संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS)

पाठ्यक्रम: GS2/ कल्याणकारी योजना

संदर्भ 

  • हाल ही में MPLADS (MPLADS) निधियों के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और आलोचकों ने इस योजना को समाप्त करने की माँग की।

योजना को समाप्त करने के लिए आलोचनात्मक तर्क  

  • आलोचकों, जिनमें द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) भी शामिल है, ने इसके निरसन के पक्ष में निम्न आधार प्रस्तुत किए:
    • शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन: यह योजना विधायकों (सांसदों) को कार्यपालिका संबंधी कार्य करने की अनुमति देती है (विशिष्ट स्थानीय परियोजनाओं पर निर्णय लेना)। इससे विधायिका और कार्यपालिका के बीच की रेखा अस्पष्ट हो जाती है।
    • संघवाद संबंधी चिंताएँ: MPLADS के अंतर्गत आने वाले विषय (स्वच्छता, स्थानीय सड़कें आदि) राज्य सूची और स्थानीय निकायों (73वें/74वें संशोधन) के अंतर्गत आते हैं। आलोचकों का कहना है कि संघ सरकार स्थानीय शासन के क्षेत्र में “हस्तक्षेप” कर रही है।
    • अक्षमता: कैग (CAG) की रिपोर्टें लगातार यह दर्शाती हैं कि निधियाँ प्रायः “वर्तमान  परिसंपत्तियों के सुधार” में व्यय की जाती हैं, न कि “स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों” के निर्माण में।

MPLADS के बारे में

  • संक्षेप: संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसे 1993 में प्रारंभ किया गया और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा प्रशासित किया जाता है।
  • उद्देश्य: सांसदों को स्थानीय आवश्यकताओं जैसे पेयजल, स्वच्छता, सड़कें, सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना आदि के आधार पर स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण हेतु कार्यों की अनुशंसा करने में सक्षम बनाना।
  • क्रियान्वयन तंत्र: सांसद केवल कार्यों की अनुशंसा करते हैं, उनका क्रियान्वयन में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। परियोजनाएँ सरकारी विभागों, ट्रस्टों या सहकारी संस्थाओं द्वारा लागू की जाती हैं, जिन्हें क्रियान्वयन जिला प्राधिकरण (IDA), सामान्यतः जिला कलेक्टर, द्वारा चुना जाता है, जिससे कार्यपालिका का नियंत्रण सुनिश्चित होता है।
  • निधि आवंटन: प्रत्येक सांसद को प्रति वर्ष ₹5 करोड़ की राशि MPLADS के अंतर्गत दी जाती है। यह निधि वर्तमान विकास योजनाओं को पूरक करने और स्थानीय कमी को दूर करने हेतु होती है।
    • इसमें सांसदों को वार्षिक रूप से कम से कम 15% निधि अनुसूचित जाति (SC) बहुल क्षेत्रों और 7.5% निधि अनुसूचित जनजाति (ST) बहुल क्षेत्रों के लिए अनुशंसित करनी होती है।
  • गैर-लुप्त निधि: MPLADS निधि गैर-लुप्त होती है, अर्थात अप्रयुक्त निधि आगामी वर्षों में स्थानांतरित कर दी जाती है, जिससे परियोजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
  • भौगोलिक कवरेज: लोकसभा सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में कार्यों की अनुशंसा कर सकते हैं, राज्यसभा सांसद अपने निर्वाचित राज्य में और नामित सांसद पूरे देश में कहीं भी अनुशंसा कर सकते हैं।
  • अपवाद: सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र/राज्य से बाहर प्रति वर्ष ₹25 लाख तक की अनुशंसा कर सकते हैं और प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रभावित जिले के लिए ₹1 करोड़ तक की अनुशंसा कर सकते हैं।

न्यायिक दृष्टिकोण

  • सर्वोच्च न्यायालय (2010):भीम सिंह बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने MPLADS की संवैधानिकता को बरकरार रखा।
    • न्यायालय ने कहा कि भारत में “शक्तियों का पृथक्करण” कठोर नहीं है और जब तक सांसद की भूमिका “अनुशंसा” तक सीमित है और जिला प्राधिकरण “क्रियान्वयन” करता है, योजना वैध है।
  • जवाबदेही व्यवस्था: न्यायालय ने यह भी कहा कि कुछ लोगों द्वारा दुरुपयोग मात्र योजना को समाप्त करने का आधार नहीं हो सकता, क्योंकि कैग ऑडिट और संसदीय समितियों जैसी जाँच व्यवस्थाएँ विद्यमान हैं।

आगे की राह

  • MPLADS की निगरानी व्यवस्था को वास्तविक समय डिजिटल डैशबोर्ड, परिसंपत्तियों का जियो-टैगिंग और समयबद्ध पूर्णता मानकों के माध्यम से सुदृढ़ किया जाना चाहिए, ताकि विलंब कम हो तथा परिणाम बेहतर हों।
  • पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अनुशंसित कार्यों, निधि वितरण, उपयोग प्रमाणपत्र और पूर्णता स्थिति का जिला स्तर पर सार्वजनिक प्रकटीकरण अनिवार्य किया जाना चाहिए।
  • उच्च मूल्य वाली परियोजनाओं में दुरुपयोग, निधि विचलन और राजनीतिक पक्षपात को रोकने हेतु तृतीय-पक्ष ऑडिट एवं सामाजिक ऑडिट को संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए।
  • MPLADS को जिला योजना प्रक्रियाओं के साथ बेहतर रूप से एकीकृत किया जाना चाहिए, जिससे पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के साथ अभिसरण सुनिश्चित हो, जो 73वें एवं 74वें संवैधानिक संशोधनों की भावना के अनुरूप है।

स्रोत: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन संदर्भ भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने व्हाट्सऐप और उसकी मूल कंपनी मेटा को “निगरानी पूँजीवाद” (surveillance capitalism) मॉडल अपनाने तथा भारतीय उपयोगकर्ताओं के गोपनीयता अधिकार का उल्लंघन करने के लिए डेटा साझाकरण एवं वाणिज्यिक शोषण के माध्यम से कड़ी चेतावनी दी। पृष्ठभूमि   2021 में, व्हाट्सऐप ने अपनी सेवा शर्तों को अद्यतन किया,...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण  समाचार में   पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 को प्रतिस्थापित करते हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026   ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं और 1 अप्रैल, 2026 से पूर्ण रूप...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था; न्यायपालिका संदर्भ नालसर विश्वविद्यालय विधि के स्क्वेयर सर्कल क्लिनिक द्वारा प्रकाशित मृत्युदंड पर वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विगत तीन वर्षों में एक भी मृत्युदंड की पुष्टि नहीं की है, जो मृत्युदंड के प्रति अत्यंत प्रतिबंधात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष अधीनस्थ न्यायालय मृत्युदंड देना जारी...
Read More

न्यू स्टार्ट संधि (New START Treaty)   पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध समाचार में   विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि न्यू स्टार्ट संधि की समाप्ति से विश्व की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के परमाणु शस्त्रागार पर शेष अंतिम कानूनी बाध्यता समाप्त हो जाएगी। पृष्ठभूमि   START शब्द का उद्गम “रणनीतिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (Strategic Arms Reduction Treaty)” से...
Read More
scroll to top