भारत द्वारा 2030 तक 300 बिलियन डॉलर के अपने जैव-अर्थव्यवस्था लक्ष्य की पुनः पुष्टि

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

सन्दर्भ

  • केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने भारत के जैव प्रौद्योगिकी मिशन में व्यापक जन समझ और समावेशी भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक भारतीय देश की जैव अर्थव्यवस्था में एक हितधारक है।
  • मंत्री ने 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव अर्थव्यवस्था को साकार करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

जैव अर्थव्यवस्था क्या है?

  • जैव अर्थव्यवस्था, खाद्य, ऊर्जा और औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए नवीकरणीय जैविक संसाधनों का उपयोग है, जो स्थिरता तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है।
  • जीन संपादन और बायोप्रिंटिंग जैसे नवाचार प्रगति को गति दे रहे हैं, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में एकीकरण दीर्घकालिक प्रभाव को मजबूत करता है।
  • जैव प्रौद्योगिकी को डिजिटल उपकरणों और वृत्ताकार अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के साथ जोड़कर, जैव अर्थव्यवस्था पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए स्थायी समाधान प्रदान करती है तथा समग्र सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देती है।
जैव अर्थव्यवस्था

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था

  • भारत विश्व भर में जैव-प्रौद्योगिकी के लिए शीर्ष 12 गंतव्यों में से एक है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जैव-प्रौद्योगिकी के लिए तीसरा सबसे बड़ा गंतव्य है।
  • भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में 10 अरब डॉलर से सोलह गुना बढ़कर 2024 में प्रभावशाली 165.7 अरब डॉलर हो गई है।
  • राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 4.25% का योगदान करते हुए, इस क्षेत्र ने विगत चार वर्षों में 17.9% की मजबूत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) प्रदर्शित की है।
  • भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र को जैव-औषधीय उत्पाद, जैव-कृषि, जैव-सूचना प्रौद्योगिकी और जैव-सेवाओं में वर्गीकृत किया गया है।
  • भविष्य के लक्ष्य: 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था प्राप्त करने का लक्ष्य।
  • भारत टीके, निदान और चिकित्सा सहित जैव-औषधि क्षेत्र में भी विश्व स्तर पर अग्रणी बनना चाहता है।

सरकारी पहल और प्रमुख कार्यक्रम

  • बायोई3 नीति (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव प्रौद्योगिकी): इसे 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था और इसका उद्देश्य उच्च-प्रदर्शन जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देकर भारत को एक वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी महाशक्ति में बदलना है। इस नीति की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:
    • अनुसंधान एवं विकास और उद्यमिता के लिए नवाचार-संचालित समर्थन;
    • जैव-विनिर्माण और जैव-एआई केंद्रों तथा जैव-फाउंड्री की स्थापना;
    • हरित विकास के लिए पुनर्योजी जैव-अर्थव्यवस्था मॉडल पर ध्यान केंद्रित करना;
    • भारत के कुशल कार्यबल का विस्तार;
    • ‘नेट ज़ीरो’ कार्बन अर्थव्यवस्था और ‘पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ (LiFE) पहलों के साथ संरेखण।
सरकारी पहल

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन:

  • यह जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के नेतृत्व में सरकार द्वारा अनुमोदित एक पहल है और BIRAC द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
    • उद्देश्य: उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर बायोफार्मास्युटिकल्स, टीकों, बायोसिमिलर, चिकित्सा उपकरणों और निदान के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को बढ़ावा देना।
    • 250 मिलियन डॉलर के बजट और विश्व बैंक द्वारा 50% सह-वित्तपोषित, यह मिशन 101 परियोजनाओं का समर्थन करता है, जिसमें 150 से अधिक संगठन और 30 MSME शामिल हैं।
भारत के फार्मा क्षेत्र में प्रमुख उपलब्धियाँ:
– भारत किफायती, उच्च-गुणवत्ता वाली दवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है, और मात्रा के हिसाब से दवा उत्पादन में तीसरे और मूल्य के हिसाब से 14वें स्थान पर है।
– विश्व के 65% टीके भारत में उत्पादित होते हैं, जिससे निम्न और मध्यम आय वाले देशों को काफ़ी लाभ हो रहा है।
– भारत किशोरियों में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की रोकथाम के लिए पहले स्वदेशी एचपीवी टीके पर काम कर रहा है।
– विश्व भर में खपत होने वाली हर तीसरी गोली भारत में निर्मित होती है, जो भारतीय दवा कंपनियों के प्रति वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।

