भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षा: संस्थागत सुधार और शासन

पाठ्यक्रम: GS2/शासन; खेल

संदर्भ

  • भारत के प्रधानमंत्री ने ओलंपिक खेलों (2036) की मेजबानी करने के भारत के लक्ष्य को दोहराया है। यह राष्ट्रमंडल खेलों (2030) की मेजबानी के निर्णय और घरेलू मंचों के विस्तार पर आधारित है, ताकि खिलाड़ियों की भागीदारी एवं अनुभव को व्यापक बनाया जा सके।

भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षा

  • भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षा सरकार के सतत निवेश के अनुरूप है, जिसमें अवसंरचना और खिलाड़ी विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • यह खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहलों पर आधारित है।
  • युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा जारी केंद्रीय बजट 2025–26 के अनुसार, भारत ने इस क्षेत्र के लिए ₹3,794.30 करोड़ आवंटित किए, जिसमें खेलो इंडिया के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया, जो अब तक का सबसे अधिक है।
    • यह केंद्र सरकार के बुनियादी स्तर पर प्रतिभा को पोषित करने और बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय खेलों में भागीदारी की तैयारी पर बल को दर्शाता है।
  • मंत्रालय ने भारत भर में 1,000 से अधिक खेलो इंडिया केंद्र स्थापित किए हैं, जो लगभग 3,000 खिलाड़ियों को कोचिंग, पोषण, उपकरण और चिकित्सा देखभाल के माध्यम से संरचित समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

क्यों ओलंपिक 2036 जोखिम बढ़ाता है?

  • अंतरराष्ट्रीय जांच और अनुपालन: अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) नैतिक शासन, खिलाड़ियों की सुरक्षा, लैंगिक समानता और वित्तीय पारदर्शिता पर बल देती है।
  • सार्वजनिक निवेश का पैमाना: ओलंपिक की मेजबानी में अवसंरचना, शहरी विकास और सुरक्षा पर भारी सार्वजनिक व्यय शामिल होता है।
    • जोखिमों में लागत बढ़ना, पक्षपातपूर्ण अनुबंध और बिना सुदृढ़ शासन तंत्र के अनुपयोगी ‘व्हाइट एलीफेंट’ स्टेडियम शामिल हैं।

क्यों संस्थागत और शासन सुधार आवश्यक हैं?

  • खंडित और अपारदर्शी संरचना: अधिकांश राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSFs) स्वायत्त निकायों के रूप में कार्य करते हैं, जो प्रायः लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों द्वारा संचालित होते हैं और खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व सीमित होता है।
    • राष्ट्रीय खेल विकास संहिता (2011): आयु सीमा, कार्यकाल सीमा और पारदर्शिता मानदंड लागू करने के लिए बनाई गई थी, लेकिन महासंघों के लगातार विरोध के कारण यह मुकदमों एवं प्रशासनिक ठहराव का शिकार रही।
  • खेल निकायों का राजनीतिकरण: कई महासंघ राजनीतिक हस्तियों द्वारा संचालित होते हैं, न कि क्षेत्रीय विशेषज्ञता वाले पेशेवरों द्वारा।
    • इससे दक्षता और निर्णय लेने की निरंतरता प्रभावित होती है।
  • खिलाड़ियों के लिए संरचित मार्ग का अभाव: कई खिलाड़ी अपने खेल करियर के दौरान सीमित मार्गदर्शन, कौशल या अनुभव के कारण प्रशासनिक भूमिकाओं के लिए तैयार नहीं हो पाते।
    •  इससे नीति और प्रदर्शन के बीच संबंध कमजोर होता है।
  • डिजिटल और डेटा की कमी: भारत का खेल पारिस्थितिकी तंत्र डिजिटल अपनाने और डेटा विश्लेषण में पिछड़ा हुआ है।
    • आधुनिक खेल प्रबंधन में एकीकृत खिलाड़ी ट्रैकिंग, चोट निगरानी और प्रदर्शन विश्लेषण की आवश्यकता होती है।
  • क्षेत्रीय असमानता: राज्यों में वित्तपोषण और प्रदर्शन में असमानताएँ बनी हुई हैं।
    • खेलो इंडिया युवा खेलों में पदक तालिकाएँ कुछ संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में केंद्रित रहती हैं।सीख

