।
- शासन ढाँचा: राष्ट्रीय खेल बोर्ड मान्यता, संबद्ध पंजीकरण और शासन या निधि के दुरुपयोग की जाँच की देखरेख करेगा।
- चुनाव ढाँचा: राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल में न्यूनतम 20 सदस्य होने चाहिए, जो राष्ट्रीय खेल निकायों के चुनावों की निगरानी करेंगे।
स्रोत: TH
यूरोपीय संघ देशों द्वारा मर्कोसुर समझौते को स्वीकृति
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR)
समाचारों में
- यूरोपीय संघ द्वारा दक्षिण अमेरिकी मर्कोसुर ब्लॉक के साथ लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को स्वीकृति प्रदान की है, जबकि फ्रांस के नेतृत्व में कड़ा विरोध और पूरे यूरोप में किसानों की चिंताएँ बनी हुई हैं।
मर्कोसुर क्या है?
- मर्कोसुर एक दक्षिण अमेरिकी व्यापार ब्लॉक है, जिसकी स्थापना 1991 में हुई थी। इसका सबसे बड़ा सदस्य ब्राज़ील है, साथ ही अर्जेंटीना, पराग्वे और उरुग्वे इसके सदस्य हैं। बोलिविया इसका नवीनतम पूर्ण सदस्य है। इसका उद्देश्य मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण है।
- वेनेज़ुएला, जो कभी सदस्य था, को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया है।
ईयू–मर्कोसुर मुक्त व्यापार समझौता
- यह ईयू का अब तक का सबसे बड़ा समझौता है, जिसमें शुल्क कटौती की दृष्टि से €4 बिलियन से अधिक की ड्यूटी समाप्त की गई है।
- दोनों ब्लॉकों के बीच व्यापार €111 बिलियन का है। ईयू मशीनरी, रसायन और परिवहन उपकरण निर्यात करता है, जबकि आयात मुख्यतः कृषि उत्पाद एवं खनिजों का होता है।
- समझौते के अंतर्गत, मर्कोसुर 15 वर्षों में ईयू के 91% निर्यात पर शुल्क समाप्त करेगा, जबकि ईयू 10 वर्षों में मर्कोसुर के 92% निर्यात पर शुल्क समाप्त करेगा।
- दोनों पक्ष संवेदनशील कृषि उत्पादों पर कोटा बनाए रखेंगे। ईयू बीफ़ आयात कोटा बढ़ाएगा और मर्कोसुर शुल्क-मुक्त चीज़ आयात की अनुमति देगा।
- समझौता लगभग 350 ईयू खाद्य और पेय उत्पादों को भौगोलिक संकेतों (GI) के माध्यम से संरक्षित करता है।
- कृषि संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए ईयू ने सुरक्षा उपाय, संकट कोष, किसान सहायता योजनाएँ, उर्वरक शुल्क में कमी एवं सख्त आयात नियंत्रण लागू किए हैं।
आलोचनाएँ
- ईयू–मर्कोसुर व्यापार समझौते का विरोध मुख्यतः कृषि और पर्यावरण संबंधी चिंताओं से आता है।
- फ्रांस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, हंगरी और आयरलैंड जैसे देशों को भय है कि सस्ते दक्षिण अमेरिकी कृषि उत्पाद — विशेषकर बीफ़ — यूरोपीय किसानों को हानि पहुँचाएँगे और उनके बाजार हिस्से को कम करेंगे।
- उनका तर्क है कि आयात ईयू के सख्त पर्यावरण मानकों को पूरा नहीं कर सकते और चेतावनी देते हैं कि इस समझौते में वनों की कटाई एवं जैव विविधता हानि के विरुद्ध लागू करने योग्य सुरक्षा उपायों की कमी है, विशेषकर अमेज़न जैसे क्षेत्रों में।
- यह यूरोपीय किसानों को हानि पहुँचा सकता है क्योंकि इससे दक्षिण अमेरिका से सस्ते कृषि आयात की अनुमति मिलेगी।
स्रोत: TH
DRDO द्वारा तीसरी पीढ़ी की MPATGM का सफल उड़ान-परीक्षण किया
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने तीसरी पीढ़ी की फायर-एंड-फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल उड़ान-परीक्षण किया है, जिसमें चलते हुए लक्ष्य पर टॉप अटैक क्षमता है।
परिचय
- यह फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है।
- ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ प्रकार की मिसाइल वह हथियार प्रणाली है जो प्रक्षेपण से पहले लक्ष्य पर लॉक हो जाती है और दागे जाने के बाद ऑपरेटर से आगे कोई मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती।
- इसमें अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकें शामिल हैं, जैसे इमेजिंग इन्फ्रारेड होमिंग सीकर, टैंडम वारहेड, ऑल-इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्ट्यूएशन सिस्टम, फायर कंट्रोल सिस्टम, प्रणोदन प्रणाली और उच्च-प्रदर्शन दृष्टि प्रणाली।
- यह मिसाइल दिन और रात दोनों समय युद्ध संचालन में सक्षम है तथा आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों को प्रभावी ढंग से पराजित कर सकती है।
- इसे ट्राइपॉड से तथा सैन्य वाहन लांचर से भी दागा जा सकता है।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 13-01-2026