पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- एक पेशेवर एजेंसी ने खुलासा किया है कि विनियमित डेटा, जिसमें रोगी अभिलेख और चिकित्सीय जानकारी शामिल है, विशेष रूप से जोखिम में है। यह जनरेटिव एआई के उपयोग से संबंधित सभी डेटा नीति उल्लंघनों का 89% हिस्सा है।
स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग
- एआई-आधारित उपकरण रोगों का निदान और पूर्वानुमान कर सकते हैं, नैदानिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर सकते हैं, अस्पताल प्रबंधन में सुधार कर सकते हैं, औषधि खोज में सहायता कर सकते हैं तथा स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा दे सकते हैं।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई हेतु चार प्राथमिकताएँ
- अनुसंधान संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण डेटा का संकलन।
- निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी स्थापित करना।
- ICMR के संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से वास्तविक विश्व के प्रमाण उत्पन्न करना।
- स्वास्थ्य और चिकित्सीय पेशेवरों को शीघ्रता से एआई कार्यबल पाइपलाइन में सम्मिलित करना।

स्वास्थ्य सेवा में एआई उपयोग के पक्ष में तर्क
- निदान की सटीकता में सुधार: एआई बड़े चिकित्सीय डेटासेट और इमेजिंग स्कैन का शीघ्र विश्लेषण कर सकता है, जिससे डॉक्टर रोगों का पहले एवं अधिक सटीक चरण में पता लगा सकते हैं।
- दक्षता और समय की बचत: एआई नियमित कार्यों जैसे चिकित्सीय अभिलेख प्रबंधन, समय निर्धारण और डेटा विश्लेषण को स्वचालित करता है, जिससे स्वास्थ्यकर्मी रोगी देखभाल पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
- व्यक्तिगत उपचार: एआई आनुवंशिक जानकारी, जीवनशैली डेटा और चिकित्सीय इतिहास का विश्लेषण कर व्यक्तिगत उपचार योजनाएँ तैयार कर सकता है।
- रोगों का प्रारंभिक पूर्वानुमान और रोकथाम: एआई मॉडल स्वास्थ्य डेटा में पैटर्न पहचानकर संभावित रोगों का पूर्वानुमान लगा सकते हैं, जिससे निवारक स्वास्थ्य सेवा और समय पर हस्तक्षेप संभव होता है।
- औषधि खोज और अनुसंधान में सुधार: एआई जटिल जैविक डेटा का विश्लेषण कर औषधि खोज एवं नैदानिक परीक्षण की प्रक्रिया को तीव्र करता है, जिससे नई दवाओं के विकास में समय और लागत कम होती है।
- स्वास्थ्य सेवा की बेहतर पहुँच: एआई-संचालित टेलीमेडिसिन और वर्चुअल स्वास्थ्य सहायक दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचा सकते हैं।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में सहयोग: एआई सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को रोग निगरानी, प्रकोप पूर्वानुमान एवं नीति नियोजन हेतु बड़े डेटासेट का विश्लेषण करने में सहायता करता है।
विरोध में तर्क
- एआई प्रॉम्प्ट्स के माध्यम से डेटा लीक का जोखिम: स्वास्थ्यकर्मी जनरेटिव एआई उपकरणों का उपयोग करते समय अनजाने में रोगी विवरण प्रॉम्प्ट्स या अपलोड किए गए दस्तावेज़ों में शामिल कर सकते हैं, जिससे बाहरी सर्वरों पर डेटा उजागर हो सकता है।
- व्यक्तिगत खातों का उपयोग: कई कर्मचारी सुरक्षित संस्थागत प्रणालियों के बजाय व्यक्तिगत एआई उपकरण या क्लाउड खातों का उपयोग करते हैं, जिससे संगठनों के लिए डेटा उल्लंघन की निगरानी या रोकथाम कठिन हो जाती है।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते साइबर सुरक्षा खतरे: स्वास्थ्य क्षेत्र पहले से ही साइबर अपराधियों का प्रमुख लक्ष्य है, और बढ़ती डिजिटलाइजेशन व एआई एकीकरण हमले की संभावना को बढ़ाते हैं।
- जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी: स्वास्थ्यकर्मी पर्याप्त साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण से वंचित हो सकते हैं, जिससे अनजाने में डेटा उजागर होने की संभावना बढ़ जाती है।
- नियामक और नैतिक चिंताएँ: रोगी डेटा का उल्लंघन डेटा संरक्षण कानूनों और चिकित्सीय गोपनीयता की नैतिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य प्रणालियों पर विश्वास कमजोर होता है।
भारत की एआई-स्वास्थ्य नीतियाँ
- भारत में स्वास्थ्य सेवा हेतु एआई की रणनीति (SAHI): SAHI एक अनुशंसात्मक राष्ट्रीय ढाँचे के रूप में कार्य करता है, जो बताता है कि एआई को स्वास्थ्य सेवाओं में कैसे एकीकृत किया जा सकता है।
- इसे एक राष्ट्रीय ढाँचे के रूप में शुरू किया गया है, जो भारत में स्वास्थ्य सेवा वितरण में एआई को एकीकृत करने के लिए एक संरचित रोडमैप प्रस्तुत करता है।
- BODH (स्वास्थ्य AI के लिए ओपन डेटा प्लेटफ़ॉर्म का बेंचमार्किंग): इसे एआई शिखर सम्मेलन के दौरान लॉन्च किया गया। यह स्वास्थ्य एआई समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले परीक्षण और सत्यापन हेतु एक संरचित तंत्र प्रदान करता है।
- इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित किया है।

Source: TH
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