पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा एक मौलिक परिवर्तन से गुजर रही है, जिसे सशक्त डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संगम द्वारा संचालित किया जा रहा है।
वित्तीय समावेशन क्या है?
- विश्व बैंक के अनुसार, वित्तीय समावेशन का अर्थ है कि व्यक्तियों और व्यवसायों को उपयोगी एवं किफायती वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं तक पहुँच प्राप्त हो — जैसे लेन-देन, भुगतान, बचत, ऋण और बीमा — जो जिम्मेदार एवं सतत तरीके से प्रदान किए जाएँ।
भारत की वित्तीय समावेशन हेतु डिजिटल नींव
- वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-Index): भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2021 में FI-Index शुरू किया ताकि कमजोर वर्गों और निम्न-आय समूहों को सस्ती लागत पर वित्तीय सेवाओं और समय पर पर्याप्त ऋण तक पहुँच सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सके।
- जैम ट्रिनिटी (जन धन-आधार-मोबाइल): सार्वभौमिक बैंक खाते, बायोमेट्रिक पहचान और मोबाइल कनेक्टिविटी का मूलभूत संगम।

- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT): DBT प्रणाली के अंतर्गत सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और मध्यस्थों की भूमिका समाप्त होती है।
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI): एक वास्तविक समय भुगतान प्रणाली जो मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से किसी भी दो बैंक खातों के बीच त्वरित धन हस्तांतरण की सुविधा देती है।
- अटल पेंशन योजना (APY): 2015 में शुरू की गई, यह असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।
- APY का नियमन पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा किया जाता है और यह राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) ढाँचे के अंतर्गत कार्य करती है।
वित्तीय सेवाओं में AI का एकीकरण
- MuleHunter.AI: 2024 में RBI इनोवेशन हब (RBIH) द्वारा शुरू किया गया, यह एक उन्नत AI-संचालित उपकरण है जो साइबर अपराधों में प्रयुक्त “म्यूल” बैंक खातों की पहचान और रोकथाम करता है।
- भाषिणी एवं RBI समझौता: 2026 में डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग और RBI ने बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं में AI-आधारित भाषा प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- डिजिटल श्रमसेतु: प्रस्तावित पहल, जिसका उद्देश्य भारत के 490 मिलियन असंगठित श्रमिकों को AI, ब्लॉकचेन और इमर्सिव लर्निंग के माध्यम से सशक्त बनाना है।
- इसका लक्ष्य डिजिटल विभाजन समापन, उत्पादकता बढ़ाना और श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।
- AI-आधारित क्रेडिट स्कोरिंग: जिन व्यक्तियों के पास CIBIL स्कोर नहीं है, उनके लिए AI-आधारित ऋण प्रणाली डिजिटल लेन-देन पैटर्न और व्यवहारिक डेटा का उपयोग करके वित्तीय विश्वसनीयता का मूल्यांकन करती है।
- यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफ़ेस (ULI): RBI द्वारा विकसित, यह एक DPI है जो सुगम और समावेशी ऋण वितरण सुनिश्चित करता है।
प्रमुख शब्दावली
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): अंतःक्रियाशील डिजिटल प्रणालियाँ — जैसे डिजिटल पहचान, भुगतान प्लेटफ़ॉर्म और डेटा विनिमय ढाँचे — जो सुरक्षित और कुशल सेवा वितरण सक्षम करते हैं।
- एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस (API): नियमों और प्रोटोकॉल का एक सेट जो विभिन्न सॉफ़्टवेयर अनुप्रयोगों को एक-दूसरे से संवाद एवं डेटा विनिमय करने की अनुमति देता है।
- CIBIL स्कोर: क्रेडिट इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड (CIBIL) द्वारा जारी तीन अंकों का संख्यात्मक सारांश, जो उपयोगकर्ता की ऋण-योग्यता और क्रेडिट प्रोफ़ाइल को दर्शाता है।
वित्तीय समावेशन की चुनौतियाँ
- डिजिटल विभाजन: ग्रामीण जनसंख्या के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की कमी है, जिससे डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुँच सीमित होती है।
- कम वित्तीय साक्षरता: औपचारिक वित्तीय उत्पादों और योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी उनके अपनाने में बाधा डालती है। (2023 के आँकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता केवल 62.6% है।)
- विश्वास की कमी: धोखाधड़ी का भय, जटिल प्रक्रियाएँ और पूर्व खराब अनुभव नए उपयोगकर्ताओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में भाग लेने से हतोत्साहित करते हैं।
- साइबर अपराध: 2021–22 के बीच साइबर अपराध रिपोर्टों में 24.4% की वृद्धि हुई (NCRB आँकड़े), जो बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ी को दर्शाता है।
- अवसंरचना की कमी: दूरदराज़ क्षेत्रों में अपर्याप्त बैंकिंग अवसंरचना (ATM, शाखाएँ) पहुँच को कम करती है।
- लैंगिक असमानता: यद्यपि महिलाओं में बैंक खाता स्वामित्व बढ़ा है, वास्तविक उपयोग सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं के कारण कम है।
आगे की राह
- डिजिटल साक्षरता को सुदृढ़ करना: ग्रामीण और कमजोर जनसंख्या के लिए जागरूकता और डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार।
- डेटा संरक्षण सुनिश्चित करना: सहमति-आधारित और सुरक्षित डेटा साझाकरण हेतु सुदृढ़ सुरक्षा उपाय लागू करना।
- समावेशी AI मॉडल: पारदर्शी और निष्पक्ष AI एल्गोरिद्म विकसित करना ताकि वित्तीय पहुँच समान रूप से सुनिश्चित हो।
- DPI अवसंरचना का विस्तार: डिजिटल कनेक्टिविटी और अंतिम छोर तक वित्तीय अवसंरचना में सुधार।
- नियामक निगरानी को सुदृढ़ करना: साइबर सुरक्षा ढाँचे और AI शासन मानकों को सुदृढ़ करना।
स्रोत: PIB
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