कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं रोजगार योग्यता(Employability)

पाठ्यक्रम: GS3/कृत्रिम बुद्धिमत्ता

संदर्भ

  • भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में रोजगार योग्यता का भविष्य” पर उच्च-स्तरीय चर्चा आयोजित हुई, जिसमें नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शिक्षाविदों और नवप्रवर्तकों ने भाग लिया।

परिचय

  • चर्चा में यह परखा गया कि स्वचालन के तीव्रता से बढ़ने के बीच कौन-सी कौशल, भूमिकाएँ और मानसिकताएँ प्रासंगिक बनी रहेंगी तथा व्यक्तियों को रोजगारयोग्य बने रहने के लिए क्या करना होगा।
  • वक्ताओं ने रचनात्मकता, सिस्टम थिंकिंग, अनुकूलनशीलता और आजीवन सीखने के महत्व पर बल दिया, जो संकीर्ण कार्य-आधारित विशेषज्ञता से अधिक मूल्यवान हैं।
  • मुख्य आर्थिक सलाहकार ने रेखांकित किया कि तकनीकी अपनाने को जन-रोजगारयोग्यता के साथ संरेखित करना एक स्पष्ट राष्ट्रीय प्रतिबद्धता होना चाहिए।
    • यह प्रयास केवल सरकार तक सीमित न रहकर टीम इंडिया पहल बने, जिसमें नीति-निर्माता, उद्योग, शिक्षाविद और समाज सम्मिलित हों।
  • विचार-विमर्श ने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि एआई बड़े व्यवधान लाता है, यह भारत को एक समावेशी, नवाचार-प्रेरित और उत्तरदायी एआई पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का अवसर भी देता है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं एवं नागरिक कल्याण के अनुरूप हो।
भारत–एआई इम्पैक्ट समिट 2026
आयोजक: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
-यह समिट प्रधानमंत्री द्वारा फ्रांस एआई एक्शन समिट में घोषित की गई थी और यह ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई समिट होगा।
-यह मौजूदा बहुपक्षीय पहलों को सुदृढ़ करेगा और नई प्राथमिकताओं, परिणामों तथा सहयोगी ढाँचों को आगे बढ़ाएगा।
तीन सूत्र: लोग, ग्रह और प्रगति — ये तीन आधारभूत स्तंभ परिभाषित करते हैं कि बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से एआई को सामूहिक लाभ हेतु कैसे दोहन किया जा सकता है।

भारत में रोजगारों पर एआई का प्रभाव

  • सामान्य, दोहराव वाले कार्य सबसे अधिक प्रभावित: BPO/कस्टमर सर्विस, बुनियादी लिपिकीय कार्य, असेंबली-लाइन कार्य और नियमित लॉजिस्टिक्स जैसी भूमिकाएँ एआई-आधारित स्वचालन से काफी कम हो सकती हैं।
  • पारंपरिक मध्यम-कौशल रोजगार : जो स्थिर रोजगार देती थीं, अब स्वचालन के कारण दबाव में हैं।
  • आईटी और आउटसोर्सिंग: एआई उपकरण कोडिंग, परीक्षण और सपोर्ट कार्य संभाल रहे हैं, जिससे प्रमुख आईटी कंपनियों और आउटसोर्सिंग फर्मों में कार्यबल पुनर्गठन हो रहा है।

उभरते अवसर

  • नई तकनीकें ऐसे रोजगार सृजित कर रही हैं जो पहले अस्तित्व में नहीं थे, जैसे: एआई/एमएल इंजीनियर, डेटा वैज्ञानिक और विश्लेषक, क्लाउड आर्किटेक्ट, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, एआई प्रोडक्ट मैनेजर एवं प्रॉम्प्ट इंजीनियर
    • ये भूमिकाएँ उच्च वेतन प्राप्त करती हैं और इनकी मांग तीव्रता से बढ़ रही है।
    • अनुमान है कि आगामी कुछ वर्षों में लाखों नए टेक रोजगार जुड़ेंगे; केवल भारत में 2027 तक लगभग 4.7 मिलियन एआई/टेक भूमिकाएँ उभर सकती हैं।
  • कौशल मांग में परिवर्तन: 2030 तक भारत की लगभग 38% कार्यबल को कौशल आवश्यकताओं में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है, जो BRICS देशों में सबसे अधिक है।
    • पारंपरिक शैक्षणिक प्रमाणपत्र रोजगार योग्यता  के कम संकेतक बन रहे हैं; भर्तीकर्ता तकनीकी कौशल, विश्लेषणात्मक क्षमता और अनुकूलनशील सीखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