जैव-कृषि: 

  • जैव प्रौद्योगिकी विभाग के कृषि जैव प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के अंतर्गत जीनोमिक्स, ट्रांसजेनिक तथा जीन संपादन में नवाचारों के माध्यम से भारत में कृषि जैव प्रौद्योगिकी तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
  • जलवायु-स्मार्ट फ़सलें: सूखा-सहिष्णु, उच्च उपज देने वाली चने की किस्म सात्विक (एनसी 9) को खेती के लिए अनुमोदित किया गया है।
  • जीनोम-संपादित चावल: उपज-सीमित करने वाले जीनों में कार्य-क्षति उत्परिवर्तनों के कारण DEP1-संपादित MTU-1010 जैसी उन्नत चावल प्रजातियाँ विकसित हुई हैं, जिनसे उच्च उपज प्राप्त होती है।
  • जीनोटाइपिंग सारणी: भारत की पहली 90K SNP सारणी—चावल के लिए IndRA तथा चने के लिए IndCA—डीएनए फ़िंगरप्रिंटिंग और किस्म की पहचान को सक्षम बनाती हैं।
  • ऐमारैंथ संसाधन: एक जीनोमिक डेटाबेस, NIRS तकनीकें, और एक 64K SNP चिप पोषण संबंधी जाँच और मोटापा-रोधी ऐमारैंथ किस्मों के विकास में सहायता करती हैं।
  • जैव नियंत्रण: माइरोथेसियम वेरुकेरिया से प्राप्त एक नैनो-सूत्रण टमाटर और अंगूर में चूर्णिल फफूंद का पर्यावरण-अनुकूल नियंत्रण प्रदान करता है।
  • किसान-कवच: एक कीटनाशक-रोधी सुरक्षात्मक सूट, विषाक्त पदार्थों के संपर्क से किसानों की सुरक्षा को बढ़ाता है।
    • बायोटेक-किसान (बायोटेक-कृषि नवाचार विज्ञान अनुप्रयोग नेटवर्क): बायोटेक-किसान एक वैज्ञानिक-किसान साझेदारी कार्यक्रम है जिसे कृषि नवाचार और वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के लिए शुरू किया गया है।
    • यह हब-एंड-स्पोक मॉडल का अनुसरण करता है और भारत के 115 आकांक्षी जिलों में सक्रिय है।
  • जैव ऊर्जा: जैव ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा का एक रूप है जो हाल ही में जीवित कार्बनिक पदार्थों, जिन्हें बायोमास कहा जाता है, से प्राप्त होती है, जिसका उपयोग परिवहन ईंधन, ऊष्मा, बिजली और उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
    • इथेनॉल मिश्रण में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है—2014 में 1.53% से बढ़कर 2024 में 15%, और 2025 तक 20% मिश्रण का लक्ष्य है।
    • इस बदलाव से न केवल कच्चे तेल के आयात में 173 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है, बल्कि 99,014 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत भी हुई है और 519 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई है।
  • BIRAC पहलों के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देना: जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 2012 में स्थापित जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC), भारत के जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
    • देश भर में स्थापित 95 जैव-ऊष्मायन केंद्रों के साथ, BIRAC वित्त पोषण, बुनियादी ढांचे और मार्गदर्शन के माध्यम से स्टार्टअप्स का समर्थन करता है।
जैव-कृषि

आगे की राह

  • भारत की जैव-अर्थव्यवस्था एक निर्णायक बिंदु pपर है, जहाँ नवाचार, स्थिरता और समावेशी विकास के प्रति इसका एकीकृत दृष्टिकोण एक वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।
  • मज़बूत नीतिगत ढाँचों, अत्याधुनिक अनुसंधान और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर ज़ोर देकर, देश अपने औद्योगिक और पर्यावरणीय परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित करने की राह पर है।
  • जैव-विनिर्माण, जैव-कृषि और जैव-ऊर्जा का अभिसरण न केवल राष्ट्रीय लचीलेपन को मज़बूत करता है, बल्कि उभरती वैश्विक जैव-अर्थव्यवस्था में भारत के नेतृत्व की रणनीतिक मंशा का भी संकेत देता है।

Source: PIB

 

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