पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- वैश्विक स्तर पर विद्युत वाहनों (EVs) की ओर हो रहा परिवर्तन तांबे की कमी की बढ़ती चुनौती को जन्म दे रहा है।
परिचय
- तांबा EV बैटरियों, मोटरों, वायरिंग, चार्जिंग अवसंरचना और विद्युत ग्रिड की रीढ़ है।
- EV अपनाने की गति तीव्र होने के साथ ही तांबे की मांग अभूतपूर्व वृद्धि के चरण में प्रवेश कर चुकी है, जिसे कई नीति-निर्माताओं और बाजारों ने कम आंका है।
| तांबा (Copper – Cu) – तांबा (Cu) एक लाल-नारंगी रंग का, नरम और अत्यधिक लचीला धातु है जिसका परमाणु क्रमांक 29 है। यह अपनी उत्कृष्ट विद्युत और ऊष्मा चालकता के लिए जाना जाता है। – इन गुणों के कारण यह विद्युत वायरिंग, ऊर्जा संचरण, प्लंबिंग और इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोगों में अत्यावश्यक है। – तांबा पीतल (तांबा–जस्ता) और कांस्य (तांबा–टिन) जैसे महत्वपूर्ण मिश्रधातुओं का भी प्रमुख घटक है, जो सुदृढ़ता और संक्षारण प्रतिरोध को बढ़ाते हैं। – वर्ष 2024 में विश्व के तांबे के भंडारों में चिली का योगदान 19%, पेरू का 12% और ऑस्ट्रेलिया का 10% था। – भारत में तांबे के प्रमुख अयस्क संसाधन राजस्थान के खेड़ी क्षेत्र, मध्य प्रदेश के मलांजखण्ड और झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में पाए जाते हैं। |
EV का विस्तार
- 2015 से 2025 के बीच वैश्विक EV बिक्री लगभग 0.55 मिलियन इकाइयों से बढ़कर अनुमानित 20 मिलियन इकाइयों तक पहुँच गई।
- इसके साथ ही तांबे की खपत लगभग 27.5 हज़ार टन से बढ़कर 1.28 मिलियन टन से अधिक हो गई, जिससे स्पष्ट होता है कि तांबा EV क्रांति की छिपी हुई रीढ़ है।
- अतः EV संक्रमण को केवल तकनीकी बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि धातुओं और बाजारों दोनों से सीमित एक संसाधन-गहन परिवर्तन के रूप में समझा जाना चाहिए।
तांबे की बढ़ती मांग से संबंधित चिंताएँ
- घाटा: तांबे की मांग तीव्र गति से बढ़ रही है, जबकि वैश्विक आपूर्ति स्थिर हो रही है, जिससे अंतराल बढ़ रहा है।
- प्रमुख उत्पादकों की चुनौतियाँ: वर्तमान खानों में अयस्क की गुणवत्ता में गिरावट, नए परियोजनाओं के लिए दशक-लंबी विकास समयसीमा, और चिली, पेरू तथा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में पर्यावरणीय विरोध आपूर्ति वृद्धि को सीमित कर रहे हैं।
- भविष्य की संभावनाएँ: यह अंतराल 2028 तक 4.5 मिलियन टन और 2030 तक लगभग 8 मिलियन टन तक बढ़ने की संभावना है, जो विश्व की 10 सबसे बड़ी तांबा खानों के उत्पादन के बराबर है।
- EV पर प्रभाव : ऐसी कमी EV की लागत बढ़ा सकती है, चार्जिंग अवसंरचना के विकास में विलंब कर सकती है और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों पर दबाव डाल सकती है।
- चीन का प्रभुत्व : चीन वैश्विक EV तांबा मांग का लगभग 60% हिस्सा रखता है।
- चीन वैश्विक बैटरी सेल उत्पादन का 70% से अधिक नियंत्रित करता है और इसकी आपूर्ति श्रृंखला गहराई से एकीकृत है।
- यह असमानता चीन को मूल्य निर्धारण, दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंधों और तांबा-समृद्ध क्षेत्रों पर रणनीतिक लाभ प्रदान करती है।
आगे की राह
- भारत वर्तमान में तांबे की आपूर्ति के मामले में आत्मनिर्भर नहीं है।
- 2023-24 में घरेलू अयस्क उत्पादन 3.78 मिलियन टन रहा, जो 2018-19 की तुलना में 8 प्रतिशत कम है।
- तांबा एक गहराई में पाया जाने वाला खनिज है, जिससे इसका अन्वेषण और खनन सतही या थोक खनिजों की तुलना में अधिक कठिन एवं महंगा होता है।
- अतः भारत को एक ऐसी रणनीति विकसित करनी चाहिए जिससे वह अपनी बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु एक लचीली तांबा आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण कर सके और आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न चरणों का अनुकूलन कर सके।
Source: TH