भारत के लिए ‘पैक्स सिलिका’ का महत्व

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था; विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ 

  • हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रथम पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें बलपूर्वक निर्भरताओं को कम करने, महत्वपूर्ण खनिजों के प्रवाह को सुरक्षित करने और विश्वसनीय डिजिटल पारिस्थितिक तंत्र को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

‘पैक्स सिलिका’ के बारे में

  • ‘पैक्स सिलिका’ शब्द लैटिन ‘Pax’ (शांति) और ‘Silica’ (अर्धचालकों का एक प्रमुख यौगिक) से व्युत्पन्न है।
  • यह लचीली, पारदर्शी और सहयोगात्मक आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से तकनीकी शांति और समृद्धि की खोज का प्रतीक है।

‘पैक्स सिलिका’ की आवश्यकता 

  • आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा: अर्धचालकों और एआई प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (REEs) और महत्वपूर्ण खनिजों तक विश्वसनीय एवं विविधीकृत पहुँच सुनिश्चित करना।
  • चीन पर निर्भरता कम करना: वैश्विक REE आपूर्ति श्रृंखलाओं और प्रौद्योगिकी निर्यात पर चीन के प्रभुत्व एवं बलपूर्वक नियंत्रण का सामना करना।
  • लचीला प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र: एआई और अर्धचालकों जैसी अग्रणी प्रौद्योगिकियों के लिए लचीली, पारदर्शी और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करना।
  • आर्थिक स्थिरता और सामरिक संतुलन: एकाधिकार उत्पादन या भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न व्यवधानों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की रक्षा करना।
  • सहयोगी तकनीकी साझेदारी: तकनीकी महाशक्तियों (अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, इज़राइल) और संसाधन-समृद्ध देशों (ऑस्ट्रेलिया, यूएई, कतर) को संयुक्त नवाचार हेतु एक साथ लाना।
  • विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना का निर्माण: समान विचारधारा वाले देशों के बीच नैतिक एआई ढाँचे, साइबर सुरक्षा मानक और सुरक्षित अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना।
  • सतत खनन और नवाचार को प्रोत्साहन: महत्वपूर्ण खनिजों के जिम्मेदार दोहन, पुनर्चक्रण और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देना।
  • अमेरिकी तकनीकी नेतृत्व बनाए रखना: वैश्विक नवाचार शासन में अमेरिका की नेतृत्वकारी भूमिका को पुनः स्थापित करना और उभरते एआई–अर्धचालक युग में तकनीकी प्रधानता सुनिश्चित करना।

पैक्स सिलिका की संरचना 

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान: अर्धचालक और एआई में नवाचार एवं अनुसंधान के अग्रणी।
  • ऑस्ट्रेलिया: लिथियम का प्रमुख निर्यातक और REE खनन में महत्वपूर्ण खिलाड़ी।
  • नीदरलैंड: ASML का मुख्यालय, जो उन्नत लिथोग्राफी प्रणालियों में वैश्विक अग्रणी है।
  • दक्षिण कोरिया: मेमोरी चिप निर्माण में प्रमुख।
  • सिंगापुर: लंबे समय से अमेरिकी कंपनियों से जुड़ा चिप निर्माण केंद्र।
  • इज़राइल: एआई सॉफ्टवेयर, साइबर सुरक्षा और रक्षा प्रौद्योगिकियों में विशेषज्ञ।
  • यूनाइटेड किंगडम: विश्व का तीसरा सबसे बड़ा एआई बाजार, जीवंत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के साथ।
  • कतर और यूएई: वित्तीय महाशक्तियाँ, जो एआई और उन्नत प्रौद्योगिकियों में भारी निवेश कर रही हैं।
  • पर्यवेक्षक: कनाडा, यूरोपीय संघ, OECD और ताइवान ने उद्घाटन शिखर सम्मेलन में भाग लिया, तथा भविष्य में सदस्य बनने की संभावना है।

भारत की संभावित भूमिका 

  • डिजिटल अवसंरचना का विस्तार: भारत की तीव्र गति से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और एआई अपनाने की प्रवृत्ति पैक्स सिलिका के लक्ष्यों से मेल खाती है।
  • अर्धचालक महत्वाकांक्षाएँ: भारत के सेमीकंडक्टर और एआई मिशन के माध्यम से चिप डिज़ाइन और निर्माण में भारी निवेश किया जा रहा है।
  • रणनीतिक साझेदारी: जापान, इज़राइल, सिंगापुर और अमेरिका के साथ चिप निर्माण एवं अनुसंधान में सहयोग।
  • मानव पूंजी लाभ: STEM स्नातकों और लौटते एआई इंजीनियरों का बड़ा समूह भारत की वैश्विक नवाचार क्षमता को सुदृढ़ करता है।
  • लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएँ: क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव के अनुभव से भारत पैक्स सिलिका के उद्देश्यों का स्वाभाविक साझेदार बनता है।

भारत के लिए लाभ 

  • उन्नत प्रौद्योगिकी तक पहुँच: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान के अधिक अवसर।
  • निवेश और औद्योगिक वृद्धि: एआई और अर्धचालक क्षेत्रों में वैश्विक निवेश आकर्षित करना।
  • वैश्विक प्रतिष्ठा में वृद्धि: प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ वैश्विक तकनीकी शासन को आकार देने में भूमिका।
  • आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा: चीन से REE निर्यात व्यवधानों के प्रति संवेदनशीलता में कमी।
  • वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण: उन्नत अर्धचालक और एआई उत्पादन नेटवर्क में प्रवेश।

भारत के लिए चुनौतियाँ 

  • रणनीतिक स्वायत्तता: अपनी गुटनिरपेक्ष विदेश नीति को अमेरिकी नेतृत्व वाले समूह में भागीदारी के साथ संतुलित करना।
  • आर्थिक अंतर: भारत का विकसित हो रहा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र पैक्स सिलिका के स्थापित सदस्यों से पीछे है।
  • नीतिगत भिन्नताएँ: भारत की सब्सिडी- और संरक्षण-आधारित औद्योगिक नीति उच्च-आय वाले सदस्यों के बाज़ार-आधारित दृष्टिकोण के साथ विसंगति उत्पन्न कर सकती है।
  • अपेक्षा अंतर: पहले विकासशील और गैर-अमेरिकी सहयोगी सदस्य के रूप में भारत को समूह के अंदर विभिन्न अपेक्षाओं का प्रबंधन करना होगा।

रणनीतिक निहितार्थ

  • द्वैध आपूर्ति श्रृंखला व्यवस्था: विश्व दो REE और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिक तंत्रों में विकसित हो सकता है — एक चीन के नेतृत्व में एवं’ दूसरा पैक्स सिलिका के नेतृत्व में।
  • भारत का संरेखण विकल्प: भारत संभवतः पैक्स सिलिका के लोकतांत्रिक और पारदर्शी ढाँचे के साथ संरेखित होगा, जबकि सामरिक लचीलापन बनाए रखेगा।
  • क्षेत्रीय स्थिरता: पैक्स सिलिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और आर्थिक शांति को प्रोत्साहन दे सकता है।

Source: TH

 

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