भारत के राष्ट्रमंडल खेलों (2010) से सबक 

  • दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल (2010) ने शासन की खामियों और लागत अक्षमताओं को उजागर किया, बावजूद इसके कि भारत ने 101 पदक जीते।
  • इसने बेहतर परियोजना प्रबंधन, पारदर्शी खरीद और पेशेवर प्रशासन की आवश्यकता को रेखांकित किया, जो 2036 ओलंपिक की पूर्वापेक्षाएँ हैं।

संस्थागत और तकनीकी सुधार

  • भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE) शुरू किए हैं तथा एक डिजिटल एथलीट डेटाबेस सिस्टम पेश किया है, जो विश्लेषण, चोट ट्रैकिंग एवं प्रदर्शन डेटा को एकीकृत करता है।
    • ये सुधार खेल शासन को अधिक डेटा-आधारित और उत्तरदायी बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
  • इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय खेल विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (NCSSR) का विस्तार किया जा रहा है, ताकि साक्ष्य-आधारित कोचिंग, खेल चिकित्सा एवं तकनीकी एकीकरण को सुदृढ़ किया जा सके।
    • 2025 में अभिनव बिंद्रा के नेतृत्व वाले टास्क फोर्स ने राष्ट्रीय खेल महासंघों में शासन की खामियाँ, कमजोर जवाबदेही, कर्मचारियों की कमी और प्रशिक्षित प्रशासनिक कैडर की अनुपस्थिति को उजागर किया।
    • इसमें पाया गया कि वर्तमान खेल प्रशासन प्रशिक्षण खंडित और पुराना है, जिसमें व्यावहारिक प्रबंधन या संस्थागत समन्वय पर कम जोर है।
    • जैसे-जैसे भारत का खेल निवेश बढ़ रहा है, महत्वाकांक्षा और प्रशासनिक क्षमता के बीच का अंतर स्पष्ट होता जा रहा है।

आगे की राह: आकांक्षा से संस्थान तक

  • भारत का 2036 तक का मार्ग यह जाँच करेगा कि क्या वह बढ़ते उत्साह को सतत संस्थागत शक्ति में बदल सकता है।
  • खेलो इंडिया ने भागीदारी को व्यापक बनाया है और वित्तपोषण में सुधार हुआ है, लेकिन वास्तविक परिवर्तन चार स्तंभों पर निर्भर करता है:
    • पेशेवर खेल प्रशासन: कुशल और जवाबदेह खेल प्रबंधकों का कैडर बनाना।
    • शासन सुधार: राजनीतिक नियंत्रण को कम करना और पारदर्शी, योग्यता-आधारित नेतृत्व सुनिश्चित करना।
    • खिलाड़ी से प्रशासक मार्ग: संरचित मार्गदर्शन और संक्रमण कार्यक्रम बनाना।
    • डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण: खेल प्रबंधन के प्रत्येक स्तर पर विश्लेषण और तकनीक को एकीकृत करना।
  • भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षा इन सुधारों के बिना केवल उत्साह पर आधारित रह सकती है, न कि स्थायित्व पर।
    • ओलंपिक खेल (2036) एक परिभाषित माइलस्टोन हो सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब संस्थागत विश्वसनीयता और पेशेवर शासन महत्वाकांक्षा के साथ-साथ बढ़े।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] किस सीमा तक भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र में संस्थागत सुधार और शासन पुनर्गठन, उसकी 2036 की ओलंपिक महत्वाकांक्षाओं को रूपांतरित कर सकते हैं?

Source: BS

 

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