पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- रेल मंत्रालय ने पश्चिमी समर्पित माल-ढुलाई गलियारे (WDFC) को पूरा कर लिया है, जो भारत की माल-ढुलाई लॉजिस्टिक्स आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (DFC) के बारे में
- समर्पित मालवाहक गलियारा (DFC) एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य माल-ढुलाई यातायात को यात्री लाइनों से अलग करना है ताकि दक्षता और क्षमता में सुधार हो सके।
- इस परियोजना की परिकल्पना 2005 में की गई थी और 2008 में मंत्रिमंडल ने दो DFC—पूर्वी DFC (EDFC) और पश्चिमी DFC (WDFC)—को स्वीकृति दी।
- पूर्वी DFC (EDFC): 1,337 किलोमीटर, लुधियाना (पंजाब) से सोननगर (बिहार) तक; पूर्ण और परिचालन में।
- पश्चिमी DFC (WDFC): 1,506 किलोमीटर, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (महाराष्ट्र) से दादरी (उत्तर प्रदेश) तक; हाल ही में पूर्ण।
- इसका क्रियान्वयन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) द्वारा किया जाता है।
महत्व
- तीव्र माल-ढुलाई परिवहन: मालगाड़ियाँ 100 किमी/घंटा की गति से चल सकती हैं, जबकि पारंपरिक पटरियों पर यह 50–60 किमी/घंटा होती है।
- रेल नेटवर्क का भीड़-निवारण: वर्तमान यात्री लाइनों को मुक्त कर समयबद्धता और दक्षता में सुधार।
- आर्थिक प्रभाव: WDFC पर प्रतिदिन 100+ मालगाड़ियों के संचालन की संभावना, जिससे औद्योगिक गलियारों और बंदरगाह संपर्क को बढ़ावा मिलेगा।
- लागत एवं ऊर्जा दक्षता: लॉजिस्टिक्स लागत में लगभग 20–25% की कमी और कार्बन उत्सर्जन में कमी, जिससे भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों को समर्थन।
- निर्यात एवं आयात को समर्थन: JNPT और मुंद्रा जैसे प्रमुख बंदरगाहों से संपर्क, जिससे कार्गो परिवहन दक्षता में सुधार।
चुनौतियाँ
- उच्च पूंजी लागत: दोनों DFCs की कुल परियोजना लागत ₹80,000–₹90,000 करोड़ अनुमानित।
- भूमि अधिग्रहण: विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब में चुनौतीपूर्ण।
- एकीकरण संबंधी मुद्दे: वर्तमान रेलवे नेटवर्क और निजी लॉजिस्टिक्स के साथ सहज इंटरफ़ेस की आवश्यकता।
- रखरखाव एवं प्रौद्योगिकी: विद्युतीकृत डबल-स्टैक कंटेनर गलियारों के लिए आधुनिक सिग्नलिंग, निगरानी और कुशल कार्यबल आवश्यक।
- संचालन संबंधी जोखिम: उच्च गति मालगाड़ियों को मौजूदा यात्री सेवाओं के साथ सुरक्षित रूप से एकीकृत करना।
सरकारी पहल / समर्थन
- DFCCIL क्रियान्वयन: योजना, निर्माण और संचालन हेतु केंद्रीय सरकारी इकाई।
- आधुनिक प्रौद्योगिकी: भारतीय रेल ने अपने ब्रॉड-गेज नेटवर्क का 90% से अधिक विद्युतीकरण कर लिया है और 100% विद्युतीकरण की ओर अग्रसर है।
- कवच का क्रियान्वयन: स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, जो टक्करों को रोकती है और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करती है।
- औद्योगिक गलियारों से एकीकरण: दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC), पूर्वी एवं पश्चिमी बंदरगाहों से जुड़ा हुआ।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): मालवाहक टर्मिनलों, लॉजिस्टिक्स पार्कों, वैगन निवेश योजनाओं और स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाओं में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया।
- पीएम गति शक्ति एकीकरण: पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान एक GIS-आधारित एकीकृत मंच प्रदान करता है, जिससे समन्वित अवसंरचना योजना संभव होती है।
- यह रेल, सड़क, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स के बीच बहु-मोडल संपर्क सुनिश्चित करता है।
निष्कर्ष
- DFC परियोजना भारत के परिवहन अवसंरचना में एक परिवर्तनकारी पहल है, जो मालवाहक दक्षता बढ़ाती है, लॉजिस्टिक्स लागत घटाती है, स्थिरता को प्रोत्साहित करती है और औद्योगिक विकास को समर्थन देती है।
- EDFC पहले से परिचालन में है और WDFC पूर्ण हो चुका है, जिससे भारत अपनी लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने, बंदरगाह संपर्क सुधारने और तेज़, स्वच्छ एवं किफायती मालवाहक परिवहन सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रसर है।
Source: IE
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