पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- फ्रांस के राष्ट्रपति भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आए, जहाँ उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लिया।
प्रमुख परिणाम
- प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के साथ ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ की स्थापना की घोषणा की।
- भारत और फ्रांस ने छठे भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद में रक्षा सहयोग समझौते को आगामी 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया।
- उन्नत साझेदारी और होराइजन 2047 रोडमैप के कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा हेतु वार्षिक विदेश मंत्रियों संवाद की स्थापना।
- भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष और भारत-फ्रांस नवाचार नेटवर्क का शुभारंभ।
- कर्नाटक के वेमगल में H125 हेलीकॉप्टर फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन।
- बीईएल और सफ्रान के बीच संयुक्त उद्यम, जिसके अंतर्गत भारत में HAMMER मिसाइलों का उत्पादन होगा।
- भारत ने फ्रांस से राफेल में “स्वदेशी सामग्री” को 50% तक बढ़ाने और भारत में राफेल के मेंटेनेंस, रिपेयर एवं ओवरहॉल सुविधा का विस्तार करने का अनुरोध किया।
- भारतीय सेना और फ्रांसीसी थल सेना प्रतिष्ठानों में अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती।
भारत-फ्रांस संबंधों की प्रमुख विशेषताएँ
- रणनीतिक साझेदारी: 26 जनवरी 1998 को शुरू हुई, यह भारत की प्रथम रणनीतिक साझेदारी थी।
- मुख्य दृष्टि: रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाना और द्विपक्षीय सहयोग को बेहतर करना।
- प्रमुख स्तंभ: रक्षा और सुरक्षा, नागरिक परमाणु सहयोग, अंतरिक्ष सहयोग।
- विस्तारित क्षेत्र: इंडो-पैसिफिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, डिजिटलाइजेशन, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, उन्नत तकनीकें और आतंकवाद-रोधी प्रयास।
- रक्षा सहयोग: वार्षिक रक्षा संवाद (मंत्री-स्तर) और उच्च रक्षा सहयोग समिति (सचिव-स्तर) के माध्यम से समीक्षा।
- राफेल लड़ाकू विमान: भारत ने 36 राफेल खरीदे।
- स्कॉर्पीन पनडुब्बियाँ (प्रोजेक्ट P-75): फ्रांस की नेवल ग्रुप के साथ सहयोग, 6 पनडुब्बियाँ भारत में निर्मित; नवीनतम है आईएनएस वाघशीर।
- लड़ाकू विमान इंजन विकास: HAL और सफ्रान हेलीकॉप्टर इंजन ने IMRH कार्यक्रम के अंतर्गत इंजन सह-विकास समझौता किया।
- हाल ही में दोनों देशों ने भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-M लड़ाकू विमानों की खरीद हेतु अंतर-सरकारी समझौता (IGA) किया।
- भविष्य की योजना: अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान इंजन का सह-विकास।
- संयुक्त अभ्यास: शक्ति, वरुणा, FRINJEX-23।
- आर्थिक सहयोग: यूरोपीय संघ में फ्रांस भारत का पाँचवाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, जो नीदरलैंड, बेल्जियम, इटली और जर्मनी के बाद आता है।
- 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 15.11 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा।
- दोनों देश संयुक्त रूप से तकनीक विकसित कर रहे हैं और वर्तमान तकनीकों का एकीकरण कर रहे हैं।
- फ्रांस में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) का सफल कार्यान्वयन।
- भारत में नवीकरणीय ऊर्जा, सतत निर्माण और शहरी अवसंरचना में फ्रांसीसी तकनीकों का समावेश।
- अंतरिक्ष सहयोग:ISRO और CNES (फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी) के बीच 60 वर्षों से अधिक का सहयोग।
- फ्रांस प्रमुख घटक और लॉन्च सेवाएँ (Arianespace) प्रदान करता है।
- संयुक्त मिशन: TRISHNA, MDA सिस्टम, ग्राउंड स्टेशन समर्थन।
- ऊर्जा सहयोग:
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा सह-स्थापित।
- नाभिकीय ऊर्जा सहयोग: 2025 में विशेष कार्यबल की प्रथम बैठक।
- दोनों पक्ष SMR (छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर) और AMR (उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टर) पर साझेदारी के लिए सहमत।
- समुदाय: फ्रांस में लगभग 1,19,000 भारतीय समुदाय रहते हैं, जिनमें से अधिकांश पूर्व फ्रांसीसी उपनिवेशों से हैं।
चिंताएँ
- व्यापार असंतुलन: द्विपक्षीय व्यापार अपनी संभावनाओं से कम बना हुआ है, विशेषकर भारत के अन्य यूरोपीय संघ देशों के साथ व्यापार की तुलना में।
- तकनीकी हस्तांतरण एवं रक्षा प्रतिबंध: यद्यपि फ्रांस ने भारत के रक्षा लक्ष्यों का समर्थन किया है, फिर भी बड़े रक्षा उपकरणों में तकनीकी हस्तांतरण की गहराई को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
- नाभिकीय दायित्व संबंधी चिंताएँ: 2008 में नागरिक नाभिकीय समझौते और जैतापुर में रिएक्टरों की योजना के बावजूद प्रगति धीमी रही है।
- सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट (2010) फ्रांसीसी कंपनियों के लिए बाधा उत्पन्न करता है क्योंकि यह नाभिकीय दुर्घटना की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं पर दायित्व लागू करता है।
- भूराजनीतिक अंतर: चीन के साथ फ्रांस के सुदृढ़ आर्थिक संबंध कभी-कभी इंडो-पैसिफिक मुद्दों पर भारत के साथ पूर्ण सामंजस्य को कमजोर कर देते हैं।
- मध्य पूर्व की राजनीति के प्रति दृष्टिकोण में भी समय-समय पर अंतर दिखाई देता है।
भविष्य की दिशा
- होराइजन 2047 रोडमैप की परिकल्पना: भारत-फ्रांस साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दोनों देशों ने वर्ष 2047 तक द्विपक्षीय संबंधों की दिशा निर्धारित करने हेतु एक रोडमैप अपनाने पर सहमति व्यक्त की।
- उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के संयुक्त विकास और उत्पादन को प्रोत्साहन।
- संयुक्त रूप से विकसित उत्पादों का वैश्विक हित में तृतीय देशों को निर्यात।
- समुद्री एवं अंतरिक्ष सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करना।
- रणनीतिक संवाद तथा संयुक्त सैन्य उपस्थिति के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती अभिसरण सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष
- भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग उनकी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का आधार है।
- संप्रभुता, बहुपक्षवाद और क्षेत्रीय स्थिरता में साझा हितों के साथ, दोनों देश होराइजन 2047 दृष्टि के तहत संबंधों को और ऊँचाई पर ले जाने के लिए तैयार हैं — जिससे रक्षा सहयोग अधिक सहयोगात्मक, नवोन्मेषी एवं निर्यात-उन्मुख बनेगा।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 17-02-2026