आगे की राह

  • अपस्किलिंग और रिस्किलिंग की आवश्यकता: भारत को बड़े पैमाने पर पुनःकौशल की आवश्यकता है; अनुमान है कि 2027 तक 1.6 करोड़ से अधिक श्रमिकों को एआई और स्वचालन तकनीकों में पुनःकौशल की आवश्यकता होगी।
  • सरकार और उद्योग की पहलें: राष्ट्रीय रणनीतियाँ और साझेदारियाँ छात्रों एवं श्रमिकों को एआई तथा तकनीकी दक्षताओं से सक्षम बनाने पर केंद्रित हैं।
    • बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट कौशल-निर्माण पहलें कार्यबल की तैयारी को बढ़ावा देने के लिए चल रही हैं।

निष्कर्ष

  • यद्यपि कुछ पारंपरिक भूमिकाएँ घटेंगी या परिवर्तित होंगी, नई संभावनाओं का एक गतिशील परिदृश्य खुल रहा है जो उन्नत तकनीकी क्षमताओं, सतत सीखने और अनुकूलनशीलता को पुरस्कृत करता है।
  • इस संक्रमण के लिए सरकार, उद्योग और शिक्षा प्रणाली के समन्वित प्रयास आवश्यक होंगे ताकि भारत का कार्यबल भविष्य के कार्य के लिए तैयार हो सके।
सरकारी पहलें
फ्यूचरस्किल्स(FutureSkills) PRIME (राष्ट्रीय पुनःकौशल एवं अपस्किलिंग प्लेटफ़ॉर्म): MeitY और NASSCOM की साझेदारी में एक प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम, जो आईटी पेशेवरों और युवाओं को एआई सहित 10 नई एवं उभरती तकनीकों में कौशल प्रदान करता है।
स्किल इंडिया मिशन:भारत का व्यापक ‘स्किल इंडिया मिशन’ अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा प्रौद्योगिकी से संबंधित अनेक घटकों को समाहित करता है। 
यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी कौशलों के प्रारंभिक परिचय को प्रोत्साहित करता है तथा व्यावसायिक मार्गों को भविष्य की प्रौद्योगिकी आधारित भूमिकाओं में रोजगार योग्यता से संबद्ध करता है।
NCVET: नेशनल प्रोग्राम ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (NPAI) स्किलिंग फ्रेमवर्क विकसित किया है, जो एआई, डेटा विज्ञान और उभरती तकनीकों में कौशल के लिए राष्ट्रीय रोडमैप, संरचना एवं दिशा-निर्देश प्रस्तुत करता है।
SOAR पहल: एमएसडीई द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय पहल, जिसका उद्देश्य स्कूल छात्रों (कक्षा 6–12) में एआई जागरूकता और बुनियादी कौशल स्थापित करना तथा शिक्षकों में एआई साक्षरता विकसित करना है।
DGT सहयोग: IBM इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट, सिस्को, एडोबी इंडिया, AWS आदि के साथ CSR के तहत कौशल पहलें।
सेक्टर स्किल काउंसिल्स (SSCs): उद्योग और वैश्विक विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी से पाठ्यक्रम सह-विकसित करते हैं एवं ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स आयोजित करते हैं।
अग्रणी उद्योग साझेदार पाठ्यक्रम समर्थन और एआई, रोबोटिक्स तथा क्लाइमेट टेक में अप्रेंटिसशिप/इंटर्नशिप प्रदान करते हैं।

स्रोत: PIB

 

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