पाठ्यक्रम: GS2/शिक्षा; GS3/एआई की भूमिका
संदर्भ
- हाल ही में भारत ने शिक्षकों को एआई उपकरणों से सशक्त बनाने और देश के खुले विद्यालय ढाँचे को उदार बनाने की योजना प्रस्तुत की है, ताकि भारत की शिक्षा प्रणाली को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जा सके।
- यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है और ‘सभी के लिए एआई-सक्षम शिक्षा’ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
शिक्षा में एआई की भूमिका
- शिक्षकों के लिए एआई: एआई-आधारित प्लेटफ़ॉर्म शिक्षकों को पाठ योजना, व्यक्तिगत मूल्यांकन और छात्र सहभागिता में सहायता प्रदान करने के लिए प्रस्तुत किए जाएंगे।
- एनसीईआरटी और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) मिलकर ऐसे अनुकूली डिजिटल शिक्षण उपकरण विकसित करेंगे जो छात्रों के सीखने के पैटर्न के आधार पर शिक्षण सामग्री को अनुकूलित कर सकें।
- इसमें शिक्षकों के लिए एआई प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल होंगे, जिन्हें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और इंटेल इंडिया द्वारा ‘AI फॉर ऑल’ कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित किया जाएगा।
- लक्ष्य है शिक्षकों को एआई-आधारित अंतर्दृष्टियों से सशक्त बनाना, जिससे वे सीखने के परिणामों को ट्रैक कर सकें और ज्ञान के अंतर को तीव्रता से समाप्त कर सकें।
- खुले विद्यालय के लिए एआई: सरकार नामांकन, प्रदर्शन ट्रैकिंग और प्रमाणन जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए खुले विद्यालय ढाँचे में एआई को एकीकृत करना चाहती है।
- इसका उद्देश्य NIOS शिक्षार्थियों को वास्तविक समय में शैक्षणिक सहायता और व्यक्तिगत प्रगति डैशबोर्ड तक पहुँच प्रदान करना है।
- एक पायलट परियोजना ‘ओपन AI स्कूल’ की घोषणा की गई है, जो दूरस्थ शिक्षार्थियों के लिए लचीला, एआई-सहायता प्राप्त पाठ्यक्रम प्रदान करेगी।
- NIOS पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना:
- 14 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षार्थियों के लिए ओपन बेसिक एजुकेशन (OBE) (कक्षा 3, 5 और 8 के समकक्ष)
- माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक पाठ्यक्रम
- व्यावसायिक और जीवन-संवर्धन कार्यक्रम
शिक्षा में एआई के अनुप्रयोग
- डिजिटल और भाषाई अंतर का समापन: नए एआई प्लेटफ़ॉर्म बहुभाषी होंगे, जो भारत की भाषाई विविधता को मान्यता देते हुए सभी 22 अनुसूचित भाषाओं का समर्थन करेंगे।
- यह पहल ‘भाषिनी परियोजना’ से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य एआई-आधारित भाषा अनुवाद ढाँचे का निर्माण करना है ताकि डिजिटल शिक्षा में समावेशिता सुनिश्चित हो सके।
- भारतीय कक्षाओं में एआई: ग्रामीण-शहरी शिक्षा अंतर को समाप्त करने में एआई का परिवर्तनकारी उपयोग।
- व्यक्तिगत शिक्षा बड़े पैमाने पर: एआई की सबसे शक्तिशाली योगदानों में से एक है व्यक्तिगत छात्र आवश्यकताओं के अनुसार सीखने के अनुभव को अनुकूलित करना। एआई-संचालित प्लेटफ़ॉर्म कर सकते हैं:
- शिक्षार्थी की गति, ताकत और कमजोरियों के आधार पर सामग्री को अनुकूलित करना।
- वास्तविक समय में प्रतिक्रिया देना, जिससे छात्र तुरंत गलतियों को सुधार सकें।
- विकलांग शिक्षार्थियों को स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-स्पीच और भाषा अनुवाद जैसे उपकरणों के माध्यम से समावेशी शिक्षा प्रदान करना।
- शिक्षकों को सशक्त बनाना: ‘AI फॉर ऑल’ कार्यक्रम और ‘AI समर्थ’ प्लेटफ़ॉर्म जैसी पहलें शिक्षकों में डिजिटल क्षमता का निर्माण करती हैं। एआई शिक्षकों की सहायता कर सकता है:
