कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा भारतीय कृषि का रूपांतरण

पाठ्यक्रम: GS3/ कृषि/ विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रैंकिंग्स के अनुसार भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता में विश्व में तीसरे स्थान पर है और कृषि क्षेत्र में स्थिरता तथा लचीलापन सुदृढ़ करने हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता हुआ उपयोग कर रहा है।

भारतीय कृषि के लिए एआई क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • भारतीय कृषि संरचनात्मक बाधाओं का सामना कर रही है, जैसे विखंडित भूमि स्वामित्व, जलवायु परिवर्तनशीलता, मूल्य अस्थिरता और कम उत्पादकता।
  • जलवायु परिवर्तन ने चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति बढ़ा दी है, जिससे पूर्वानुमान तकनीकों की आवश्यकता अनिवार्य हो गई है।
  • छोटे और सीमांत किसान (कुल किसानों का 85% से अधिक) सुलभ और डेटा-आधारित परामर्श प्रणालियों की आवश्यकता रखते हैं।
  • राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप किसानों की आय बढ़ाने हेतु कुशल जोखिम प्रबंधन और बाज़ार तक पहुँच आवश्यक है।

कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका

  • मृदा स्वास्थ्य निदान: एआई गहन शिक्षण और छवि पहचान का उपयोग कर उपग्रह चित्रों, ड्रोन-आधारित अवलोकनों एवं खेत-स्तरीय छवियों से संकेतों का विश्लेषण कर मृदा स्वास्थ्य की निगरानी करता है।
  • कृषि यंत्रीकरण दक्षता: मशीन लर्निंग, ड्रोन अनुप्रयोग और रिमोट सेंसिंग जैसी एआई तकनीकें खेती की दक्षता में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही हैं।
    • उद्यानिकी में निगरानी: जहाँ फसलों को विभिन्न वृद्धि चरणों में निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है, वहाँ एआई-आधारित प्रणालियाँ उच्च-मूल्य वाली फसलों की चौबीसों घंटे निगरानी प्रदान करती हैं।
  • किसानों के लिए मूल्य प्राप्ति: एआई-आधारित पूर्वानुमान विश्लेषण, e-NAM, AGMARKET, कृषि जनगणना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम जैसे प्लेटफार्मों से प्राप्त बड़े डेटा सेट का उपयोग कर मूल्य प्रवृत्तियों, आगमन प्रवृति एवं क्षेत्रीय मांग पैटर्न का आकलन करता है।
  • जलवायु-स्मार्ट कृषि: एआई मौसम पैटर्न का पूर्वानुमान कर सकता है और चरम मौसम घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रदान कर सकता है, जिससे किसान निवारक उपाय कर सकें।
    • WINDS (मौसम सूचना और नेटवर्क डेटा सिस्टम) जैसे प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण जोखिम आकलन को सुदृढ़ करता है।

एआई-आधारित कृषि में सरकारी पहल

  • किसान ई-मित्र (2023): एक वॉयस-सक्षम, एआई-समर्थित चैटबॉट जो किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं पर प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करता है।
    •  यह प्लेटफॉर्म 11 क्षेत्रीय भाषाओं में संचालित होता है और प्रतिदिन 8,000 से अधिक किसान प्रश्नों का समाधान करता है।
  • राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS, 2024): एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग कर कीट संक्रमण और फसल रोगों की प्रारंभिक पहचान सक्षम करता है।
  • भारत-विस्तार (केंद्रीय बजट 2026-27): एक बहुभाषी एआई उपकरण जो एग्रीस्टैक पोर्टल और ICAR पैकेज को एआई प्रणालियों के साथ एकीकृत करता है।
  • एआई-सक्षम फसल बीमा:
    • CROPIC: मोबाइल ऐप्स के माध्यम से अपलोड की गई जियो-टैग्ड और समय-चिह्नित छवियों का उपयोग कर फसल क्षति आकलन में पारदर्शिता बढ़ाता है।
    • YES-TECH: रिमोट सेंसिंग और एआई विश्लेषण का उपयोग कर वैज्ञानिक उपज अनुमान प्रदान करता है।
  • कृषि निर्णय समर्थन प्रणाली (KDSS): विभिन्न स्रोतों से डेटा एकीकृत कर डिजिटल फसल मानचित्र, मृदा मानचित्र, उपज अनुमान तथा सूखा और बाढ़ निगरानी आकलन जैसे व्यापक विश्लेषणात्मक परिणाम उत्पन्न करता है।

भारतीय कृषि में एआई अपनाने की चुनौतियाँ

  • ग्रामीण संपर्क अंतराल: छोटे और सीमांत किसानों के पास प्रायः  स्मार्टफोन, IoT उपकरण या डिजिटल अवसंरचना तक पहुँच नहीं होती, जिससे असमानता उत्पन्न होती है।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति व्यवधान एआई-सक्षम उपकरणों के प्रभावी उपयोग को और बाधित करते हैं।
  • डेटा गोपनीयता: एआई प्रणालियाँ भूमि अभिलेख, फसल पैटर्न, वित्तीय विवरण और उपज डेटा जैसे बड़े डेटा सेट पर निर्भर करती हैं।
    •  किसान-केंद्रित डेटा स्वामित्व ढाँचे की अनुपस्थिति से दुरुपयोग या वाणिज्यिक शोषण की संभावना बढ़ जाती है।
  • उन्नत प्रौद्योगिकियों की उच्च लागत: ड्रोन, एआई-आधारित सेंसर, रोबोटिक्स और स्वचालित मशीनरी जैसे परिशुद्ध कृषि उपकरणों में उच्च प्रारंभिक पूँजी निवेश की आवश्यकता होती है।
    • औसत भूमि आकार (~1–1.2 हेक्टेयर) छोटा होने से पैमाने की अर्थव्यवस्था घटती है और व्यक्तिगत अपनाना वित्तीय रूप से अव्यवहार्य हो जाता है।

आगे की राह

  • यद्यपि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय कृषि के लिए रूपांतरणकारी क्षमता रखती है, इसकी सफलता संरचनात्मक असमानताओं, शासन अंतराल और क्षमता सीमाओं को संबोधित करने पर निर्भर करती है।
  • ग्रामीण डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ एक सुदृढ़ कृषि डेटा शासन ढाँचा स्थापित करने की आवश्यकता है, जो किसान की सहमति, डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
  • साथ ही, एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) और सहकारी समितियों के माध्यम से साझा-सेवा मॉडल को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि प्रौद्योगिकी लागत कम की जा सके।

स्रोत: PIB

 

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