पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने परिचालन मानकों का पालन न करने के कारण प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 के अंतर्गत 178 प्रशिक्षण भागीदारों (TPs) एवं प्रशिक्षण केन्द्रों (TCs) को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
- PMKVY, कौशल भारत मिशन के अंतर्गत प्रारंभ की गई प्रमुख कौशल प्रमाणन योजना है, जिसका उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।
- इस योजना का क्रियान्वयन कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा किया जाता है।
- इसका लक्ष्य उद्योग-संबंधी अल्पकालिक प्रशिक्षण, पूर्व अधिगम की मान्यता (RPL), तथा विशेष परियोजनाएँ प्रदान करना है।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम सामान्यतः 300 से 600 घंटे के बीच होते हैं, जो क्षेत्रीय आवश्यकताओं पर निर्भर करते हैं।
- 2022 में प्रारंभ की गई PMKVY 4.0 का उद्देश्य हरित रोजगार, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स और डिजिटल कौशल जैसे उभरते क्षेत्रों को सम्मिलित करना तथा निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ करना है।
पहचानी गई अनियमितताओं का स्वरूप
- कई प्रशिक्षण केन्द्र आधिकारिक कार्य समय में बंद पाए गए, जबकि बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की गई थी।
- आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली में कथित हेरफेर की घटनाएँ सामने आईं।
- कुछ केन्द्रों में परिचालन संबंधी अनियमितताएँ पाई गईं, जैसे एक ही परिसर में दो या अधिक प्रशिक्षण केन्द्रों का अनधिकृत विलय, जो निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था।
- PMKVY दिशा-निर्देशों के अंतर्गत निर्धारित अधोसंरचना और प्रशिक्षण मानकों का पालन करने में विफलता रही।
पहचानी गई अनियमितताओं के प्रभाव
- संस्थागत विश्वसनीयता का क्षरण: बायोमेट्रिक हेरफेर की पहचान से PMKVY की विश्वसनीयता कमजोर होती है और सरकारी वित्तपोषित कौशल पहलों में जनविश्वास घटता है।
- सार्वजनिक धन का दुरुपयोग: धोखाधड़ीपूर्ण उपस्थिति दर्ज करने और मानकों का पालन न करने से धन का अनुचित वितरण होता है, जिससे राजकोष को प्रत्यक्ष वित्तीय हानि होती है।
- युवाओं का कौशल प्रमाणन पर विश्वास कम होना: यदि रोजगार परिणाम अनिश्चित रहते हैं तो युवा अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नामांकन से संकोच कर सकते हैं।
- भारत के जनसांख्यिकीय लाभ पर प्रभाव: शासन संबंधी चूक और संरचनात्मक अक्षमताएँ कौशल कार्यक्रमों की क्षमता को जनसांख्यिकीय लाभ को उत्पादक आर्थिक परिणामों में बदलने से रोकती हैं।
प्रणाली सुधार हेतु तकनीकी एवं नीतिगत उपाय
- एआई-आधारित उपस्थिति विश्लेषण उपकरण: असामान्य उपस्थिति पैटर्न, जैसे अचानक बायोमेट्रिक प्रविष्टियों में वृद्धि या असामान्य समय पर उपस्थिति का समूह, पहचानने हेतु लागू किए जा सकते हैं।
- अनिवार्य सीसीटीवी रिकॉर्डिंग: प्रशिक्षण समय के दौरान सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज के साथ सीसीटीवी रिकॉर्डिंग अनिवार्य की जा सकती है, जिससे आकस्मिक ऑडिट में दृश्य सत्यापन संभव हो।
- ब्लॉकचेन-आधारित प्रमाणन: ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग छेड़छाड़-रोधी डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने हेतु किया जा सकता है, जिन्हें नियोक्ता सत्यापित कर सकें, जिससे विश्वसनीयता सुनिश्चित हो और प्रतिलिपि की समस्या कम हो।
आगे की राह
- परिणाम-आधारित मूल्यांकन की ओर बदलाव: मूल्यांकन मानकों को केवल नामांकन संख्या पर नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार, वेतन वृद्धि और नियोक्ता संतुष्टि पर केंद्रित होना चाहिए।
- सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना: निरीक्षण, दंड और ब्लैकलिस्टिंग निर्णयों से संबंधित विवादों को सुलझाने हेतु पारदर्शी अपीलीय तंत्र संस्थागत किया जाना चाहिए।
- क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करना: नियमित प्रशिक्षक प्रमाणन, डिजिटल अधोसंरचना समर्थन और गुणवत्ता ऑडिट को अनुपालन निगरानी के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
- धोखाधड़ी और प्रक्रियागत चूक में अंतर करना: नीतिगत प्रतिक्रियाएँ जानबूझकर किए गए वित्तीय दुरुपयोग और मामूली प्रक्रियागत विचलनों के बीच उचित भेद करें ताकि न्यायसंगतता बनी रहे।
स्रोत: IE
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