- प्रशासनिक कार्यों का स्वचालन कर, शिक्षण के लिए समय मुक्त करना।
- डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से सीखने के अंतर की पहचान करना।
- इंटरैक्टिव, मल्टीमीडिया-समृद्ध सामग्री के साथ सहभागिता बढ़ाना।
- नैतिक और प्रभावी एआई उपयोग सुनिश्चित करने के लिए समर्थन प्रणाली प्रदान करना।
- पूर्वानुमान विश्लेषण: एआई मॉडल छात्र ड्रॉपआउट जोखिम का पूर्वानुमान लगाते हैं और सुधारात्मक कार्रवाई सुझाते हैं।
- भाषा और पहुँच उपकरण: प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) अनुप्रयोग अनुवाद का समर्थन करते हैं और दिव्यांग शिक्षार्थियों की सहायता करते हैं।
चुनौतियाँ और नैतिक चिंताएँ
- डिजिटल अंतर: ग्रामीण और शहरी विद्यालयों के बीच एआई उपकरणों तक असमान पहुँच।
- डेटा गोपनीयता: छात्र डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- शिक्षक तैयारी: शिक्षकों को एआई का जिम्मेदारी से उपयोग करने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता।
- पक्षपात और पारदर्शिता: यदि सावधानीपूर्वक डिज़ाइन न किया जाए तो एआई एल्गोरिदम सामाजिक-आर्थिक पक्षपात को सुदृढ़ कर सकते हैं।
अन्य संबंधित प्रयास और पहल
- राष्ट्रीय एआई पोर्टल: शिक्षा में एआई जागरूकता और सहयोग को बढ़ावा देने वाला मंच।
- AI फॉर ऑल कार्यक्रम: CBSE स्कूलों में एआई पाठ्यक्रम शुरू किया गया ताकि डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया जा सके।
- राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा वास्तुकला (NDEAR): डेटा-आधारित निर्णय लेने और व्यक्तिगत छात्र शिक्षा के लिए एआई का उपयोग करता है।
- SWAYAM और DIKSHA प्लेटफ़ॉर्म: ऑनलाइन शिक्षा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई-आधारित विश्लेषण का उपयोग करते हैं।
- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक, 2025: इसे 2025 की शीतकालीन सत्र में संसद में प्रस्तुत किया गया और प्रारंभिक विरोध के बाद समीक्षा हेतु संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया। इसका उद्देश्य है:
- शिक्षण मानकों का आधुनिकीकरण और शिक्षा परिणामों को राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप बनाना।
- आईटीआई और कौशल केंद्र जैसे गैर-पारंपरिक संस्थानों को खुले विद्यालय कार्यक्रम प्रदान करने के मार्ग बनाना।
- विद्यालय से बाहर के युवाओं, कामकाजी पेशेवरों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए लचीली, समावेशी शिक्षा तक पहुँच का विस्तार करना।
- तकनीकी शिक्षा का मानकीकरण करना ताकि रोजगार सुनिश्चित हो सके और उद्यमिता को बढ़ावा मिले।
- सरकार को इसे 2026 के बजट सत्र के अंत तक पारित कराने की संभावना है।
आगे की राह
- शिक्षा में एआई को बढ़ावा देना भारत को 2030 तक एआई साक्षरता और शैक्षिक नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने की व्यापक दृष्टि का भाग है।
- यह डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप है और ‘स्किल इंडिया’ तथा ‘समग्र शिक्षा अभियान’ पहलों का समर्थन करता है।
- चरणबद्ध कार्यान्वयन 2026–27 शैक्षणिक सत्र से शुरू होने की संभावना है, जिसकी शुरुआत 200 केंद्रीय विद्यालयों और चुनिंदा NIOS अध्ययन केंद्रों में पायलट कार्यक्रमों से होगी।
- सरकार का लक्ष्य है एक अधिक समावेशी, आजीवन सीखने का ढाँचा तैयार करना, जो संस्थागत आवश्यकताओं को सरल बनाकर भारत की विकसित भारत की दृष्टि के अनुरूप हो।
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