गैर-अधिसूचित जनजातियों के लिए पृथक वर्गीकरण

पाठ्यक्रम: GS2/शासन/सामाजिक न्याय

समाचार में

  • केंद्र सरकार ने गैर -अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के नेताओं को आश्वासन दिया है कि उन्हें 2027 की जनगणना के दूसरे चरण में गिना जाएगा, लेकिन प्रक्रिया के विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं।

गैर -अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियाँ 

  • इन जनजातियों को औपनिवेशिक शासन के दौरान क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट (CTA), 1871 के अंतर्गत “अपराधी” करार दिया गया था, जिसमें कुछ समुदायों को जाति-आधारित वंशानुगत अपराध प्रवृत्ति वाला माना गया।
    • इस अधिनियम ने इन तथाकथित अपराधी जनजातियों के पंजीकरण, निगरानी और नियंत्रण की अनुमति दी।
  • CTA को 1952 में निरस्त कर दिया गया, जिससे इन समुदायों को आधिकारिक रूप से डीनोटिफाई  किया गया और गैर -अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों  की श्रेणी बनाई गई।
  • हालांकि उसी वर्ष राज्यों ने हैबिचुअल ऑफेंडर लॉज़ लागू किए, जिन्होंने वंशानुगत अपराधिता को हटाते हुए भी इन समुदायों को “आदतन अपराधी” के रूप में लक्षित किया और भेदभाव को नए रूप में जारी रखा।

गणना

  • इन जनजातियों की गणना 1911–1931 की जनगणनाओं में की गई थी।CTA निरस्तीकरण के बाद, गैर -अधिसूचित समुदायों को बड़े पैमाने पर SC, ST या OBC सूचियों में शामिल किया गया। राष्ट्रीय आयोगों ने बाद में DNTs को सही ढंग से वर्गीकृत करने के लिए एक समर्पित जनगणना की आवश्यकता पर बल दिया।
  • रेणके आयोग (2008): प्रथम राष्ट्रीय निकाय जिसने DNT समुदायों की सूची बनाई।
  • इदाते आयोग (2014–2017): लगभग 1,200 समुदायों की पहचान की जो SC/ST/OBC श्रेणियों में समाहित थे और 268 समुदायों को अवर्गीकृत पाया।
  • भारतीय मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण (AnSI): इन 268 समूहों का अध्ययन किया और उन्हें वर्तमान अनुसूचित सूचियों में शामिल करने की सिफारिश की, लेकिन कार्यान्वयन धीमा रहा।

मुद्दे और चिंताएँ

  • सामाजिक कलंक: DNTs, यद्यपि कई राज्यों में SC, ST और OBC सूचियों में शामिल हैं, फिर भी सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक हाशिए पर बने हुए हैं। इसका कारण आंशिक रूप से हैबिचुअल ऑफेंडर्स एक्ट जैसी कानूनों और लंबे समय से चले आ रहे कलंक हैं।
  • दस्तावेज़ीकरण की कमी: अस्पष्ट वर्गीकरण के कारण कई समुदाय जाति-आधारित आरक्षण से बाहर रह जाते हैं।
  • आर्थिक असुरक्षा: पारंपरिक आजीविकाएँ (लोककला, पशुपालन, घुमंतू व्यापार) घट गई हैं, जिससे वे निर्धनता का सामना कर रहे हैं।
  • शिक्षा अंतराल: उच्च निरक्षरता और औपचारिक शिक्षा तक कम पहुँच।
  • राजनीतिक अदृश्यता: विश्वसनीय जनगणना डेटा की अनुपस्थिति और नीति-निर्माण में कमजोर प्रतिनिधित्व।

सरकारी कदम

  • राष्ट्रीय आयोग (2014): DNT समुदायों की पहचान की और कल्याणकारी उपायों की सिफारिश की।
  • DNTs के लिए विकास और कल्याण बोर्ड (2019): योजनाओं और कल्याण कार्यक्रमों की देखरेख हेतु स्थापित।
  • सामाजिक न्याय विभाग ने DNT/NT/SNT के विकास एवं कल्याण हेतु ‘गैर -अधिसूचित जनजातियों के आर्थिक सशक्तिकरण की योजना (SEED)’ नामक एक योजना का निर्माण किया है।
    • यह योजना DNT समुदायों को शिक्षा (कोचिंग), स्वास्थ्य (आयुष्मान कार्ड), आजीविका (स्वयं सहायता समूह) तथा आवास (प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य योजनाएँ) के माध्यम से समर्थन प्रदान करती है।
  • अन्य कार्यक्रमों में DNT के लिए डॉ. आंबेडकर पूर्व-मैट्रिक एवं पश्चात-मैट्रिक छात्रवृत्ति (वर्ष 2014-15 से) तथा DNT विद्यार्थियों के लिए नानाजी देशमुख छात्रावास योजना सम्मिलित हैं।

स्रोत :TH

 

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