कृषि हेतु सीमांत वृद्धि

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

समाचार में

  •  विभिन्न राजनीतिक धाराओं से जुड़े किसान संगठनों ने केंद्रीय बजट 2026–27 की आलोचना की।

कृषि क्षेत्र से संबंधित घोषणाएँ : केंद्रीय बजट 2026–27

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन में 2.6% की वृद्धि की गई है, जो विगत वर्ष की तुलना में लगभग ₹3,000 करोड़ अधिक है, जबकि आर्थिक सर्वेक्षण ने कृषि वृद्धि में मंदी की रिपोर्ट दी थी।
  •  वित्त मंत्री ने कृषि हेतु ₹1.3 लाख करोड़ का प्रस्ताव रखा, जो 2025–26 के बजट अनुमान और संशोधित अनुमान से थोड़ा अधिक है, किंतु 2024–25 के वास्तविक व्यय के निकट है।
  • उर्वरक मंत्रालय को अधिक बढ़ावा मिला, जिसके लिए ₹1.7 लाख करोड़ का आवंटन किया गया—विगत  वर्ष की तुलना में लगभग 8.5% की वृद्धि।

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में प्रमुख पहलें

  • फसलों से संबद्ध क्षेत्रों की ओर आय रणनीति का स्थानांतरण: बजट कृषि आय रणनीति को फसलों से संबद्ध क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित करने का संकेत देता है, जिसमें अधिकांश घोषणाएँ मत्स्य पालन और पशुपालन पर केंद्रित हैं।
    •  इसमें अंतर्देशीय और तटीय मत्स्य पालन का विस्तार, मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना एवं विपणन में सुधार पर बल दिया गया है, जिसमें स्टार्टअप्स, महिला-नेतृत्व वाले समूह एवं उत्पादक संगठन शामिल हैं। पशुधन पहलों का ध्यान अवसंरचना आधुनिकीकरण और मूल्य श्रृंखला विकास पर है, जो अनाज-आधारित खेती से हटकर मत्स्य पालन, पशुधन, डेयरी एवं पोल्ट्री की ओर संकेत करता है।
  • भौगोलिक फसल रणनीति, सामान्य कृषि नहीं: बजट ने उच्च-मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने हेतु ₹350 करोड़ की घोषणा की तथा सात स्थान-विशिष्ट फसलों—नारियल, कोको, काजू, बादाम, अखरोट, पाइन नट्स और चंदन—को प्राथमिकता दी है, जो तटीय, पहाड़ी, पूर्वोत्तर एवं बागान क्षेत्रों को लक्षित करती हैं।
    •  नारियल संवर्धन योजना और काजू व कोको हेतु विशेष कार्यक्रमों जैसी योजनाओं के माध्यम से उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो क्षेत्रीय तुलनात्मक लाभ पर आधारित कृषि रणनीति को दर्शाता है।
  • उत्पादन समर्थन से अधिक बाज़ार पहुँच: बजट उत्पादन समर्थन की तुलना में बाज़ार पहुँच को प्राथमिकता देता है, जिसमें केवल खेती पर नहीं बल्कि बिक्री चैनलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
    •  यह मछली और पशुधन एफपीओ, सामुदायिक स्वामित्व वाले SHE मार्ट्स (स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित) को बढ़ावा देता है और सहकारी समितियों को लक्षित कर राहत प्रदान करता है, जिसमें सदस्य-प्रदत्त इनपुट पर कटौती, अंतर-सहकारी लाभांश और राष्ट्रीय सहकारी महासंघों के लिए अस्थायी छूट शामिल हैं।
  • लॉजिस्टिक्स और व्यापार संरचना को कृषि नीति के रूप में: बजट फार्म-टू-मार्केट सुधारों का प्रस्ताव करता है, जिसमें अप्रैल 2026 तक खाद्य, पौधों, पशुओं और वन्यजीव कार्गो के लिए एकल-खिड़की स्वीकृति शामिल है। साथ ही एआई-आधारित कंटेनर स्कैनिंग, गोदाम डिजिटलीकरण और समर्पित मालवाहक कॉरिडोर (जलमार्ग सहित) में निवेश का प्रावधान है।
  • डिजिटल शासन और जैव-अर्थव्यवस्था का हिस्सा के रूप में कृषि: बजट भारत-विस्तार नामक एक एआई-सक्षम डिजिटल परामर्श मंच शुरू करने का प्रस्ताव करता है, जिसका उद्देश्य कृषि डेटा और परामर्श सेवाओं को एकीकृत कर उत्पादकता एवं निर्णय-निर्धारण में सुधार करना है।
    •  वेस्ट-टू-वैल्यू उत्पादन के अंतर्गत बजट संपीड़ित बायोगैस (CBG) पर देय उत्पाद शुल्क को हटाने का प्रस्ताव करता है।

उद्देश्य

  • फसल विविधीकरण और संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किसान आय में वृद्धि करना।
  • मत्स्य पालन और पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी रोजगार उत्पन्न करना।
  • एकीकृत जल प्रबंधन और जलवायु-लचीली प्रथाओं के माध्यम से स्थिरता को बढ़ाना।
  • डिजिटल सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करना, जिसमें एआई और तकनीक का उपयोग कर उन्नत खेती तथा बेहतर बाज़ार संपर्क सुनिश्चित करना।

चिंताएँ

  • किसानों ने तर्क दिया कि बजट ने वैधानिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि ऋण राहत और वैश्विक व्यापार व शुल्क दबावों से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान जैसी प्रमुख माँगों की उपेक्षा की है। उन्होंने इसे सरकारी वादों और वास्तविक बजटीय समर्थन के बीच के अंतर को बताया।
  • बजट ने फसल बीमा, पीएमकेएसवाई, कृषि अनुसंधान (DARE) और खाद्य प्रसंस्करण पर व्यय को कम कर दिया है, जो दीर्घकालिक उत्पादकता एवं नवाचार के लिए सीमित राजकोषीय समर्थन को इंगित करता है।
  • पीएम किसान सम्मान निधि के लिए आवंटन ₹63,500 करोड़ पर यथावत रखा गया, इसमें कोई वृद्धि नहीं की गई।
  • कृषि अनुसंधान और शिक्षा पर व्यय 4.8% घटाकर ₹9,967.4 करोड़ कर दिया गया।

सरकार का दृष्टिकोण

  • भारत के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026–27 को “ऐतिहासिक और अभूतपूर्व” बताया। उन्होंने कहा कि यह एक विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत की नींव को सुदृढ़ करता है।
  •  यह किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों पर केंद्रित है, जिसमें गाँवों को केंद्र में रखा गया है। ग्रामीण विकास बजट में 21% की वृद्धि की गई है और ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्रालयों के संयुक्त आवंटन अब ₹4.35 लाख करोड़ से अधिक हो गए हैं।

निष्कर्ष और आगे की राह

  • केंद्रीय बजट 2026–27 जलवायु-लचीली कृषि, छोटे किसानों और महिलाओं के लिए समावेशी विकास तथा तकनीक-आधारित बाज़ार पहुँच पर केंद्रित है, साथ ही कृषि को व्यापक ग्रामीण विकास से जोड़ता है।
  •  बजट ने एक सिस्टम दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें कृषि को सात प्राथमिकताओं में एकीकृत कर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया गया है, बजाय केवल प्रत्यक्ष खेती हस्तक्षेपों पर ध्यान देने के।
  •  इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आवंटनों को संरचनात्मक और जलवायु-अनुकूल सुधारों के माध्यम से ठोस लाभों में कैसे परिवर्तित किया जाता है।

स्रोत :IE

 

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