पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुँचे और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
प्रमुख बिंदु
- व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई, जिसमें आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के क्रियान्वयन को शामिल किया गया।
- वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने और नागरिक परमाणु सहयोग से संबंधित परियोजनाओं पर चर्चा हुई।
- प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा रचित शास्त्रीय तमिल काव्य-संग्रह तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद उपहार में दिया।
- महत्वपूर्ण खनिज एक अन्य रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में उभर रहे हैं। दोनों पक्ष अन्वेषण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ देख रहे हैं।
- नागरिक परमाणु सहयोग: चर्चाओं में परमाणु ईंधन चक्र सहयोग और भारत में मौजूदा रूसी डिजाइन वाले रिएक्टरों के जीवन-चक्र समर्थन को भी शामिल किया गया, साथ ही दूसरे रूसी डिजाइन वाले रिएक्टर स्थल पर वार्ता को जारी रखा गया।
भारत-रूस संबंधों का संक्षिप्त विवरण
स्थापना और समयरेखा
- वर्ष 1947: भारत और सोवियत संघ ने राजनयिक संबंध स्थापित किए, जो अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता से कुछ महीने पहले हुआ था।
- शीत युद्ध काल (1947-1991): सोवियत संघ भारत के लिए एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभरा, विशेष रूप से पश्चिमी देशों की शत्रुता के समय।
- दोनों देशों ने शांति, मैत्री और सहयोग की संधि (1971) पर हस्ताक्षर किए, जिसने रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी।
- वर्ष 1991: सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत ने रूसी संघ को मान्यता दी।
- वर्ष 1993: मैत्री और सहयोग की संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
- वर्ष 2000: रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की गई।
- बहुआयामी सहयोग रूपरेखा: भारत और रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी (2010) से जुड़े हुए हैं।
- वर्षों के दौरान यह साझेदारी पारंपरिक सैन्य संबंधों से कहीं आगे बढ़कर आर्थिक, ऊर्जा, अंतरिक्ष और शैक्षिक सहयोग को भी शामिल कर चुकी है।
- द्विपक्षीय व्यापार: नेताओं ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के वर्तमान 68.7 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2025-26 के 59.863 अरब डॉलर से अधिक है।
- दोनों पक्ष यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए तंत्र स्थापित किए हैं।
- रक्षा और सैन्य सहयोग: रक्षा सहयोग साझेदारी का प्राथमिक स्तंभ बना हुआ है। यह पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर भारत की मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान, विकास और सह-उत्पादन की दिशा में संरचनात्मक रूप से परिवर्तित हुआ है।
- रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और भारत-रूस अंतर-सरकारी सैन्य-तकनीकी सहयोग आयोग (IRIGC-MTC) खरीद, रखरखाव और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों का समन्वय जारी रखता है।
- परमाणु सहयोग: रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम ने 2025 में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के तीसरे रिएक्टर के लिए परमाणु ईंधन की पहली खेप पहुँचाई, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
- रूस कुडनकुलम में छह रिएक्टरों का निर्माण कर रहा है, जिनमें से दो पहले से ही परिचालन में हैं।
- भविष्य की चर्चाओं में लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों और तैरते हुए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को शामिल किया गया है।
- ऊर्जा साझेदारी: 2023-24 में रूस भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, जिसका प्रमुख कारण रियायती दरों पर होने वाला तेल आयात था, जो भारत की कच्चे तेल की कुल आयात टोकरी का 35% से अधिक था।
- भुगतान तंत्र में नवाचार: दोनों देशों ने वाणिज्यिक लेन-देन के 96% को राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपये और रूबल) में स्थानांतरित कर दिया है और पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए डॉलर-आधारित निपटान से दूर हुए हैं।
- राजनीतिक समर्थन और बहुपक्षीय मंच: रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का लगातार समर्थन करता है।
- दोनों देश बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स, एससीओ और जी20 में समन्वय करते हैं।
चुनौतियाँ
- रूस–यूक्रेन संघर्ष: लंबे समय से जारी युद्ध ने रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी और अमेरिका तथा यूरोपीय देशों के साथ उसके बढ़ते संबंधों के बीच राजनयिक संतुलन को जटिल बना दिया है।
- रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध: अमेरिका और यूरोपीय प्रतिबंध भुगतान, बैंकिंग, रसद, बीमा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में कठिनाइयाँ पैदा करते हैं, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश प्रभावित होते हैं।
- रक्षा निर्भरता और विविधीकरण: रूसी रक्षा उपकरणों पर भारत की ऐतिहासिक निर्भरता के कारण स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और समय पर आपूर्ति को लेकर चिंताएँ पैदा होती हैं।
- रूस–चीन की बढ़ती निकटता: चीन पर रूस की बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक निर्भरता भारतीय हितों को समायोजित करने के लिए उपलब्ध रणनीतिक अवसर को सीमित कर सकती है, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में।
- व्यापार असंतुलन: द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई है, विशेष रूप से भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात के कारण, लेकिन रूस को भारत का निर्यात तुलनात्मक रूप से सीमित बना हुआ है, जिससे लगातार व्यापार असंतुलन बना हुआ है।
- प्रौद्योगिकी और ऊर्जा संबंधी चिंताएँ: प्रतिबंध और पश्चिमी प्रौद्योगिकी तक रूस की कम होती पहुँच उन्नत रक्षा सहयोग, संयुक्त उपक्रमों और दीर्घकालिक ऊर्जा परियोजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
- भारत-रूस साझेदारी समकालीन युग में सबसे स्थिर साझेदारियों में से एक रही है, जिसमें बहुध्रुवीय विश्व के प्रति साझा प्रतिबद्धता है। साथ ही, दोनों देश पारंपरिक सैन्य, परमाणु और अंतरिक्ष सहयोग से आगे संबंधों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- दोनों देश अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को भी मजबूत करने की दिशा में देख रहे हैं, विशेष रूप से रूसी सुदूर पूर्व के साथ, तथा संपर्क संबंधी पहलों को बढ़ावा देने पर ध्यान दे रहे हैं।
स्रोत: TH